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Chandigarh News: बड़ी देर के बाद कहने का साहस आया कि कोई फिल्म नहीं है, घर पर बैठा हूं
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चंडीगढ़। बड़ी देर के बाद यह कहने का साहस हुआ कि कोई फिल्म के शूट पर नहीं जा रहा हूं, घर पर हूं। यह बात कही बॉलीवुड की फिल्मों में प्रसिद्ध खलनायक के रोल कर चुके आशीष विद्यार्थी ने। 11 भाषाओं में 300 फिल्में कर चुके कलाकार शनिवार को चित्तकारा लिटफेस्ट के तहत शहर में उपस्थित रहे। सेक्टर-25 स्थित चित्तकारा इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित फेस्ट में कलाकार ने युवाओं से अपने अभिनय, फूड ब्लॉगिंग और अब 31 मार्च को करने जा रहे पहले स्टैंड अप शो के बारे में बताया।
जीवन का एक वाक्य साझा करते हुए वह बोले कि पहले उन्हें कभी घर पर फोन आ जाता था और पूछते घर पर क्या कर रहे हो शूट कैंसल हो गया है तो वह हां कह देते थे। उनमें यह कहने की हिम्मत नहीं थी कि वह कोई फिल्म नहीं कर रहे और घर पर खाली बैठे हैं। ऐसा इसलिए ताकि कोई आप पर काम न मिलने की टिप्पणी न कर दे। युवाओं को प्रेरित करते हुए विद्यार्थी बोले वह 58 साल के हैं और अभी भी नई चीजें आजमा रहब्हैं। उनके पिता ने उन्हें नाम में ही विद्यार्थी शब्द दे दिया है। इसलिए नई चीजें सीखते रहें। सफलता कुछ नहीं सिवाय अपने कौशल को और बेहतर तरीके से करने के।
लोगों से मिलता हूं तो नई चीजें सीखता हूं
तीन दशक के अपने सिनेमा कॅरियर से चुनिंदा किस्सों को सुनाते विद्यार्थी ने बताया कि कैसे लोगों को मिलकर उनका नजरिया बदला और उन्हें जीवन के अलग रंग देखने को मिले। चाहे स्कॉटलैंड में रेस्टोरेंट में हुआ वाक्य हो या सोल्जर फिल्म की शूटिंग के दौरान बीकानेर में घटी घटना, हर जगह के लोगों से उन्हें कुछ नया सीखने को मिला। किताबें आप चुनकर पढ़ते हैं लेकिन आप लोगों को नहीं चुनते।
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जीवन का एक वाक्य साझा करते हुए वह बोले कि पहले उन्हें कभी घर पर फोन आ जाता था और पूछते घर पर क्या कर रहे हो शूट कैंसल हो गया है तो वह हां कह देते थे। उनमें यह कहने की हिम्मत नहीं थी कि वह कोई फिल्म नहीं कर रहे और घर पर खाली बैठे हैं। ऐसा इसलिए ताकि कोई आप पर काम न मिलने की टिप्पणी न कर दे। युवाओं को प्रेरित करते हुए विद्यार्थी बोले वह 58 साल के हैं और अभी भी नई चीजें आजमा रहब्हैं। उनके पिता ने उन्हें नाम में ही विद्यार्थी शब्द दे दिया है। इसलिए नई चीजें सीखते रहें। सफलता कुछ नहीं सिवाय अपने कौशल को और बेहतर तरीके से करने के।
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लोगों से मिलता हूं तो नई चीजें सीखता हूं
तीन दशक के अपने सिनेमा कॅरियर से चुनिंदा किस्सों को सुनाते विद्यार्थी ने बताया कि कैसे लोगों को मिलकर उनका नजरिया बदला और उन्हें जीवन के अलग रंग देखने को मिले। चाहे स्कॉटलैंड में रेस्टोरेंट में हुआ वाक्य हो या सोल्जर फिल्म की शूटिंग के दौरान बीकानेर में घटी घटना, हर जगह के लोगों से उन्हें कुछ नया सीखने को मिला। किताबें आप चुनकर पढ़ते हैं लेकिन आप लोगों को नहीं चुनते।
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