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Chandigarh News: ट्राइसिटी में मैट्रो के लिए वैकल्पिक रिपोर्ट और डीपीआर तैयार करने पर सहमति
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चंडीगढ़। ट्राइसिटी को मैट्रो प्रोजेक्ट से जोड़ने के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। केंद्र सरकार के निर्देश पर चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर के लिए कंप्रहेंसिव मोबिलिटी प्लान को और पुख्ता बनाने के लिए वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट और डीपीआर तैयार करने का निर्णय लिया है। बुधवार को यूटी सचिवालय में शहर के प्रशासक के सलाहकार डॉ. धर्मपाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया। इसके तहत प्रशासन अब एएआर यानी वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट और डीपीआर तैयार कर यूएमटीए (यूनिफाइड मेट्रो ट्रांसपोर्टेशन अथॉरिटी) की मंजूरी के बाद केंद्र को रिपोर्ट भेजेगा, जिसके बाद ही शहर में 10,500 करोड़ रुपये के प्रस्तावित मैट्रो प्रोजेक्ट का रास्ता साफ हो सकेगा। प्रशासन ने इसके लिए राइट्स कंपनी को रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। राइट्स सीएमपी को लेकर सुझाव देगी, जिसके बाद इन्हें यूनिफाइड मेट्रो ट्रांसपोर्टेशन अथॉरिटी की बैठक में रखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में सात-आठ माह का समय लग सकता है।
जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से यूएमटीए (यूनिफाइड मेट्रो ट्रांसपोर्टेशन अथॉरिटी) के गठन के बाद केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपी गई थी, जिसे केंद्र ने वापस करते हुए वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट और डीपीआर बनाने के लिए निर्देश प्रशासन को दिए। अब प्रशासन को मैट्रो के समानांतर शहर के लिए कंप्रीहेंसिव मोबिलिटी प्लान बनाना होगा, जिसके बाद ही इस प्रोजेक्ट का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा। बुधवार को हुई बैठक में राइट्स की टीम ने एमओएचयूए द्वारा जारी मेट्रो रेल नीति के अनुरूप एमआरटीएस (मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सीस्टम) की योजना के लिए नीतियां, दिशानिर्देश और प्रक्रिया की विस्तृत प्रस्तुति दी। चर्चा के बाद यह महसूस किया गया कि केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट (एएआर) और डीपीआर तैयार करने की आवश्यकता है, जिसे यूएमटीए/राज्य सरकार की मंजूरी के बाद भारत सरकार को अंतिम स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। बैठक में सचिव परिवहन नितिन कुमार यादव, वित्त सचिव विजय नामदेव जड़े और एसएसपी (ट्रैफिक) मनीषा चौधरी ने भाग लिया।
जल्द बुलाई जाएगी यूएमटीए की बैठक
बैठक में निर्णय लिया गया कि एएआर और डीपीआर तैयार करने के लिए एजेंसी की नियुक्ति के लिए यूनिफाइड मेट्रो ट्रांसपोर्टेशन अथॉरिटी (यूएमटीए) की बैठक जल्द से जल्द बुलाई जाएगी। इस पूरी परियोजना को सिरे चढ़ाने के लिए सात से आठ माह का समय लग सकता है।
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-डॉ. धर्मपाल, सलाहकार, प्रशासक चंडीगढ़
राइट्स ने प्रशासन को सुझाए थे ये विकल्प
हाउसिंग बोर्ड लाइट प्वाइंट के लिए सुझाव -1
कलाग्राम से मनीमाजरा कार पार्किंग तक 1.70 किलोमीटर का फ्लाईओवर बनाया जाए ताकि पिंजौर की तरफ जाने वाले ट्रैफिक को लाइटों पर रुकना न पड़े। लाल बत्तियों को हटाकर वहां 26 मीटर के रेडियस का एक चौक बनाया जाए। कलाग्राम की तरफ रेलवे काॅलोनी के पास की लाल बत्तियों को भी हटाकर 16 मीटर के रेडियस के टियर ड्रॉप जैसा चौक बनाया जाना चाहिए। सभी रास्तों पर टेबल टॉप और साढ़े तीन मीटर का एक रास्ता हो, जिसमें दो मीटर का फुटपाथ और डेढ़ मीटर का साइकिल ट्रैक हो। इसके अलावा मनीमाजरा के दशहरा-मेला ग्राउंड के पास एक वन वे लिंक रोड बनाने का भी सुझाव है।
हाउसिंग बोर्ड लाइट प्वाइंट के लिए सुझाव -2
हाउसिंग बोर्ड की लाल बत्तियों को हटाकर 26 मीटर के रेडियस का एक चौक बनाया जाए। इसके आगे चंडीगढ़ की तरफ जाकर रेलवे कालोनी के पास की लाल बत्तियों को भी हटाकर 16 मीटर के रेडियस के टियर ड्रॉप जैसा चौक बनाया जाना चाहिए। तीन लेन का एक राइट टर्न अंडरपास बनाया जाए जो चंडीगढ़ से मौलीजागरां और पंचकूला की तरफ जाने वाले ट्रैफिक के लिए हो। चंडीगढ़-पंचकूला रोड पर बस स्टॉप के लिए अलग जगह बनाई जाए। सभी रास्तों पर टेबल टॉप बनाए जाए। एक कंबाइन साढ़े तीन मीटर का रास्ता हो, जिसमें दो मीटर का फुटपाथ और डेढ़ मीटर का साइकिल ट्रैक हो।
प्रेस लाइट प्वाइंट के लिए सुझाव
लाइटों को हटाकर 50 मीटर के रेडियस का एक चौक बनाया जा सकता है। चौक के नीचे से गुजरता हुआ सेक्टर-18/8 और सेक्टर-17/9 की सड़कों के बीच चार लेन का एक अंडरपास बनाया जाए, ताकि मटका चौक की तरफ आने और जाने वाले ट्रैफिक को लालबत्तियों पर न रुकना पड़े। राइट्स की रिपोर्ट के अनुसार ज्यादा लालबत्तियों की वजह से अलग अलग जाम लगते हैं। चौक के पास चारों रास्तों पर टेबल टॉप बनाए जाएं, जिससे पैदल चलने और साइकिल सवारों के लिए आसानी हो।
मेट्रो प्रोजेक्ट का अब तक का सफर
2008 मिनिस्ट्री आफ अर्बन डेवलेपमेंट की ओर से चंडीगढ़ के लिए मेट्रो को अप्रूवल दी गई। 2009 राइट्स ने सीएमपी प्लान यूटी प्रशासन के पास जमा कर दिया। 2010 यूटी प्रशासन ने प्रोजेक्ट डीएमआरसी को सौंप दिया। 2017 मेट्रो को ट्राईसिटी के लिए कैंसिल कर दिया गया। 2019 में यूटी ने फिर से प्रोजेक्ट के लिए रिवाइज कोआर्डिनेशन कमेटी गठित की। 2022 राइट्स कंपनी ने कंप्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान का ड्राफ्ट सौंप दिया। 2023 यूटी ने पंजाब और हरियाणा सरकार को ड्राफ्ट पर कमेंट मांगे। 2023 -16 मार्च को यूटी प्रशासक की अध्यक्षता में पंजाब हरियाणा ने प्रस्ताव पर सैद्धांतिक मंजूरी दे दी।
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जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से यूएमटीए (यूनिफाइड मेट्रो ट्रांसपोर्टेशन अथॉरिटी) के गठन के बाद केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपी गई थी, जिसे केंद्र ने वापस करते हुए वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट और डीपीआर बनाने के लिए निर्देश प्रशासन को दिए। अब प्रशासन को मैट्रो के समानांतर शहर के लिए कंप्रीहेंसिव मोबिलिटी प्लान बनाना होगा, जिसके बाद ही इस प्रोजेक्ट का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा। बुधवार को हुई बैठक में राइट्स की टीम ने एमओएचयूए द्वारा जारी मेट्रो रेल नीति के अनुरूप एमआरटीएस (मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सीस्टम) की योजना के लिए नीतियां, दिशानिर्देश और प्रक्रिया की विस्तृत प्रस्तुति दी। चर्चा के बाद यह महसूस किया गया कि केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट (एएआर) और डीपीआर तैयार करने की आवश्यकता है, जिसे यूएमटीए/राज्य सरकार की मंजूरी के बाद भारत सरकार को अंतिम स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। बैठक में सचिव परिवहन नितिन कुमार यादव, वित्त सचिव विजय नामदेव जड़े और एसएसपी (ट्रैफिक) मनीषा चौधरी ने भाग लिया।
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जल्द बुलाई जाएगी यूएमटीए की बैठक
बैठक में निर्णय लिया गया कि एएआर और डीपीआर तैयार करने के लिए एजेंसी की नियुक्ति के लिए यूनिफाइड मेट्रो ट्रांसपोर्टेशन अथॉरिटी (यूएमटीए) की बैठक जल्द से जल्द बुलाई जाएगी। इस पूरी परियोजना को सिरे चढ़ाने के लिए सात से आठ माह का समय लग सकता है।
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-डॉ. धर्मपाल, सलाहकार, प्रशासक चंडीगढ़
राइट्स ने प्रशासन को सुझाए थे ये विकल्प
हाउसिंग बोर्ड लाइट प्वाइंट के लिए सुझाव -1
कलाग्राम से मनीमाजरा कार पार्किंग तक 1.70 किलोमीटर का फ्लाईओवर बनाया जाए ताकि पिंजौर की तरफ जाने वाले ट्रैफिक को लाइटों पर रुकना न पड़े। लाल बत्तियों को हटाकर वहां 26 मीटर के रेडियस का एक चौक बनाया जाए। कलाग्राम की तरफ रेलवे काॅलोनी के पास की लाल बत्तियों को भी हटाकर 16 मीटर के रेडियस के टियर ड्रॉप जैसा चौक बनाया जाना चाहिए। सभी रास्तों पर टेबल टॉप और साढ़े तीन मीटर का एक रास्ता हो, जिसमें दो मीटर का फुटपाथ और डेढ़ मीटर का साइकिल ट्रैक हो। इसके अलावा मनीमाजरा के दशहरा-मेला ग्राउंड के पास एक वन वे लिंक रोड बनाने का भी सुझाव है।
हाउसिंग बोर्ड लाइट प्वाइंट के लिए सुझाव -2
हाउसिंग बोर्ड की लाल बत्तियों को हटाकर 26 मीटर के रेडियस का एक चौक बनाया जाए। इसके आगे चंडीगढ़ की तरफ जाकर रेलवे कालोनी के पास की लाल बत्तियों को भी हटाकर 16 मीटर के रेडियस के टियर ड्रॉप जैसा चौक बनाया जाना चाहिए। तीन लेन का एक राइट टर्न अंडरपास बनाया जाए जो चंडीगढ़ से मौलीजागरां और पंचकूला की तरफ जाने वाले ट्रैफिक के लिए हो। चंडीगढ़-पंचकूला रोड पर बस स्टॉप के लिए अलग जगह बनाई जाए। सभी रास्तों पर टेबल टॉप बनाए जाए। एक कंबाइन साढ़े तीन मीटर का रास्ता हो, जिसमें दो मीटर का फुटपाथ और डेढ़ मीटर का साइकिल ट्रैक हो।
प्रेस लाइट प्वाइंट के लिए सुझाव
लाइटों को हटाकर 50 मीटर के रेडियस का एक चौक बनाया जा सकता है। चौक के नीचे से गुजरता हुआ सेक्टर-18/8 और सेक्टर-17/9 की सड़कों के बीच चार लेन का एक अंडरपास बनाया जाए, ताकि मटका चौक की तरफ आने और जाने वाले ट्रैफिक को लालबत्तियों पर न रुकना पड़े। राइट्स की रिपोर्ट के अनुसार ज्यादा लालबत्तियों की वजह से अलग अलग जाम लगते हैं। चौक के पास चारों रास्तों पर टेबल टॉप बनाए जाएं, जिससे पैदल चलने और साइकिल सवारों के लिए आसानी हो।
मेट्रो प्रोजेक्ट का अब तक का सफर
2008 मिनिस्ट्री आफ अर्बन डेवलेपमेंट की ओर से चंडीगढ़ के लिए मेट्रो को अप्रूवल दी गई। 2009 राइट्स ने सीएमपी प्लान यूटी प्रशासन के पास जमा कर दिया। 2010 यूटी प्रशासन ने प्रोजेक्ट डीएमआरसी को सौंप दिया। 2017 मेट्रो को ट्राईसिटी के लिए कैंसिल कर दिया गया। 2019 में यूटी ने फिर से प्रोजेक्ट के लिए रिवाइज कोआर्डिनेशन कमेटी गठित की। 2022 राइट्स कंपनी ने कंप्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान का ड्राफ्ट सौंप दिया। 2023 यूटी ने पंजाब और हरियाणा सरकार को ड्राफ्ट पर कमेंट मांगे। 2023 -16 मार्च को यूटी प्रशासक की अध्यक्षता में पंजाब हरियाणा ने प्रस्ताव पर सैद्धांतिक मंजूरी दे दी।