लंबी चुप्पी के बाद वोटर अब करेंगे हिसाब, जानिए कितना बड़ा है घमासान
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पंजाब विधानसभा चुनाव-2017 के लिए आखिरकार मतदान की घड़ी आ गई। शनिवार 4 फरवरी को सूबे की 117 विधानसभा सीटों पर मतदान के लिए चुनाव आयोग ने शुक्रवार शाम तक सभी तैयारियां पूरी कर चुनाव ड्यूटी पर लगाए गए अफसरों-कर्मचारियों को भी पोलिंग स्टेशनों के लिए रवाना कर दिया है।
पिछले साल फरवरी माह में आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब में दस्तक देते ही विधानसभा चुनाव-2017 के लिए चुनावी माहौल बनने लगा था। सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और भाजपा गठबंधन के अलावा कांग्रेस भी आप को जवाब देने के लिए काफी पहले चुनावी अखाड़े में कूद गए थे।
हर पार्टी ने जमकर प्रचार किया और सूबे के मतदाताओं को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन इस पूरी समयावधि में मतदाता खामोश रहे और हर सियासी कलाबाजी को गौर से आंकते रहे हैं।
शनिवार को प्रदेश के करीब दो करोड़ मतदाता अपनी खामोशी ईवीएम का बटन दबाकर तोड़ेंगे। इन मतदाताओं में छह लाख ऐसे युवा मतदाता भी होंगे, जो पहली बार मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
हालांकि, करीब साल भर तक चुनावी माहौल में रहे वोटरों की चुप्पी अब तक सियासी दलों और चुनाव विशेषज्ञों की सबसे बड़ी उलझन बनी रही है। सियासी दलों के लिए मतदाताओं के रुझान का सही अनुमान लगा पाना इसलिए भी कठिन रहा, क्योंकि पहली बार सूबे के विधानसभा चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला हो रहा है।
दस साल से सत्ता पर काबिज शिअद-भाजपा गठबंधन ने अपने शासन के दौरान किए गए विकास के भले ही बेशुमार काम गिनाए हैं, लेकिन एंटी इनकमबेंसी के फैक्टर की चिंता से वह अछूता नहीं रहा है।
पंजाब की 117 विधानसभा सीटों पर मतदान
इन परिस्थितियों में खुद को पिछड़ते देख कांग्रेस ने भी मोरचा खोल दिया और उसके निशाने पर एक तरफ शिअद और दूसरी तरफ आप रहे। कांग्रेस ने सबसे पहले नोटबंदी के लोगों को हुई कठिनाई को मुद्दा बनाया और फिर ड्रग और भ्रष्टाचार के मुद्दों का भी शिअद के खिलाफ इस्तेमाल शुरू कर दिया।
दिसंबर आते-आते, भाजपा को छोड़ अन्य सभी पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया और चुनाव प्रचार में उसी समय से और तेजी आ गई। गत 4 जनवरी को प्रदेश में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने तक चुनाव प्रचार की जो स्थिति बन चुकी थी, उसी के आधार पर सियासी पंडितों ने सूबे में अगली सरकार के बारे में अनुमान लगाने शुरू कर दिए थे।
सूबे में पूरे चुनाव प्रचार के दौरान खास बात यह भी रही कि मतदाताओं की खामोशी ने सियासी पंडितों और सियासी दलों को इतना उलझा दिया कि तीनों धड़ों के बारे में अनुमान स्विंग होने लगे।
किसी दिन कांग्रेस सबसे आगे दिखाई देती तो अगले दिन ही आप आगे हो जाती। किसी दिन शिअद-भाजपा गठबंधन कांग्रेस व आप के बीच वोट बंटने के कारण फिर से सत्ता में लौटता हुआ दिखाई देता।
चुनाव प्रचार में सियासी दलों के स्टार कैम्पेनरों ने भी को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। भाजपा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, स्मृति ईरानी समेत कई नेताओं ने सूबे में चुनावी रैलियों में हिस्सा लिया, वहीं शिअद के लिए मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने प्रदेश भर का दौरा कर अपने प्रत्याशियों के लिए वोट मांगे।
आप के लिए अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान स्टार कैम्पेनर रहे और दोनों ने सूबे के मतदाताओं के बीच आप के लिए माहौल बनाने में अहम भूमिका भी निभाई।
पंजाब में इस बार यह हैं हॉट सीटें
सिरसा के डेरा सच्चा सौदा ने वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव की भांति ही इस बार भी सूबे में अपने 35 लाख डेरा प्रेमी मतदाताओं को एकजुट होकर शिअद-भाजपा गठबंधन के लिए वोट देने का निर्देश जारी किया गया है।
इस संबंध में पंजाब के मुख्य चुनाव अधिकारी से शुक्रवार को पत्रकारों ने पूछा कि क्या डेरा मुखी का वोटरों को निर्देश देना चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है, सीईओ वीके सिंह ने कहा कि आदर्श चुनाव आचार संहिता के तहत केवल उसी मामले में कार्रवाई की जा सकती है।
जब कोई प्रत्याशी या राजनीतिक दल वोटरों को धर्म के नाम पर लालच देकर वोट हासिल करने का प्रयास करे। उन्होंने कहा कि डेरा सच्चा सौदा प्रमुख के खिलाफ उनके पास कोई शिकायत नहीं आई है और यह मामला चुनाव आचार संहिता के अधीन नहीं आता।
पंजाब में इस बार यह हैं हॉट सीटें
त्रिकोणीय चुनावी मुकाबले के बीच सूबे में इस बार सबकी नजरें जिन सीटों के चुनाव पर टिकी रहेंगी, उनमें प्रमुख है, लंबी विधानसभा क्षेत्र जहां से मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पांचवीं बार चुनाव लड़ रहे हैं और इस सीट पर उन्हें कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह के अलावा आप के प्रत्याशी दिल्ली से विधायक जरनैल सिंह ने चुनौती दी है।
यानी इस सीट पर एक मौजूदा और एक पूर्व मुख्यमंत्री तो आमने-सामने हैं, वहीं श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मुद्दे के साथ बादल को आप प्रत्याशी कड़ी चुनौती दे रहे हैं। दूसरी हॉट सीट, जलालाबाद है जहां डिप्टी सीएम सुखबीर बादल को आप के सांसद भगवंत मान और कांग्रेस के लुधियाना से सांसद रवनीत सिंह बिट्टू चुनौती दे रहे हैं।
तीसरी हॉट सीट, पटियाला में कैप्टन अमरिंदर सिंह के सामने शिअद के पूर्व सेना प्रमुख जनरल जेजे सिंह को उतारा है। इनके अलावा लहरा सीट पर कांग्रेस की पूर्व सीएम राजिंदर कौर भट्टल और सूबे से मौजूदा वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा आमने सामने हैं।
यह हैं पंजाब के चुनावी मुद्दे
युवाओं में नशे की समस्या सूबे की राजनीति का अहम मुद्दा है। 2015 में आई एक आयोग की रिपोर्ट में कहा गया था कि 2.7 करोड़ की आबादी वाले पंजाब में तीन लाख 20 हजार लोग ड्रग्स की लत के शिकार हैं। इस बार भी चुनाव से चार हफ्ते पहले पंजाब से 2.63 टन ड्रग्स बरामद की गई। विपक्ष इसके लिए शिअद-भाजपा गठबंधन को जिम्मेदार ठहरा रहा है, जबकि अपनी सरकार बनने पर कड़े कानूनों के जरिए दोषियों से सख्ती से निपटने का वादा कर रहा है।
बेरोजगारी
पिछले साल के आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में प्रति हजार 60 लोग बेरोजगार हैं। नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, पंजाब में 55 लाख लोग बेरोज़गार हैं। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने युवा वोटरों को रिझाने के लिए यहां नौकरी और बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा की है।
किसानों की आत्महत्या
पंजाब की 50 फीसदी आबादी कृषि से जुड़ी हुई है, लेकिन राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान घट कर 28 फीसदी रह गया है। किसानों पर बैंकों और देनदारों के 69,355 करोड़ रुपये कर्ज हैं। राज्य सरकार भी कर्ज में डूबे इन किसानों की मदद नहीं कर पा रही, जिसके चलते किसानों की आत्महत्या बढ़ी है।
कानून-व्यवस्था
पंजाब पुलिस के रिकार्ड के अनुसार, 57 बड़े अपराधी गैंग के 400 से अधिक गैंगस्टर सूबे में सक्रिय हैं। इसके अलावा, राज्य की जेलों में भी 500 से अधिक बड़े अपराधी बंद हैं। यह आरोप लगता रहा है कि शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान राज्य की कानून-व्यवस्था लगातार बिगड़ी है और अपराधी तत्वों बेखौफ हुए हैं। विपक्षी दलों ने कानून व्यवस्था को भी चुनावी मुद्दा बनाया है।