हरियाणा: अशोक गहलोत और कमलनाथ के बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा बन सकते हैं कांग्रेस का चेहरा
तीन राज्यों में जीत हासिल करने से उत्साहित कांग्रेस अब हरियाणा की राजनीति का रुख करेगी। मध्यप्रदेश में कमलनाथ और राजस्थान में अशोक गहलोत को चेहरा बनाने के बाद अब हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थकों का उत्साह दोगुना हो चुका है।
जिसका कारण यह है कि कमलनाथ, गहलोत और हुड्डा कांग्र्रेस में एक ही श्रेणी के नेता हैं। राजस्थान और मध्यप्रदेश में स्थिति साफ होने के बाद हुड्डा समर्थकों ने सूबे में कांग्रेस का चेहरा हुड्डा को बताने के लिए आलाकमान पर दबाव डालना तेज कर दिया है।
उधर, हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष डा. अशोक तंवर भी कहीं से पीछे नहीं है। राहुल के करीबी होने का फायदा उठाते हुए उन्होंने भी ताल ठोक दी है। उनके समर्थकों ने भी आलाकमान पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। अब लोकसभा चुनाव से पहले चेहरा कौन होगा। हरियाणा में कांग्रेस की राजनीतिक दशा और दिशा उसी से तय होगी।
सूत्रों के मुताबिक भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने स्वयं ही आगे बढ़ते हुए आलाकमान को यह भरोसा दिलाया है कि वे हरियाणा की दस लोकसभा सीटें जीत कर देने का दम रखते हैं। आलाकमान ने उनके दावे को देखते हुए उन्हें हरियाणा में हो रहे मेयर चुनाव पर फोकस करने को कहा है। जिसके बाद हुड्डा ने मेयर की पांचों सीटें कांग्रेस की झोली में डालने का वादा किया है।
बातचीत के तुरंत बाद हुड्डा रोहतक के लिए निकल गए हैं। 19 दिसंबर को उनका चंडीगढ़ दौरा है। जिसके बाद वे सभी पार्टी पदाधिकारियों से राय मशवरा करेंगे। लोकसभा चुनाव की रणनीति बनाने के साथ ही विधानसभा चुनाव को लेकर भी कांग्रेस में कार्रवाई तेज हो जाएगी।
अब प्रभारी के लिए गठजोड़ शुरू
कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही हरियाणा में प्रभारी के लिए लाबिंग तेज हो गई है। कांग्रेस प्रभारी के लिए कुछ नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन हुड्डा, तंवर, किरण चौधरी और रणदीप सुरजेवाला इस फिराक में हैं कि उनके करीबी को प्रभारी का मौका मिल जाए। वर्तमान में तीन राज्यों में प्रभारियों का रुतबा देखने लायक रहा है। टिकट वितरण से लेकर सरकार गठन तक में प्रभारियों को खासी तरजीह दी गई है।
कैप्टन पहले ही रोक चुके हैं मोदी के अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा
देश में कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देख रही भाजपा के अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा सबसे पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब में रोका। यहां अपनी शर्तों पर कांग्रेस की सरकार खड़ी कर उन्होंने साफ किया है कि राज्यों में चेहरा अहम होता है। यही नहीं पंजाब में मंत्रिमंडल विस्तार में भी कैप्टन ने अपनी चलाई। हरियाणा में ऊंट किस करवट बैठेगा यह स्थिति मेयर चुनाव के बाद साफ हो जाएगी।
ज्योतिरादित्य और सचिन पायलट करीबी होने के बावजूद नहीं बने चेहरा
कांग्रेस में ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट राहुल गांधी के करीबी होने के बावजूद राजस्थान और मध्यप्रदेश में चेहरा नहीं बन सके। सारे समीकरण और भविष्य में होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए आलाकमान ने दोनों राज्यों में पुराने चेहरों पर ही भरोसा जताया है। ऐसे में हरियाणा को लेकर आलाकमान दबाव में आते हैं या नहीं यह देखने का विषय होगा।