सड़क हादसे में क्रूजर सवार 8 लोगों की मौत, पीड़ित व चश्मदीदों ने सुनाई खौफनाक कहानी
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हरियाणा के झज्जर में सोमवार को भीषण दर्दनाक हादसा हुआ। इस हादसे में क्रूजर गाड़ी सवार 8 लोगों की मौत हो गई। एक दर्जन से अधिक गाड़ियां धुंध की वजह से आपस में टकरा गई। पढ़िए हादसे के चश्मदीदों की जुबानी...
क्रूजर गाड़ी में ड्राइवर के साथ ही मैं बैठा हुआ था। जाम की वजह से गाड़ी बिल्कुल साइड में कर ली गई थी। धुंध इतनी थी कि सामने कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। इसी दौरान पीछे से तेज धमाका हुआ और मुझे लगा कि शायद अब भगवान ही हमें बचा सकता है। इसी के साथ मेरे सिर में चोट लग गई और मेरी उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया। कुछ देर बाद जब होश आया तो गाड़ी को दूसरी गाड़ी से खींच कर अलग किया जा रहा था।
मेरी आंखों के सामने अपनी ही लोगों की लाशें बिछी हुई थीं, लेकिन मुझे हादसे की वजह से इतना सदमा लगा था कि मैं समझ ही नहीं पा रहा था कि कौन-कौन लोग अब हमारे बीच नहीं रहे। मुझे अन्य लोगों के साथ पुलिस अस्पताल में लेकर पहुंची। अब हादसे के तीन घंटे जब कुछ समझने लायक हुआ हूं तो मैं खुद ही दूसरा से पूछा रहा हूं कि कौन-कौन नहीं रहा। -जैसा कि क्रूजर गाड़ी में फ्रंट सीट पर सवार उदय सिंह ने बताया
शुक्र है भगवान ने बचा ली मेरी जान...
मैंने बहादुरगढ़ में भवन निर्माण का ठेका लिया हुआ है। रोजाना की तरह मैं अपने शहर नीमराणा से बहादुरगढ़ जा रहा था। जब मैं झज्जर के बादली फ्लाईओवर पर पहुंचा तो देखा कि मेरे से दो-चार गाड़ी आगे क्रूजर को ट्रॉले ने टक्कर मारी हुई थी। पुलिस ने इशारा किया, मैंने गाड़ी को इनके पीछे खड़ा कर लिया।
हादसे के चलते सभी लोग अपनी-अपनी कार से बाहर निकलकर हादसे को देख रहे थे। मैं भी अपनी कार से बाहर आया ही था कि इसी दौरान एक ट्राले ने मेरी कार को भी पीछे से टक्कर मार दी। इससे कार अगली कार से जा टकराई। भगवान का लाख शुक्र है कि उस दौरान मैं कार में नहीं था। आज भगवान ने मेरी जान बचा ली। --जैसा कि हादसे का शिकार बनने से बचे नीमराणा के मनीष ने बताया
जाना मुझे था, लेकिन मैंने अपनी भाभी को भेज दिया
नजफगढ़ शोक जताने तो मुझे जाना था, लेकिन मैंने अपनी भाभी प्रेमलता को भेज दिया। मुझे पशुओं के लिए सानी कटवानी थी, इसलिए मैं नहीं जा सका। उसे क्या पता था कि वे शोक जताने के लिए नजफगढ़ ही नहीं पहुंच पाएंगे। हादसे में मेरी भाभी प्रेमलता की मौत हो गई, जिसके लिए मैं खुद पर अफसोस कर रहा हूं कि अगर मैंने उसे वहां नहीं भेजा होता तो आज हमारे बीच होती। -जितेंद्र, मृतका प्रेमलता का देवर।
मृतकों का प्रोफाइल
खजानी के दो बच्चे निर्मला और राधे हैं। दोनों ने ही दसवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। दोनों अभी अविवाहित हैं।
- मृतका शीला (43)
शीला के तीन बच्चे हैं। सन्नी दसवीं कक्षा में पढ़ता है और रमेश मजदूरी करता है। दोनों की शादी नहीं हुई है, जबकि उसके लड़के हंसराज की शादी पहले हो चुकी है।
- मृतका सतपाल और कांता (45)
सतपाल के भी तीन बच्चे हैं। इनमें दो लड़की और एक लड़का है। लड़का जयवीर बारहवीं, लड़की संगीता
11वीं व संगीता सातवीं कक्षा में पढ़ती है।
- मृतका प्रेमलता (45)
प्रेमलता की तीन बेटियां हैं। एक की शादी की जा चुकी है और दो बेटी मेधा और गोमती की शादी नहीं हुई है, जबकि बेटा अभिषेक 9वीं कक्षा में पढ़ता है।
- मृतका लक्ष्मी (60)
लक्ष्मी के दो बेटे विकास और सुशील हैं। दो बेटियां नीलम व कविता शादीशुदा हैं।
- मृतका संतोष (50)
संतोष के चार बेटे हैं। धीरज की शादी हो चुकी है, जबकि योगेंद्र, निर्मल और कर्ण की अभी शादी नहीं हुई है।
- रामकली (50)
रामकली के दो बेटे नरेंद्र व विरेंद्र और दो बेटियां रेखा और मंजीता ये चारों शादीशुदा हैं।