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बिजली निजीकरण को प्रशासक ने दी मंजूरी, अब केंद्रीय कैबिनेट लगाएगी आखिरी मुहर
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चंडीगढ़। बिजली विभाग को खरीदने के लिए सबसे ज्यादा बोली लगाने वाली एमीनेंट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड के नाम पर प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने अपनी मंजूरी दे दी है। अब केंद्रीय कैबिनेट की आखिरी मुहर के लिए मंगलवार को प्रशासन ने फाइल ऊर्जा मंत्रालय को भेज दी है। माना जा रहा है कि यही कंपनी शहर में बिजली सप्लाई का कामकाज देखेगी।
175 करोड़ के चंडीगढ़ बिजली विभाग को खरीदने के लिए एमीनेंट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड ने 871 करोड़ की बोली लगाई है। बीते चार अगस्त को प्रशासन ने वित्तीय बोली खोली थी। इसके बाद 9 अगस्त को प्रशासन की इंपावर्ड कमेटी ने एमीनेंट के नाम पर मंजूरी दी थी और मंगलवार को प्रशासक ने कंपनी के नाम पर अपनी सहमति जता दी।
प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने बताया कि प्रशासक से मंजूरी मिलने के बाद फाइल को ऊर्जा मंत्रालय के पास भेज दिया है। मंत्रालय केंद्रीय कैबिनेट के सामने इस मामले को प्रस्तुत करेगा और फिर कैबिनेट की मंजूरी के बाद एमीनेंट कंपनी को शहर में बिजली सप्लाई का काम सौंप दिया जाएगा। एमीनेंट कंपनी कोलकाता विद्युत आपूर्ति निगम के अधीन कार्य करती है। यूटी प्रशासन ने वर्ष 2019 में बिजली विभाग को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया शुरू की थी। वर्ष 2020 में कोरोना ने दस्तक दी तो प्रक्रिया की रफ्तार थम गई। इसके बाद 9 नवंबर 2020 को प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने इच्छुक कंपनियों से आवेदन मांगे थे। मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलते ही प्रशासन ने वित्तीय बोली को खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
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टाटा-अडानी को पछाड़ एमीनेंट ने अपने नाम किया टेंडर
चंडीगढ़ के बिजली विभाग को खरीदने की दौड़ में कुल सात कंपनियां थीं। इनमें एमीनेंट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड के अलावा अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड, टाटा पावर, टोरेंट पावर, स्टेरेलाइट पावर, रिन्यू विंड एनर्जी और एनटीपीसी इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड शामिल थीं। चंडीगढ़ का अपना कोई बिजली उत्पादन नहीं है, इसलिए विभाग 3.26 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली खरीदने में हर साल 640 करोड़ रुपये खर्च करता है। शहर में इस समय 2.47 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से 2.14 लाख लोग घरेलू बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि अन्य कामर्शियल, स्मॉल पावर, पब्लिक लाइटिंग और कृषि के कनेक्शन हैं। निजीकरण होने के बाद बिजली के दाम कम भी हो सकते हैं या बढ़ भी सकते हैं। पिछले कई सालों से शहर में बिजली के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं।
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175 करोड़ के चंडीगढ़ बिजली विभाग को खरीदने के लिए एमीनेंट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड ने 871 करोड़ की बोली लगाई है। बीते चार अगस्त को प्रशासन ने वित्तीय बोली खोली थी। इसके बाद 9 अगस्त को प्रशासन की इंपावर्ड कमेटी ने एमीनेंट के नाम पर मंजूरी दी थी और मंगलवार को प्रशासक ने कंपनी के नाम पर अपनी सहमति जता दी।
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प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने बताया कि प्रशासक से मंजूरी मिलने के बाद फाइल को ऊर्जा मंत्रालय के पास भेज दिया है। मंत्रालय केंद्रीय कैबिनेट के सामने इस मामले को प्रस्तुत करेगा और फिर कैबिनेट की मंजूरी के बाद एमीनेंट कंपनी को शहर में बिजली सप्लाई का काम सौंप दिया जाएगा। एमीनेंट कंपनी कोलकाता विद्युत आपूर्ति निगम के अधीन कार्य करती है। यूटी प्रशासन ने वर्ष 2019 में बिजली विभाग को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया शुरू की थी। वर्ष 2020 में कोरोना ने दस्तक दी तो प्रक्रिया की रफ्तार थम गई। इसके बाद 9 नवंबर 2020 को प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने इच्छुक कंपनियों से आवेदन मांगे थे। मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलते ही प्रशासन ने वित्तीय बोली को खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
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टाटा-अडानी को पछाड़ एमीनेंट ने अपने नाम किया टेंडर
चंडीगढ़ के बिजली विभाग को खरीदने की दौड़ में कुल सात कंपनियां थीं। इनमें एमीनेंट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड के अलावा अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड, टाटा पावर, टोरेंट पावर, स्टेरेलाइट पावर, रिन्यू विंड एनर्जी और एनटीपीसी इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड शामिल थीं। चंडीगढ़ का अपना कोई बिजली उत्पादन नहीं है, इसलिए विभाग 3.26 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली खरीदने में हर साल 640 करोड़ रुपये खर्च करता है। शहर में इस समय 2.47 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से 2.14 लाख लोग घरेलू बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि अन्य कामर्शियल, स्मॉल पावर, पब्लिक लाइटिंग और कृषि के कनेक्शन हैं। निजीकरण होने के बाद बिजली के दाम कम भी हो सकते हैं या बढ़ भी सकते हैं। पिछले कई सालों से शहर में बिजली के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं।