{"_id":"5e6951578ebc3eebb342380d","slug":"advisor-commissioner-and-mayor-will-prepare-blueprint-for-city-development-chandigarh-news-pkl3692422110","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंडीगढ़ के विकास के लिए एडवाइजर, कमिश्नर और मेयर तैयार करेंगे खाका, बैठक में सुझाए मुद्दे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंडीगढ़ के विकास के लिए एडवाइजर, कमिश्नर और मेयर तैयार करेंगे खाका, बैठक में सुझाए मुद्दे
Thu, 12 Mar 2020 12:28 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2020 12:28 PM IST
विज्ञापन
Chandigarh The City Beautiful
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़ एडवाइजर मनोज परिदा, नगर निगम कमिश्नर केके यादव और मेयर राजबाला मलिक मिलकर शहर के विकास का खाका तैयार करेंगे। प्रशासन ने एक बैठक बुलाई है, जिसमें नगर निगम के मेयर, पार्षद और प्रशासन के सभी अधिकारी उपस्थित रहेंगे। इसमें किन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी, इसके लिए एडवाइजर मनोज परिदा ने मेयर राजबाला मलिक को एजेंडा तैयार करने के लिए कहा है।
नगर निगम और प्रशासन के बीच सही तालमेल नहीं होने की वजह से शहर के कई विकास कार्य रुके हुए हैं। बैठक में शहर के 10 प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होगी और ज्यादातर मुद्दों के हल करने का लक्ष्य रखा गया है। इस बारे में एडवाइजर मनोज परिदा ने बताया कि नगर निगम और प्रशासन के बीच के तालमेल को और बेहतर करने के लिए विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए मेयर से एजेंडा मांगा गया है ताकि अधिकारी पूरी तैयारी के साथ बैठक में उपस्थित रहें। उन्होंने कहा कि जो मुद्दे मौके पर हल किए जा सकते हैं, उन्हें हल किया जाएगा।
इस बैठक में नगर निगम के वित्तीय संकट, सड़कों के बदतर हालात, जेपी प्लांट को टेकओवर करने के बाद उसके संचालक के लिए फंड की व्यवस्था, गांवों के विकास के लिए अतिरिक्त फंड आदि के मुद्दे पर चर्चा संभव है। हालांकि, लंबित मुद्दों पर प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों के बीच पहले बैठकें आयोजित की जाती थीं, लेकिन किन्हीं कारणों से इन बैठकों को रद्द कर दिया गया। अब फिर से प्रशासन ने इन बैठकों को शुरू करने की योजना बनाई है। नगर निगम बैठक का एजेंडा तैयार कर रहा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह बैठक इसी महीने के आखिरी में आयोजित की जा सकती है।
विज्ञापन
खराब सड़कों के मुद्दे पर निगम और प्रशासन की हुई है किरकिरी
शहर की बदहाल सड़कों की वजह से नगर निगम और यूटी प्रशासन की काफी किरकिरी हुई है। दिल्ली से भी प्रशासन के अधिकारियों से खराब सड़कों को लेकर पूछा गया है। उधर, नगर निगम के अधिकारी वित्तीय संकट का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचते रहे। एडवाइजर मनोज परिदा ने नवंबर में आश्वासन दिया था कि निगम को 63 करोड़ रुपये सड़कों के निर्माण के लिए दिए जाएंगे। इसके सहित निगम को कुल 75 करोड़ की राशि जल्द दे दी जाएगी। पहले निगम सर्दियों का बहाना बताकर सड़कों के निर्माण कार्य से बचता रहा।
अब सड़क बनाने का समय आ गया। सूची तैयार कर ली, लेकिन पेमेंट न होने के कारण ठेकेदार काम नहीं कर रहे हैं। आखिरकार 7 मार्च को सभी पार्षद और मेयर प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से मिले और अपनी मांग रखी। प्रशासक ने 75 करोड़ की किस्त में से 63 करोड़ रुपये सड़कों की मरम्मत, वाटर स्टोरेज की क्षमता बढ़ाने के लिए 19.60 करोड़ रुपये, डार्क स्पॉट पर लाइटें लगाने के लिए 9.50 करोड़, गांव में विकास कार्यों के लिए 14.95 करोड़ रुपये और ग्राम विकास निधि के तहत 13.03 करोड़ रुपये देने का आश्वासन दिया है।
विज्ञापन
नगर निगम और प्रशासन के बीच सही तालमेल नहीं होने की वजह से शहर के कई विकास कार्य रुके हुए हैं। बैठक में शहर के 10 प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होगी और ज्यादातर मुद्दों के हल करने का लक्ष्य रखा गया है। इस बारे में एडवाइजर मनोज परिदा ने बताया कि नगर निगम और प्रशासन के बीच के तालमेल को और बेहतर करने के लिए विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए मेयर से एजेंडा मांगा गया है ताकि अधिकारी पूरी तैयारी के साथ बैठक में उपस्थित रहें। उन्होंने कहा कि जो मुद्दे मौके पर हल किए जा सकते हैं, उन्हें हल किया जाएगा।
विज्ञापन
इस बैठक में नगर निगम के वित्तीय संकट, सड़कों के बदतर हालात, जेपी प्लांट को टेकओवर करने के बाद उसके संचालक के लिए फंड की व्यवस्था, गांवों के विकास के लिए अतिरिक्त फंड आदि के मुद्दे पर चर्चा संभव है। हालांकि, लंबित मुद्दों पर प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों के बीच पहले बैठकें आयोजित की जाती थीं, लेकिन किन्हीं कारणों से इन बैठकों को रद्द कर दिया गया। अब फिर से प्रशासन ने इन बैठकों को शुरू करने की योजना बनाई है। नगर निगम बैठक का एजेंडा तैयार कर रहा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह बैठक इसी महीने के आखिरी में आयोजित की जा सकती है।
विज्ञापन
खराब सड़कों के मुद्दे पर निगम और प्रशासन की हुई है किरकिरी
शहर की बदहाल सड़कों की वजह से नगर निगम और यूटी प्रशासन की काफी किरकिरी हुई है। दिल्ली से भी प्रशासन के अधिकारियों से खराब सड़कों को लेकर पूछा गया है। उधर, नगर निगम के अधिकारी वित्तीय संकट का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचते रहे। एडवाइजर मनोज परिदा ने नवंबर में आश्वासन दिया था कि निगम को 63 करोड़ रुपये सड़कों के निर्माण के लिए दिए जाएंगे। इसके सहित निगम को कुल 75 करोड़ की राशि जल्द दे दी जाएगी। पहले निगम सर्दियों का बहाना बताकर सड़कों के निर्माण कार्य से बचता रहा।
अब सड़क बनाने का समय आ गया। सूची तैयार कर ली, लेकिन पेमेंट न होने के कारण ठेकेदार काम नहीं कर रहे हैं। आखिरकार 7 मार्च को सभी पार्षद और मेयर प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से मिले और अपनी मांग रखी। प्रशासक ने 75 करोड़ की किस्त में से 63 करोड़ रुपये सड़कों की मरम्मत, वाटर स्टोरेज की क्षमता बढ़ाने के लिए 19.60 करोड़ रुपये, डार्क स्पॉट पर लाइटें लगाने के लिए 9.50 करोड़, गांव में विकास कार्यों के लिए 14.95 करोड़ रुपये और ग्राम विकास निधि के तहत 13.03 करोड़ रुपये देने का आश्वासन दिया है।