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ग्राउंड जीरो: संघर्षविराम के बाद लोगों ने कहा- उन्होंने बारूद भरने की कोशिश की, हम उस गंध को मिठास में बदलेंगे

Mon, 12 May 2025 04:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, फगवाड़ा/फिरोजपुर/गुरदासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, फगवाड़ा/फिरोजपुर/गुरदासपुर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 12 May 2025 04:58 AM IST
सार

जो दंश पाकिस्तान की ओर से पंजाब के गांव को दिए गए, उसकी कसक ताउम्र रहेगी। यह कसक होगी, उस गांव में गिरी मिसाइल की...जिसने उनके खेतों में जहरीली बारूद बो दी।

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After the ceasefire, people said- they tried to fill gunpowder, we will turn that smell into sweetness
पाकिस्तान के हमले में गांव खाईफेमिकी में मोनू सिंह के घर के बाहर खड़ी कार बर्बाद हो गई। घर को भी नुकसान हुआ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संघर्षविराम के करीब 14 घंटे गुजर चुके थे। अगली सुबह रविवार की थी। लेकिन, जो दंश पाकिस्तान की ओर से पंजाब के गांव को दिए गए, उसकी कसक ताउम्र रहेगी। यह कसक होगी, उस गांव में गिरी मिसाइल की...जिसने उनके खेतों में जहरीली बारूद बो दी। रविवार दोपहर करीब 12 बजे फगवाड़ा के गांव साहनी में काफी हलचल दिखी।
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लोगों का हुजूम किसान मेजर सिंह के खेत में जमा था। यह वही गांव है, जहां पाकिस्तान ने मिसाइल से हमला किया था और मेजर सिंह के खेत में 10 फीट का गड्ढा पड़ गया था। अब हालात सामान्य हो रहे हैं, क्योंकि सीजफायर के बाद कोई हमला नहीं हुआ है। 
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ग्राम पंचायत सदस्य एवं किसान मेजर सिंह कहते हैं...मिसाइल गिरने के बाद धमाके से पूरा गांव दहल गया था। हमले के बाद दहशत थी, लेकिन अब सब ठीक है। जिस खेत में गड्ढा हुआ है, वहां अब फिर से खेत को ठीक कर गन्ना लगाऊंगा। 
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वह कहते हैं...पाकिस्तान ने तो उनके खेतों मे जहरीली बारूद बोने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन, हम गन्ने की फसल बोकर बारूद की गंध को मिठास में बदल देंगे। आसपास के किसान भी धान और बाकी फसलें बीजने की तैयारी कर रहे हैं। मेजर सिंह बताते हैं कि मिसाइल के मुख्य हिस्सों को सेना के जवान उठा कर ले गए। जो कुछ छोटे-मोटे टुकड़े पड़े थे, उन्हें लोग उठा कर ले गए। 

गांव के अन्य लोगों हरमेशपाल, बलराज बाऊ, सरपंच सतविंदर सिंह, चमन लाल, सत्या देवी, राम पाल, मोंटी, मनी और सन्नी सिंह ने बताया कि गांव में काफी दहशत का माहौल था। डर के बावजूद संकट की इस घड़ी में पूरा गांव भारतीय सेना के साथ खड़ा है। इंप्रूवमेंट ट्रस्ट फगवाड़ा के चेयरमैन जरनैल नंगल और जिला योजना बोर्ड कपूरथला की चेयरपर्सन ललित सकलानी ने कहा, लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्हें कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
-अनिल गोयल, फगवाड़ा के गांव साहनी से 

 

घर बर्बाद, कार जली, तीन झुलसे...नई जिंदगी शुरू करने की तैयारी 

व्हीलचेयर पर बैठे मोनू सिंह की आवाज शुक्रवार रात पाकिस्तानी हमले की दास्तां सुनाते-सुनाते कांपने लगती है, लेकिन अगले ही पल वह पूरे जोश के साथ कहते हैं...इनको (पाकिस्तान) सबक सिखाने का मौका मिला तो सेना के साथ खड़े होने से पीछे नहीं हटेंगे। 

मोनू सिंह कहते हैं, अब नई जिंदगी शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। खेती का काफी काम बाकी है। ठीक होते ही खेत में जुट जाएंगे। धान की रोपाई करनी है। फिरोजपुर-फाजिल्का मार्ग पर सीमावर्ती गांव खाईफेमिकी में 9 मई की रात को ड्रोन हमले में उनके घर का आधा हिस्सा बर्बाद हो गया। कार जल गई और मोनू सिंह समेत उनके परिवार के तीन लोग झुलस गए। लेकिन, वह अब भी दुश्मन से टकराने को तैयार हैं। उनकी माता सुखविंदर कौर और पिता लखविंदर सिंह का भी इलाज चल रहा है। मोनू सिंह कहते हैं, उम्मीद है कि पाकिस्तान संघर्षविराम का पालना करेगा।

खौफ के मारे जागकर काटीं रातें, बाजार खुले 
खाईफेमिकी गांव के लोगों ने दो रातें जाग कर ही काटी हैं। ड्रोन की आवाज से गांव सहम उठता था। अवतार सिंह, उपल कुमार, संदीप कुमार, सोनी बजाज और सैनी ने कहा, हम अपने बच्चों एवं परिवार की महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर भेज रहे थे। हर ओर दहशत का माहौल था। लेकिन, भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर के बाद राहत की सांस ली है। अब खाईफेमिकी के बाजार पूरी तरह खुले गए हैं। लोग आम दिनों की तरह खेतों में काम कर रहे हैं। जो लोग गांव छोड़कर चले गए थे, वे भी अब लौटने लगे हैं। 

  • खाईफेमिकी के बलजीत सिंह, जोगिंदर सिंह और जसविंदर कौर ने बताया, वे दहशत के मारे पास के गांव में अपने रिश्तेदार के यहां चले गए थे। लेकिन, सीजफायर की घोषणा के बाद वापस अपने गांव लौट आए हैं, क्योंकि खेती का सारा काम बाकी है। खेत तैयार करना है। उम्मीद है कि अब शांति रहेगी और उन्हें दोबारा गांव नहीं छोड़ना पड़ेगा।

-जोगिंदर सिंह भोला, खाईफेमिकी गांव, फिरोजपुर

धमाकों से घरों की छतें-दीवारें दरकीं पर लोगों के हौसले अब भी बुलंद

शुक्रवार की रात को धमाकों से दहले गुरदासपुर के गांव राजू बेला में रविवार की सुबह आम दिनों की तरह ही हुई। न सायरन की आवाज, न धमाकों की गूंज। सब कुछ सामान्य। घर की दीवारें और छतें भले ही धमाकों से दरक गईं हों, लेकिन लोगों का हौसला कायम है। सीजफायर की घोषणा के बाद गांव के लोगों के चेहरे पर सुकून साफ देखा जा सकता है।

गांव राजू बेला के भगवंत सिंह कहते हैं...जंग किसी समस्या का समाधान नहीं होती, लेकिन पाकिस्तान जैसे मुल्क को सबक सिखाना भी जरूरी है। अगर पाकिस्तान फिर कोई नापाक हरकत करता है, तो हम सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होंगे। हमने प्रशासन से मांग की है कि खेतों में जो बड़ा गड्ढा बना है, उसे जल्द भरा जाए, ताकि किसानों को दोबारा खेती करने में दिक्कत न हो। खेतों में पानी लगाने की अनुमति भी दी जाए।
-मनन सैनी, गांव राजू बेला, गुरदासपुर  से 

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