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आरबीआई के नोटों से भरे ट्रक के हादसे का मामला : 48 घंटे बाद पता चलेगा महिला पुलिसकर्मी के दोनों पैर कितने सुरक्षित

Wed, 08 Sep 2021 02:26 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 08 Sep 2021 02:26 AM IST
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After 48 hours it will be known how safe both the legs of the female policeman
चंडीगढ़। सेक्टर-26 में दुर्घटना की शिकार महिला सिपाही पपीता की स्थिति खतरे से बाहर है। पीजीआई ट्रॉमा सेंटर में उसकेदोनों पैरों की सर्जरी की हो चुकी है, लेकिन 48 घंटे बाद ही यह बताया जा सकेगा कि दोनों पैर कितने सुरक्षित हैं। वह फिर से चल पाएगी या नहीं।
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ट्रामा सेंटर में भर्ती पपीता के दोनों पैरों की सर्जरी सोमवार रात 11 से सुबह 7 बजे तक चली। सुबह 9 बजे उसे ओटी से बाहर रिकवरी रूम में शिफ्ट किया गया। जहां 48 घंटे आब्जर्वेशन में रखने के बाद वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा। बता दें कि बीते सोमवार को आरबीआई के ट्रकों की आपस में टक्कर से महिला सिपाही ट्रक में ही फंस गई थी, जिसमें उसके दोनों पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे।
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ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. काजल ने बताया कि हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर अग्रवाल की टीम ने पपीता केदोनों पैरों की सर्जरी की है, जो पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त था, उसकी नसों को फिर से जोड़ने में काफी वक्त लगा, क्योंकि उस पैर में रक्त का प्रवाह रुक गया था। वहीं, दूसरे पैर की सर्जरी ज्यादा कठिन नहीं थी। डॉ. काजल ने बताया कि सर्जरी के बाद पपीता ने मंगलवार क ी सुबह होश में आने केबाद बात की। पानी मांगकर पीया। उसे दर्द नहीं है। फिलहाल, पपीता के घर का कोई सदस्य पीजीआई नहीं पहुंचा है। उसकेसहयोगी सुबह से देर शाम तक वहां मौजूद रहे।
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ऐसी दुर्घटना में मौके पर टीम जरूरी
डॉ. काजल ने बताया कि महिला पुलिसकर्मी ट्रक की टक्कर में जिस तरह वाहन के बीच फंस गई थी, उस स्थिति में उसे बाहर निकालते समय विशेषज्ञों की मौजूदगी बेहद जरूरी होती है। क्योंकि उस दौरान घायल को बाहर निकालने में की गई छोटी सी चूक उसे अपंग बना सकती है। डॉ. काजल ने बताया कि विदेशों में ऐसी दुर्घटना केलिए विशेषज्ञों की टीम रहती है, लेकिन भारत में अभी ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं है।

ऐसे हुई दोनों पैरों की सर्जरी
पपीता की सर्जरी करने वाले हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर अग्रवाल ने बताया कि दोनों पैरों की तीन-तीन हड्डियां टूटी थीं। इसमें घुटने के नीचे की दो और एड़ी की हड्डी शामिल हैं। उसे फिक्स कर दिया गया है। वहीं, जिस पैर में ब्लड वैसेल्स ब्लॉक हो गए थे, उसे खोलकर जमे खून को निकालकर क्लॉटिंग हटाई गई है। उसके बाद वैसेल्स की कट को जोड़ा गया। इसमें काफी समय लगा। वैस्कुलर सर्जन के सहयोग से यह प्रक्रिया पूरी की गई है। सर्जरी करने वाली टीम में 7 डॉक्टरों की टीम थी। डॉ. समीर का कहना है कि घायल की स्थिति खतरे से बाहर है, लेकिन उसकेपैर बचने का चांस 50-50 का है, क्योंकि ऐसी सर्जरी में संक्रमण का खतरा भी रहता है। 48 घंटे के बाद मिलने वाले संकेत के आधार पर परिणाम का अनुमान लगाया जा सकता है।
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