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डेंगू के बाद अब यहां स्वाइन फ्लू की दहशत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 03 Oct 2015 01:41 PM IST
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डेंगू आउटब्रेक के बाद स्वाइन फ्लू का अलर्ट आ गया है। फ्लू का खतरा देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने चंडीगढ़ सहित उत्तर भारत के सभी राज्यों को फ्लू से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रात का तापमान लगातार गिर रहा है।
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तापमान गिरने पर स्वाइन फ्लू का वायरस पनप सकता है। इसका वायरस बहुत तेज से म्यूटेड होता है। इसलिए इस साल भी स्वाइन फ्लू का खतरा रहेगा। पीजीआई चंडीगढ़ की वायरोलाजी लैब में स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण वाले मामले पंजाब से काफी आ रहे हैं।
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हालांकि अब तक किसी मरीज की रिपोर्ट पॉजीटिव नहीं आई है। मलेरिया के असिस्टेंट डायरेक्टर डा. अनिल गर्ग ने बताया कि अलर्ट का मतलब यह है कि विभाग को तैयार रहना चाहिए। जांच के लिए किट मंगवाई जाएगी। घबराने वाली कोई बात नहीं है।
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स्वाइन फ्लू का खतरा उन लोगों पर सबसे ज्यादा रहता है, जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। सीनियर सिटीजन, डायबिटीज पीड़ित, गुर्दे के मरीज, कैंसर रोगी, प्रेग्नेंट महिलाओं और बच्चों का खतरा रहता है। बुखार या जुकाम होने पर बाहर निकलने के बजाए घर पर आराम करें।
कई राज्यों से आ रहे हैं पीजीआई में मामले
स्वाइन फ्लू के गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान व तेलगांना में पाजीटिव केस रिपोर्ट हो रहे हैं। तेलगांना में कुछ मौतें भी हुई हैं। पंजाब व हरियाणा से संदिग्ध केस आ रहे हैं। अक्तूबर की सामाप्ति पर इसका सीजन शुरू हो जाता है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान यदि स्वाइन फ्लू की वैक्सीन लगवाई तो काफी फायदेमंद साबित होती है। हालांकि यह 70 प्रतिशत तक ही कारगर साबित होती है।
ये बरतें सावधानियां
सामान्य इनफ्लुएंजा की तरह इसमें सावधानियां भी बरतनी चाहिए। इसके लिए जब भी बाहर से आएं तो हाथों को साबुन से धोएं। छींकने के दौरान रुमाल या बांह का इस्तेमाल करें। तेज बुखार होने पर स्पेशलिस्ट डाक्टर को दिखाएं। खुद से कोई दवा न लें। फ्लू से बचने का एक अच्छा तरीका यह है कि पौष्टिक आहार लेते रहें।
ये हैं लक्षण
बुखार, तेज ठंड लगना, गला खराब हो जाना, मांसपेशियों में दर्द होना, तेज सिरदर्द होना, खाँसी आना, कमजोरी महसूस मुख्य लक्षण होते हैं।