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Chandigarh: खत्म नहीं होगा आप-कांग्रेस का गठबंधन, कारण- चंडीगढ़ में ढाई साल तक कोई चुनाव नहीं
Mon, 10 Jun 2024 10:41 AM IST
निवेदिता वर्मा
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 10 Jun 2024 10:41 AM IST
सार
चंडीगढ़ में चुनाव प्रचार अभियान के दौरान भाजपा की तरफ से लगातार गठबंधन के भविष्य को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता चंडीगढ़ में गठबंधन को लेकर असमंजस में थे। हालांकि अब दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि गठबंधन मजबूती से चंडीगढ़ में बना रहेगा।
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आम आदमी पार्टी और कांग्रेस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लोकसभा चुनाव खत्म होते ही सवाल उठ रहे थे कि चार जून के बाद चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन का क्या होगा। अब दोनों पार्टियों ने साफ कर दिया है कि गठबंधन फिलहाल बना रहेगा।
कारण है कि चंडीगढ़ में अगले ढाई साल तक कोई चुनाव नहीं है। इसलिए नगर निगम की सदन की बैठक में भाजपा को घेरने के लिए दोनों पार्टियों के पार्षद एकजुट रहेंगे।
कांग्रेस पार्टी हाईकमान ने लोकल यूनिट पर गठबंधन को लेकर फैसला छोड़ा है। स्थानीय यूनिट गठबंधन को बरकरार रखने के पक्ष में है। आम आदमी पार्टी के नेताओं को हाईकमान के फैसले का इंतजार है लेकिन जब तक कोई नया आदेश नहीं आता है, तब तक गठबंधन बना रहेगा। हाल ही में नवनिर्वाचित सांसद मनीष तिवारी ने भी एक कार्यक्रम में दोनों पार्टियों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के एक साथ रहने की बात कही। उन्होंने यहां तक कहा कि आने वाले दिनों में गठबंधन को और मजबूत किया जाएगा।
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गठबंधन की वजह से भाजपा के हाथ से खिसकी मेयर-सांसद की कुर्सी
चंडीगढ़ में मेयर चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने गठबंधन की घोषणा की थी। इंडिया के बैनर तले देश में पहला चुनाव चंडीगढ़ में लड़ा गया था। गठबंधन ने मेयर पद पर आम आदमी पार्टी के पार्षद कुलदीप कुमार को मैदान में उतारा। कांग्रेस के सभी पार्षदों ने सहयोग दिया और फिर वह मेयर चुने गए।
गठबंधन से सिर्फ आप ही नहीं, कांग्रेस को भी फायदा हुआ। गठबंधन में चंडीगढ़ की लोकसभा सीट कांग्रेस के खाते में गई और फिर गठबंधन के बल पर ही कांग्रेस के मनीष तिवारी ने जीत दर्ज की। इस गठबंधन की वजह से ही चंडीगढ़ में भाजपा के हाथ से मेयर और सांसद की कुर्सी चली गई। एक पार्टी का मेयर बन गया तो दूसरे का सांसद। दोनों का फायदा मिला है।
चंडीगढ़ में आप-कांग्रेस का गठबंधन मजबूती के साथ बना रहेगा। अन्य राज्यों में भले गठबंधन टूटा हो लेकिन चंडीगढ़ में इकट्ठे रहेंगे और एक-दूसरे के साथ खड़े रहेंगे। - एचएस लक्की, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
चंडीगढ़ में दोनों पार्टियों का गठबंधन जारी है। पार्टी हाईकमान की तरफ से फिलहाल कोई नया आदेश नहीं आया है। इसलिए पहले की तरह ही दोनों एक-दूसरे के साथ मजबूती से खड़े हैं। - डॉ एसएस आहलूवालिया, प्रदेश सह-प्रभारी, आप
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कारण है कि चंडीगढ़ में अगले ढाई साल तक कोई चुनाव नहीं है। इसलिए नगर निगम की सदन की बैठक में भाजपा को घेरने के लिए दोनों पार्टियों के पार्षद एकजुट रहेंगे।
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कांग्रेस पार्टी हाईकमान ने लोकल यूनिट पर गठबंधन को लेकर फैसला छोड़ा है। स्थानीय यूनिट गठबंधन को बरकरार रखने के पक्ष में है। आम आदमी पार्टी के नेताओं को हाईकमान के फैसले का इंतजार है लेकिन जब तक कोई नया आदेश नहीं आता है, तब तक गठबंधन बना रहेगा। हाल ही में नवनिर्वाचित सांसद मनीष तिवारी ने भी एक कार्यक्रम में दोनों पार्टियों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के एक साथ रहने की बात कही। उन्होंने यहां तक कहा कि आने वाले दिनों में गठबंधन को और मजबूत किया जाएगा।
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गठबंधन की वजह से भाजपा के हाथ से खिसकी मेयर-सांसद की कुर्सी
चंडीगढ़ में मेयर चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने गठबंधन की घोषणा की थी। इंडिया के बैनर तले देश में पहला चुनाव चंडीगढ़ में लड़ा गया था। गठबंधन ने मेयर पद पर आम आदमी पार्टी के पार्षद कुलदीप कुमार को मैदान में उतारा। कांग्रेस के सभी पार्षदों ने सहयोग दिया और फिर वह मेयर चुने गए।
गठबंधन से सिर्फ आप ही नहीं, कांग्रेस को भी फायदा हुआ। गठबंधन में चंडीगढ़ की लोकसभा सीट कांग्रेस के खाते में गई और फिर गठबंधन के बल पर ही कांग्रेस के मनीष तिवारी ने जीत दर्ज की। इस गठबंधन की वजह से ही चंडीगढ़ में भाजपा के हाथ से मेयर और सांसद की कुर्सी चली गई। एक पार्टी का मेयर बन गया तो दूसरे का सांसद। दोनों का फायदा मिला है।
चंडीगढ़ में आप-कांग्रेस का गठबंधन मजबूती के साथ बना रहेगा। अन्य राज्यों में भले गठबंधन टूटा हो लेकिन चंडीगढ़ में इकट्ठे रहेंगे और एक-दूसरे के साथ खड़े रहेंगे। - एचएस लक्की, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
चंडीगढ़ में दोनों पार्टियों का गठबंधन जारी है। पार्टी हाईकमान की तरफ से फिलहाल कोई नया आदेश नहीं आया है। इसलिए पहले की तरह ही दोनों एक-दूसरे के साथ मजबूती से खड़े हैं। - डॉ एसएस आहलूवालिया, प्रदेश सह-प्रभारी, आप