फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Actress Gul Panag said there will always be pressure in life

Samvad: जिंदगी में दबाव हमेशा रहेगा, इससे ही व्यक्ति हीरा बनता है, अमर उजाला संवाद में बोलीं गुल पनाग

Tue, 08 Aug 2023 12:46 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 08 Aug 2023 12:46 AM IST
सार

पनाग ने कहा कि वह यहां तक अपने पिता की वजह से पहुंची हैं। उनका अनुशासन हमने अपने जीवन में अपनाया है। लक्ष्य का पीछा करना इन्हीं से सीखा है। सेना के माहौल ने हमें अनुशासन दिया।

विज्ञापन
Actress Gul Panag said there will always be pressure in life
अभिनेत्री गुल पनाग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जानी मानी अभिनेत्री और चंडीगढ़ निवासी गुल पनाग का कहना है कि जिंदगी में दबाव हमेशा रहता है और रहेगा। इस दबाव में तपकर ही व्यक्ति हीरा बनता है। दबाव के बीच दिमाग को ठंडा रखते हुए आगे बढ़ना सीखने लायक है। जिसने भी तनाव को जीतना सीख लिया, उसे मंजिल जरूर मिली है। जिंदगी में लगातार एक के बाद एक लक्ष्य तय करते रहें और इसके लिए शिद्दत से मेहनत करें, यकीनन फिर से आपको मंजिल मिलेगी, क्योंकि जीतने वाले घोड़े फिनिश लाइन पर आकर नहीं रुका करते।

विज्ञापन


अमर उजाला संवाद पंजाब कार्यक्रम में पहुंची गुल पनाग ने अपनी कामयाबी के पीछे अपने पिता लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग के साथ-साथ परिवार का मार्गदर्शन बताया। उन्होंने कहा कि उनकी शुरुआत मिस इंडिया से हुई लेकिन उन्होंने उसे जरिया बनाया वह सारी चीजें करने का, जिसे वह हमेशा से करना चाहती थी। पायलट का लाइसेंस लिया, अपना प्रोडक्शन हाउस बनाया, लॉ की पढ़ाई की, मास्टर की डिग्री ली। लगातार अगला लक्ष्य, अगली चुनौती तय की।

विज्ञापन

बेटा बड़ा होकर खुद अपने लिए चुनेगा खेल

पनाग ने कहा कि बच्चों को सिखाने के बजाय खुद उनके सामने रोल मॉडल पेश करें। आपको उदाहरण बनना होगा, तभी बच्चा सीखेगा। उनके पिता सेना में थे लेकिन मैं सेना में नहीं हूं लेकिन वह चाहती हैं कि उनका भी अनुशासन सीखे, इसके लिए वह चाहती हैं कि वह एथलीट से जुड़े और खेलों पर उसका झुकाव रहे। वह रोज सुबह दौड़ती हैं और बेटा साइकिल चलाता है। फिलहाल मेरा उद्देश्य है कि उसकी मजबूती बढ़ाई जाए, बाद में वह खुद अपना पसंदीदा खेल चुने। खेल में जो मुश्किलें सामने आती हैं, उसी से अनुशासन का महत्व पता चलता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

पनाग का कहना है कि स्पोर्ट्स के जरिए अनुशासन सिखाया जा सकता है। वह खिलाड़ियों की बहुत इज्जत करती हैं। जो अनुशासन या लगनशीलता खेल से आती है, वह कहीं और से नहीं आ सकती। खेल में हार भी होती है और जीत भी। हार को मोटिवेशन में बदलकर आगे बढ़ने का मौका मिलता है।

शेखी से ही बन गई मिस इंडिया

गुल पनाग ने कहा कि उन्होंने और उसके भाई ने खूब शेखी बघारी है। इतनी कहानियां बनाई हैं कि बता नहीं सकती। माता-पिता ने हालांकि कभी हमारी पोल नहीं खोली। कुछ किस्सागोई होती है, कुछ कल्पनाएं होती हैं। जब वह छोटी थी तो कहती थी कि मिस इंडिया बनेगी। जब वह 15 साल की हुई तो परिवार के लोग बोलते थे जब मिस इंडिया बन जाओ तो तब ये करना। इससे परिवार में एक माहौल बन गया और एक दिन वह इस लक्ष्य को पा गई।

पिता से सीखा लक्ष्य का पीछा करना

पनाग ने कहा कि वह यहां तक अपने पिता की वजह से पहुंची हैं। उनका अनुशासन हमने अपने जीवन में अपनाया है। लक्ष्य का पीछा करना इन्हीं से सीखा है। सेना के माहौल ने हमें अनुशासन दिया। पिता ने वह अनुशासन हम पर कायम रखा। इनका अनुशासन हमारे लिए सबसे बड़ी सीख है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed