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गोद लिए बेटे को नौकरी पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, लाखों को होगा फायदा

Thu, 29 Dec 2016 10:46 AM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 29 Dec 2016 10:46 AM IST
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Adopted son deserves the job on compassionate grounds says highcourt
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo
गोद लिए गए बेटे को नौकरी पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। इससे लाखों लोगों को फायदा होगा। आप भी जानिए।
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कोई विधवा अपने पति की मौत के बाद यदि बच्चा गोद लेती है तो उसके दिवंगत पति को ही बच्चे का पिता माना जाएगा। ऐसे में वह बच्चा मृतक का आश्रित होने के चलते अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने का हकदार भी होगा।

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह अहम फैसला सुनाते हुए बीएसएफ के रिटायर जवान की विधवा के गोद लिए बेटे को दो माह के  भीतर नौकरी देने का आदेश दिया है। मामले में पंजाब सरकार ने नौकरी देने से इनकार कर दिया था।
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आतंकी समझकर सीआरपीएफ की ओर से की गई कार्रवाई में बीएसएफ के रिटायर्ड जवान और उसके नाबालिग बेटे को मार दिया गया था। इसके बाद ही रिटायर्ड जवान की विधवा ने अपने भाई के बेटे को गोद लिया।
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तरनतारन निवासी सुखविंदर कौर के पति बीएसएफ से रिटायर हुए थे। साल 1991 में आतंकी समझकर सीआरपीएफ द्वारा की गई कार्रवाई में सुखविंदर के पति और बेटे की मौत हो गई थी।

घटना के बाद पंजाब सरकार ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी का वादा किया था। उधर, बेटे और पति दोनों की मौत के चलते सुखविंदर बेसहारा हो गई थी। ऐसे में उन्होंने इसी वर्ष भाई के घर पैदा हुए बेटे को गोद ले लिया। 

‘गोद लेने पर जन्म देने वाले का अधिकार खत्म’

Adopted son deserves the job on compassionate grounds says highcourt
याची सुखविंदर कौर ने कहा कि गोद लिए बेटे के बीकॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने तरनतारन के डीसी से अनुकंपा के आधार पर नौकरी की अपील की। एक्शन न होने पर उपमुख्यमंत्री के संगत दर्शन कार्यक्रम में गुजारिश की गई। फाइल स्पेशल सेक्रेटरी तक पहुंची।

इसके बाद पॉलिसी का हवाला देते हुए सरकार की ओर से कहा गया कि केवल पति के जीवित रहते गोद लिए बच्चे को ही आश्रित मानकर अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी जा सकती है। इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में आने के अतिरिक्त याची के पास कोई रास्ता नहीं बचा। 

‘गोद लेने पर जन्म देने वाले का अधिकार खत्म’
हाईकोर्ट ने याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि बच्चे को गोद लेने के बाद से ही उसके नेचुरल पेरेंट का अधिकार समाप्त हो जाता है। ऐेसे में विधवा द्वारा गोद लिए गए बेटे के पिता के नाम के स्थान पर मृतक व्यक्ति का नाम ही लिखा जाएगा।

इसलिए याची की ओर से गोद लिया गया पुत्र अनुकंपा के आधार पर नौकरी का अधिकारी है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को दो माह के अंदर सुखविंदर के बेटे को नियुक्ति देने की प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए हैं। 
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