ये हैं हक के प्रहरी: आरटीआई से लड़नी शुरू की जनता के अधिकारों की लड़ाई, कई बार धमकियां मिलीं, मगर मिशन जारी रहा
अमृतसर में रहने वाले पीसी शर्मा सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून से लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ते हैं। अब तक वह दो हजार से ज्यादा आरटीआई डाल चुके हैं।
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वर्ष 2005 में आरटीआई एक्ट की स्थापना होने से लेकर आजतक जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले एडवोकेट पीसी शर्मा की पहचान हक के प्रहरी के रूप में बन चुकी है। दो हजार से ज्यादा आरटीआई याचिकाएं दायर करने का खिताब पीपी शर्मा पा चुके हैं। उन्होंने सरकारी विभागों और योजनाओं में होने वाले भ्रष्टाचार को उजागर कर व्यवस्था को आइना दिखाया है।
पीसी शर्मा बताते हैं कि आरटीआई ऐसा अचूक हथियार है, जिससे जनता के अधिकारों की रक्षा की सकती है। वह खुद जनता को आरटीआई एक्ट की जानकारी देने के लिए शिविर और सेमिनार आयोजित करते हैं। अपनी वकालत से रोजाना तीन घंटे का समय निकालकर आरटीआई एक्ट की मदद से जनता की समस्याओं का समाधान करवाते हैं।
केंद्र सरकार के प्रत्येक कार्यालय में राष्ट्रीय झंडे तथा राष्ट्रीय सम्मान चिन्ह को सुशोभित करवाने, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमाओं की सुरक्षा व्यवस्था लागू करवाने, गुरु की नगरी अमृतसर में राष्ट्रीय चिन्ह को करेंसी पर लगाने और आटा दाल स्कीम के अंतर्गत करोड़ों रुपये की राशि को सरकारी खजाने में जमा नहीं करवाने के मामले को उन्होंने उजागर किया है।
एडवोकेट पीसी शर्मा बताते हैं कि पहले पूरी जानकारी हासिल की और फिर आम जनता की गाढ़ी कमाई के साथ-साथ सरकारी खजाने को लुटने से बचाया। यह आरटीआई एक्ट की बदौलत संभव हुआ है और आरटीआई में जानकारी मांगने के बाद सरकारें कार्रवाई करने को मजबूर हुई हैं।
22 से ज्यादा बार मिलीं धमकियां फिर भी बने हैं जनता के हक के प्रहरी
हिमाचल प्रदेश में जिला हमीरपुर के भलवानी गांव में एक मध्य वर्गीय परिवार में 27 फरवरी 1959 को पैदा हुए पीसी शर्मा ने दसवीं तक की पढ़ाई अपने गांव में ही पूरी की। उच्चशिक्षा के लिए वे अमृतसर चले गए। यहां पर डीएवी कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने कानपुर विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की और अपनी प्रैक्टिस करने लगे। इस दौरान उन्हें सरकारी कार्यालयों में फैले भ्रष्टाचार का अहसास हुआ।
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने जब वर्ष 2005 में सूचना का अधिकार अधिनियम को लागू किया तो उन्होंने इस कानून का अच्छे से अध्ययन किया। इसके बाद आरटीआई एक्ट के तहत याचिकाएं दायर करनी शुरू कर दीं। पंद्रह साल पहले शुरू हुआ ये सफर अब दो हजार से ज्यादा आरटीआई याचिकाएं दायर करने तक पहुंच चुका है। हालांकि इस दौरान कई तरह की परेशानियां आई हैं और 22 से ज्यादा बार धमकी मिल चुकी है। बावजूद इसके उनका सफर जारी है।
आरटीआई एक्ट की मदद से इन प्रमुख मामलों को उठाया
- ट्रेनो में बच्चों के भीख मांगने के मामला उठाया
- हिमाचल प्रदेश में बंदरों की गिनती करवाई
- किसानों की फसलों संबंधी जानकारियां मांगकर फसलों को बर्बाद होने से बचाया
- आम जनता को सरकारी योजनाओं से अवगत करवाया
- रेलवे विभाग में छुट्टी स्कैम का पर्दाफाश किया
- स्पेशल कैजुअल लीव तथा टीएडीए स्कैम का पर्दाफाश किया
- आयकर विभाग में 115 बी.बी. सेक्शन लागू करवाया
- कस्टम विभाग के कुत्ते मारने वाले मामले का पर्दाफाश किया