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पंजाब में प्रचंड जीत के बाद अब आम आदमी पार्टी पीयू में तैयार करेगी छात्र राजनीति की नई पौध
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चंडीगढ़। पंजाब में प्रचंड जीत के बाद आम आदमी पार्टी (आप) पीयू में छात्र राजनीति की नई पौध तैयार करेगी। इसके लिए जल्द ही सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। साथ ही पार्टी को मजबूत करने के लिए पीयू छात्रों के प्रमुख मुद्दों को लेकर संकल्प पत्र तैयार किया जाएगा। इसके आधार पर आगामी छात्र संघ चुनाव में भी आप का परचम लहराने की तैयारी है। अन्य पार्टियों की तरह आप का भी छात्र युवा संघर्ष समिति (सीवाईएसएस) संगठन है।
आप के पदाधिकारियों ने बताया कि एक माह में यूनिवर्सिटी में छात्र संगठन छात्र युवा संघर्ष समिति (सीवाईएसएस) की घोषणा की जाएगी। अभी पीयू में सीवाईएसएस के सौ से अधिक सदस्य हैं, जो कि पंजाब चुनाव में सक्रिय रहे हैं। पिछले दो साल में कोरोना महामारी के कारण पार्टी पीयू में छात्र संगठन को शुरू नहीं कर पाई। हालांकि इसकी तैयारी पहले भी एक दो बार की गई थी।
पंजाब चुनाव के बाद आप के हौसले बुलंद
पहली बार चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव लड़ने वाली आप ने 14 सीटें जीतकर सबको चौंकाया था, लेकिन पंजाब चुनाव ने आप के हौसले बुलंद कर दिए हैं। आप पदाधिकारियों का कहना है कि चंडीगढ़ के साथ ही पंजाब व हरियाणा में राजनीति की सीख पीयू से ही मिलती है। इसलिए यहां छात्र संगठन खड़ा करना जरूरी है। लगभग दो साल पहले ही इसकी तैयारियां शुरू हो गईं थीं, लेकिन कोरोना महामारी के कारण संगठन को खड़ा करने पर जोर नहीं दिया जा सका। हाल ही में कई छात्र नेता बड़ी पार्टियों का दामन छोड़कर आप में शामिल हुए हैं। ये नेता अब पीयू में आप का संगठन खड़ा कर आगामी छात्रसंघ चुनाव में परचम लहराने के लिए काम करेंगे।
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पंजाब में सत्ता पर आसीन पार्टी पीयू की राजनीति को करती है प्रभावित
हाल ही में मालविंदर सिंह कंग ने आप का दामन थामा है। कंग पीयू छात्र संघ (पुसु) से वर्ष 2002 और 2003 में दो बार अध्यक्ष रहे हैं। वहीं आप में शामिल हुए परमिंदर सिंह गोल्डी वर्ष 2007 में पुसु से ही छात्र संगठन अध्यक्ष का पीयू में चुनाव जीते थे। दोनों नेताओं ने पंजाब चुनाव में भी पार्टी के लिए काफी काम किया है। छात्र नेताओं की मानें तो पंजाब चुनाव में आप की जीत का असर पीयू की पुरानी पार्टियों पर पड़ेगा, क्योंकि जो पार्टी पंजाब में सत्ता में रही है, पीयू में उस पार्टी का विद्यार्थी संगठन मजबूत रहा है। छात्र नेताओं की मानें तो आप की एंट्री के बाद पीयू में एनएसयूआई (कांग्रेस) और सोई (अकाली दल) के सामने अपना वोट बैंक बचाने की चुनौती होगी।
क्या कहते हैं छात्र नेता
चार राज्यों में जीते, पीयू में भी मजबूती से आएंगे
भाजपा की ओर से चार राज्यों में जीत दर्ज की गई है। इससे छात्र संगठन का भी हौसला बढ़ा है। अब आगामी पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र चुनावों में भी हम मजबूती से आएंगे। कांग्रेस की हार का फर्क एनएसयूआई को पड़ेगा, क्योंकि कांग्रेस खत्म हो गई है। जनता ने भाजपा की विचारधारा को अपनाया है। -कुलदीप, छात्र नेता, एबीवीपी पीयू
आप की विचारधारा नहीं, इसलिए प्रभाव नहीं पड़ेगा
पीयू में पढ़े लिखे युवा हैं, इसलिए विचारधारा से अधिक विद्यार्थी जुड़ते हैं। आप की कोई विचारधारा नहीं है, इसलिए कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। अभी आप को छात्र पार्टी तैयार करने में भी चार-पांच माह का समय लग जाएगा, तब तक पंजाब में विद्यार्थियों को आप के कार्यकाल का पता चल जाएगा। हम हमेशा विद्यार्थियों और समाज के लोगों के मुद्दों को उठाते रहे हैं, विद्यार्थियों को इससे फर्क पड़ता है। - संदीप, अध्यक्ष, पीयू एसएफएस
छात्र राजनीति और मुख्यधारा में फर्क
यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति और मुख्यधारा की राजनीति में फर्क है। हालांकि मनोबल पर फर्क पड़ेगा। लेकिन पीयू में हम विद्यार्थियों में एक्टिव रहे हैं और उनकी हर समस्या को मजबूती से उठाया है और हल करवाया है। अभी छात्र चुनाव में समय है, तब तक आप का असली चेहरा पंजाब में सामने आ जाएगा। - राहुल, पूर्व उपाध्यक्ष, छात्र संघ (एनएसयूआई)
पीयू में जल्द करेंगे छात्र संगठन मजबूत
पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्र संघ का चुनाव पुसु से जीता था। यहां विद्यार्थियों के मुद्दों पर चुनाव का परिणाम अधिक निर्भर करता है। पीयू चुनावों का हिस्सा रहे हैं, इसलिए यहां की राजनीति समझते हैं। अब पंजाब के बाद पीयू में आप के छात्र संगठन को मजबूत करेंगे। यह पहले ही करना था, लेकिन कोरोना के कारण पीयू बंद रही। पिछले दो साल में छात्रों से ज्यादा संपर्क नहीं बन पाया। पीयू से कई वॉलंटियर्स ने पंजाब चुनाव में साथ दिया है, पार्टी के निर्देश पर जल्द छात्र संगठन भी लांच करेंगे। - परमिंदर गोल्डी, पूर्व अध्यक्ष, पीयू छात्र संघ
सोई और एनएसयूआई का वोट टूटेगा
पंजाब में सत्ता का फर्क वहां की पुरानी पार्टियों पर अधिक पड़ता है। इसलिए कांग्रेस और अकाली दल की हार का फर्क एनएसयूआई और सोई को पड़ेगा। इनका वोट टूटकर ही आप को गया है और यही यूनिवर्सिटी चुनाव में फर्क पड़ेगा। इसके अलावा आप छात्र संगठन के मैनिफैस्टो पर अधिक बातें निर्भर करती हैं, वो किस तरह विद्यार्थियों के मुद्दों को उठाएंगे। - रजत नैन, छात्र नेता, इनसो
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आप के पदाधिकारियों ने बताया कि एक माह में यूनिवर्सिटी में छात्र संगठन छात्र युवा संघर्ष समिति (सीवाईएसएस) की घोषणा की जाएगी। अभी पीयू में सीवाईएसएस के सौ से अधिक सदस्य हैं, जो कि पंजाब चुनाव में सक्रिय रहे हैं। पिछले दो साल में कोरोना महामारी के कारण पार्टी पीयू में छात्र संगठन को शुरू नहीं कर पाई। हालांकि इसकी तैयारी पहले भी एक दो बार की गई थी।
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पंजाब चुनाव के बाद आप के हौसले बुलंद
पहली बार चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव लड़ने वाली आप ने 14 सीटें जीतकर सबको चौंकाया था, लेकिन पंजाब चुनाव ने आप के हौसले बुलंद कर दिए हैं। आप पदाधिकारियों का कहना है कि चंडीगढ़ के साथ ही पंजाब व हरियाणा में राजनीति की सीख पीयू से ही मिलती है। इसलिए यहां छात्र संगठन खड़ा करना जरूरी है। लगभग दो साल पहले ही इसकी तैयारियां शुरू हो गईं थीं, लेकिन कोरोना महामारी के कारण संगठन को खड़ा करने पर जोर नहीं दिया जा सका। हाल ही में कई छात्र नेता बड़ी पार्टियों का दामन छोड़कर आप में शामिल हुए हैं। ये नेता अब पीयू में आप का संगठन खड़ा कर आगामी छात्रसंघ चुनाव में परचम लहराने के लिए काम करेंगे।
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पंजाब में सत्ता पर आसीन पार्टी पीयू की राजनीति को करती है प्रभावित
हाल ही में मालविंदर सिंह कंग ने आप का दामन थामा है। कंग पीयू छात्र संघ (पुसु) से वर्ष 2002 और 2003 में दो बार अध्यक्ष रहे हैं। वहीं आप में शामिल हुए परमिंदर सिंह गोल्डी वर्ष 2007 में पुसु से ही छात्र संगठन अध्यक्ष का पीयू में चुनाव जीते थे। दोनों नेताओं ने पंजाब चुनाव में भी पार्टी के लिए काफी काम किया है। छात्र नेताओं की मानें तो पंजाब चुनाव में आप की जीत का असर पीयू की पुरानी पार्टियों पर पड़ेगा, क्योंकि जो पार्टी पंजाब में सत्ता में रही है, पीयू में उस पार्टी का विद्यार्थी संगठन मजबूत रहा है। छात्र नेताओं की मानें तो आप की एंट्री के बाद पीयू में एनएसयूआई (कांग्रेस) और सोई (अकाली दल) के सामने अपना वोट बैंक बचाने की चुनौती होगी।
क्या कहते हैं छात्र नेता
चार राज्यों में जीते, पीयू में भी मजबूती से आएंगे
भाजपा की ओर से चार राज्यों में जीत दर्ज की गई है। इससे छात्र संगठन का भी हौसला बढ़ा है। अब आगामी पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र चुनावों में भी हम मजबूती से आएंगे। कांग्रेस की हार का फर्क एनएसयूआई को पड़ेगा, क्योंकि कांग्रेस खत्म हो गई है। जनता ने भाजपा की विचारधारा को अपनाया है। -कुलदीप, छात्र नेता, एबीवीपी पीयू
आप की विचारधारा नहीं, इसलिए प्रभाव नहीं पड़ेगा
पीयू में पढ़े लिखे युवा हैं, इसलिए विचारधारा से अधिक विद्यार्थी जुड़ते हैं। आप की कोई विचारधारा नहीं है, इसलिए कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। अभी आप को छात्र पार्टी तैयार करने में भी चार-पांच माह का समय लग जाएगा, तब तक पंजाब में विद्यार्थियों को आप के कार्यकाल का पता चल जाएगा। हम हमेशा विद्यार्थियों और समाज के लोगों के मुद्दों को उठाते रहे हैं, विद्यार्थियों को इससे फर्क पड़ता है। - संदीप, अध्यक्ष, पीयू एसएफएस
छात्र राजनीति और मुख्यधारा में फर्क
यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति और मुख्यधारा की राजनीति में फर्क है। हालांकि मनोबल पर फर्क पड़ेगा। लेकिन पीयू में हम विद्यार्थियों में एक्टिव रहे हैं और उनकी हर समस्या को मजबूती से उठाया है और हल करवाया है। अभी छात्र चुनाव में समय है, तब तक आप का असली चेहरा पंजाब में सामने आ जाएगा। - राहुल, पूर्व उपाध्यक्ष, छात्र संघ (एनएसयूआई)
पीयू में जल्द करेंगे छात्र संगठन मजबूत
पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्र संघ का चुनाव पुसु से जीता था। यहां विद्यार्थियों के मुद्दों पर चुनाव का परिणाम अधिक निर्भर करता है। पीयू चुनावों का हिस्सा रहे हैं, इसलिए यहां की राजनीति समझते हैं। अब पंजाब के बाद पीयू में आप के छात्र संगठन को मजबूत करेंगे। यह पहले ही करना था, लेकिन कोरोना के कारण पीयू बंद रही। पिछले दो साल में छात्रों से ज्यादा संपर्क नहीं बन पाया। पीयू से कई वॉलंटियर्स ने पंजाब चुनाव में साथ दिया है, पार्टी के निर्देश पर जल्द छात्र संगठन भी लांच करेंगे। - परमिंदर गोल्डी, पूर्व अध्यक्ष, पीयू छात्र संघ
सोई और एनएसयूआई का वोट टूटेगा
पंजाब में सत्ता का फर्क वहां की पुरानी पार्टियों पर अधिक पड़ता है। इसलिए कांग्रेस और अकाली दल की हार का फर्क एनएसयूआई और सोई को पड़ेगा। इनका वोट टूटकर ही आप को गया है और यही यूनिवर्सिटी चुनाव में फर्क पड़ेगा। इसके अलावा आप छात्र संगठन के मैनिफैस्टो पर अधिक बातें निर्भर करती हैं, वो किस तरह विद्यार्थियों के मुद्दों को उठाएंगे। - रजत नैन, छात्र नेता, इनसो