{"_id":"612feb1f8ebc3e7a02576d18","slug":"after-four-years-engineering-department-will-tender-to-build-209-bus-queue-shelters-chandigarh-news-pkl425378815","type":"story","status":"publish","title_hn":"चार साल बाद 209 बस क्यू शेल्टर बनाने के लिए टेंडर करेगा इंजीनियरिंग विभाग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चार साल बाद 209 बस क्यू शेल्टर बनाने के लिए टेंडर करेगा इंजीनियरिंग विभाग
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। यूटी प्रशासन के अधिकारी शहर के सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले चार साल से टूटे बस शेल्टर अभी तक नहीं बने हैं। प्रशासक केसलाहकार धर्मपाल ने 11 अगस्त को बस शेल्टर के लिए जल्द टेंडर करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभी भी लोगों को बस शेल्टर के लिए कम से कम एक साल तक का इंतजार करना पड़ेगा।
शहर के पार्षदों के साथ हुई प्रशासन के अधिकारियों की बैठक में सबसे ज्यादा बार बस क्यू शेल्टर का मुद्दा उठा था। मेयर रविकांत शर्मा ने यहां तक कह दिया था कि अगर प्रशासन बस क्यू शेल्टर नहीं बना पा रहा है तो वह बता दे। नगर निगम इन्हें बना देगा। हालांकि, इस मामले पर वित्त सचिव ने कहा था कि पहले निर्माण कार्य और विज्ञापन लगाने का कार्य एक ही कंपनी को दिया जाना था, जिसकी वजह से कोई कंपनी इच्छुक नहीं थी। उन्होंने आदेश दे दिए हैं कि इंजीनियरिंग विभाग ही शेल्टर का निर्माण करेगा। इस मामले पर चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने बताया कि इंजीनियरिंग विभाग 209 बस क्यू शेल्टर का निर्माण करेगा और करीब 200 बस क्यू शेल्टर की मरम्मत करेगा। इस पर 12 से 14 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। एक महीने के अंदर इसे लेकर टेंडर जारी कर दिया जाएगा और 9 महीने से एक साल के अंदर काम पूरा कर लिया जाएगा। दरअसल, वर्ष 2017 में शहर में अत्याधुनिक बस क्यू शेल्टर बनाने की कवायद हुई थी, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रशासन बसों को स्मार्ट बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन जब बस शेल्टर ही नहीं होंगे तो बसों को स्मार्ट बनाने से क्या फायदा होगा। बस क्यू शेल्टर नहीं होने से यात्रियों को सिर ढकने तक की जगह नहीं मिल रही। बस या ऑटो का इंतजार करने के लिए खुले में ही खड़े होना पड़ता है। बारिश और गर्मियों में सबसे अधिक दिक्कत आती है।
विज्ञापन
शहर के पार्षदों के साथ हुई प्रशासन के अधिकारियों की बैठक में सबसे ज्यादा बार बस क्यू शेल्टर का मुद्दा उठा था। मेयर रविकांत शर्मा ने यहां तक कह दिया था कि अगर प्रशासन बस क्यू शेल्टर नहीं बना पा रहा है तो वह बता दे। नगर निगम इन्हें बना देगा। हालांकि, इस मामले पर वित्त सचिव ने कहा था कि पहले निर्माण कार्य और विज्ञापन लगाने का कार्य एक ही कंपनी को दिया जाना था, जिसकी वजह से कोई कंपनी इच्छुक नहीं थी। उन्होंने आदेश दे दिए हैं कि इंजीनियरिंग विभाग ही शेल्टर का निर्माण करेगा। इस मामले पर चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने बताया कि इंजीनियरिंग विभाग 209 बस क्यू शेल्टर का निर्माण करेगा और करीब 200 बस क्यू शेल्टर की मरम्मत करेगा। इस पर 12 से 14 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। एक महीने के अंदर इसे लेकर टेंडर जारी कर दिया जाएगा और 9 महीने से एक साल के अंदर काम पूरा कर लिया जाएगा। दरअसल, वर्ष 2017 में शहर में अत्याधुनिक बस क्यू शेल्टर बनाने की कवायद हुई थी, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रशासन बसों को स्मार्ट बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन जब बस शेल्टर ही नहीं होंगे तो बसों को स्मार्ट बनाने से क्या फायदा होगा। बस क्यू शेल्टर नहीं होने से यात्रियों को सिर ढकने तक की जगह नहीं मिल रही। बस या ऑटो का इंतजार करने के लिए खुले में ही खड़े होना पड़ता है। बारिश और गर्मियों में सबसे अधिक दिक्कत आती है।
विज्ञापन