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पंजाब में किसानों की आत्महत्या के बाद मुआवजे पर हाईकोर्ट ने की तीखी टिप्पणी

Fri, 11 Nov 2016 08:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 11 Nov 2016 08:55 PM IST
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After the suicide of farmers in Punjab High Court's remarks on compensation
चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo

पंजाब में किसानों की आत्महत्या के बाद उनके परिवार को मुआवजा देने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा करना अपराध करने वालों के परिजनों को इंसेंटिव देने जैसा है।

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हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कदम उठाने ही हैं तो इसलिए उठाओ कि किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर न होना पड़े। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद मामले में याचिका दाखिल करने वाले वकील एचसी अरोड़ा ने मुआवजे की स्कीम को बेहतर बनाने वाली याचिका वापस ले ली।
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साथ ही यह छूट भी ली कि वे किसानों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर न होना पड़े, इसके लिए ठोस नीति बनाने को निर्देशों के लिए जनहित याचिका दाखिल करेंगे। मामले में याचिका दाखिल करते हुए पंजाब में किसानों की आत्महत्या पर मुआवजा देने की पालिसी को स्ट्रीम लाइन करने की मांग की गई थी।

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'आत्महत्या पर मुआवजा, इंसेंटिव देने जैसा'

After the suicide of farmers in Punjab High Court's remarks on compensation
कोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

याची ने कहा था कि कर्ज के बोझ से दबे किसान की आत्महत्या करने के बाद उनके परिवार के सदस्यों को मुआवजा देने के लिए डीसी की अध्यक्षता वाली कमेटी गठित है। इस कमेटी द्वारा मुआवजे से इनकार करने की स्थिति में अपील के लिए कोई अथॉरिटी बनाई जानी चाहिए ताकि ऐसे किसानों के परिवार किसी के मोहताज न रहे। 

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता का पक्ष सुनने के बाद कहा कि इस तरह की पॉलिसी आत्महत्या करने वालों को हीरो बनाने वाली है। यह तो किसानों को आत्महत्या के लिए प्रोत्साहित करने वाली है। कानून के मुताबिक आत्महत्या का प्रयास करना भी अपराध है। 

एक तरफ जहां आत्महत्या का प्रयास करना अपराध है, वहीं यह पालिसी इसमें बढ़ावा करने वाली है। वकील एचसी अरोड़ा ने इस पर कोर्ट में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में कहा कि भले ही आज यह अपराध की श्रेणी में है, लेकिन एक समय आएगा, जब पार्लियामेंट इसे खारिज करेगी। 

परेशान लोग ही आत्महत्या का प्रयास करते हैं। ऐसे में उन्हें सजा की जगह मदद करने की जरूरत है। इस पर सुनवाई होनी चाहिए। कोर्ट की इन टिप्पणियों के बाद वकील एचसी अरोड़ा ने अपनी याचिका वापस ले ली और नए सिरे से याचिका दाखिल करने की छूट भी। अरोड़ा ने कहा कि वे अब किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने के निर्देश जारी करने के लिए याचिका दाखिल करेंगे।

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