चंडीगढ़: एबीवीपी का पंजाब विधानसभा की ओर मार्च, रोकने पर हंगामा, पुलिस से धक्कामुक्की
- सेक्टर- 17 में एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने की बैरिकेड तोड़ने की कोशिश, पुलिस ने की पानी की बौछारें।
- विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर निकाल रहे थे मार्च, पुलिस ने एकत्र स्थल से नहीं जाने दिया आगे।
- कार्यकर्ताओं ने वहीं दिया मजिस्ट्रेट को ज्ञापन, कहा- उनका संघर्ष जारी रहेगा, छात्रों का शोषण नहीं होने देंगे।
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छात्रों की मांगों को लेकर पंजाब विधानसभा तक विशाल मार्च निकाल रहे एबीवीपी के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने सेक्टर- 17 में ही रोक लिया। उन पर पानी की बौछार की गई। इस दौरान बैरिकेड तोड़ने की भी कोशिश की गई। पुलिसकर्मियों से धक्कामुक्की भी हुई, लेकिन उन्हें आगे नहीं जाने दिया गया। आखिर में उन्होंने अधिकारियों को ज्ञापन दिया और मार्च खत्म कर दिया।
एबीवीपी के कार्यकर्ता विशाल मार्च के लिए मंगलवार को सेक्टर- 17 में इकट्ठे हुए। यहीं पर उन्होंने बैठक की। राज्य सचिव चिरांशु रतन ने मार्च को संबोधित किया। इनके अलावा प्रांत छात्रा प्रमुख कुदरतजोत कौर, प्रांत सह मंत्री दीक्षा भनोट, एबीवीपी पीयू अध्यक्ष हरीश गुर्जर, महानगर मंत्री अजय सूद, प्रांत कार्यकारिणी सदस्य अरमानजोत बराड़, एबीवीपी पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला अध्यक्ष वीरेश बहल, प्रांत कार्यकारिणी सदस्य मनमीत ने भी विचार व्यक्त किए।
एबीवीपी पीयू सचिव प्रिया शर्मा ने मार्च के दौरान मंच संभाला। उसके बाद कार्यकर्ता पंजाब विधानसभा के लिए रवाना हुए। चंडीगढ़ पुलिस ने कार्यकर्ताओं को बैरिकेड लगाकर नगर निगम के सामने सेक्टर 17 में रोक लिया। इस दौरान बैरिकेड तोड़ने की कोशिश हुई। कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड पर चढ़ गए।
स्थिति विकराल होते देख पुलिस को वाटर कैनन का प्रयोग करना पड़ा। इस दौरान पुलिस कर्मियों की कई छात्रों से नोकझोंक और धक्कामुक्की भी हुई, लेकिन उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया गया। आखिर में छात्रों ने अधिकारियों को ज्ञापन दिया। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष जारी रहेगा। अधिकारियों ने समस्या समाधान का आश्वासन दिया।
ये हैं एबीवीपी की मुख्य मांगें
- पंजाब के एससी-एसटी विद्यार्थियों की तुरंत स्कॉलरशिप दी जाए।
- छात्र संघ चुनाव पंजाब में बहाल हों और तिथियों का एलान किया जाए।
- सूबे में रिक्त शिक्षकों के पदों को तुरंत भरा जाए।
- शिक्षा के हो रहे व्यापारीकरण पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।
- निजी संस्थान अपनी मनमानी कर रहे हैं। इसके लिए नियामक का गठन हो।
- शराब की होम डिलीवरी निर्णय को तुरंत वापस लिया जाए।