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प्रति नमूने 500 रुपये देकर निजी लैब से आरटी-पीसीआर जांच कराएगा प्रशासन
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चंडीगढ़। केंद्र सरकार की ओर से बार-बार आरटी-पीसीआर जांच की संख्या बढ़ाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। मंगलवार को यूटी प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा ने शहर के निजी लैब संचालकों के साथ एक बैठक कर तय किया कि वह आरटी-पीसीआर जांच की संख्या बढ़ाने के लिए निजी लैब का सहारा लेंगे।
बैठक में तय किया गया कि हरियाणा की तर्ज पर चंडीगढ़ प्रशासन भी नमूने लेकर आरटी-पीसीआर जांच के लिए निजी लैब को भेजेगा और प्रति नमूने की जांच के लिए प्रशासन की ओर से निजी लैब को 500 रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा प्रशासक के सलाहकार ने निजी लैब संचालकों को क्षमता बढ़ाने के भी निर्देश दिए।
शहर में पीजीआई और जीएमसीएच-32 में नमूनों की आरटी-पीसीआर जांच की जा रही है, लेकिन दोनों की सीमित क्षमता होने की वजह से प्रशासन केंद्र सरकार की ओर से तय मापदंडों को पूरा नहीं कर पा रहा है, इसलिए ही निजी लैब का सहारा लिया जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले दिनों यूटी स्वास्थ्य विभाग की ओर से की जा रही जांच पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा था कि चंडीगढ़ में आरटी-पीसीआर टेस्ट कम किए जा रहे हैं। कुल जांच में आरटी-पीसीआर टेस्ट का शेयर 40 प्रतिशत है, यह बेहद कम है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में रैपिड एंटीजन टेस्ट ज्यादा किए जा रहे हैं। उन्होंने चंडीगढ़ के स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए थे कि आरटी-पीसीआर टेस्ट का शेयर 70 प्रतिशत किया जाए और जांचों की संख्या को निरंतर बढ़ाने की कोशिश की जाए।
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बैठक में तय किया गया कि हरियाणा की तर्ज पर चंडीगढ़ प्रशासन भी नमूने लेकर आरटी-पीसीआर जांच के लिए निजी लैब को भेजेगा और प्रति नमूने की जांच के लिए प्रशासन की ओर से निजी लैब को 500 रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा प्रशासक के सलाहकार ने निजी लैब संचालकों को क्षमता बढ़ाने के भी निर्देश दिए।
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शहर में पीजीआई और जीएमसीएच-32 में नमूनों की आरटी-पीसीआर जांच की जा रही है, लेकिन दोनों की सीमित क्षमता होने की वजह से प्रशासन केंद्र सरकार की ओर से तय मापदंडों को पूरा नहीं कर पा रहा है, इसलिए ही निजी लैब का सहारा लिया जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले दिनों यूटी स्वास्थ्य विभाग की ओर से की जा रही जांच पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा था कि चंडीगढ़ में आरटी-पीसीआर टेस्ट कम किए जा रहे हैं। कुल जांच में आरटी-पीसीआर टेस्ट का शेयर 40 प्रतिशत है, यह बेहद कम है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में रैपिड एंटीजन टेस्ट ज्यादा किए जा रहे हैं। उन्होंने चंडीगढ़ के स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए थे कि आरटी-पीसीआर टेस्ट का शेयर 70 प्रतिशत किया जाए और जांचों की संख्या को निरंतर बढ़ाने की कोशिश की जाए।
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