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दिल्ली में 'आप' की जीत के पंजाब में मायने

Wed, 11 Feb 2015 03:54 PM IST
अनिल भारद्वाज/अमर उजाला, चंडीगढ़
अनिल भारद्वाज/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 11 Feb 2015 03:54 PM IST
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AAP Arvind Kejriwal Victory in Delhi Election Effect on Punjab Politics

दिल्ली में आप के धमाकेदार प्रदर्शन से पंजाब के सियासी भविष्य की जमीन भी तैयार हो गई है। जहां अकाली-भाजपा की जुदा हो रही राहों पर ब्रेक लगने के आसार बढ़ गए हैं, वहीं आप, कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दलों के लिए भी यह नतीजे राहत भरे हैं।

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बेशक इस वक्त सभी दल नगर निकाय चुनाव की सक्रियता की वजह से दूसरी तरफ व्यस्त हैं, लेकिन 25 फरवरी को इसकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजनेताओं की अगली नजर 2017 के शुरू में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव पर टिक जाएगी दिल्ली में आप की जीत का सबसे ज्यादा असर अकाली-भाजपा रिश्तों पर पड़ता दिखाई पड़ रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से दोनों दलों के बीच शुरू हुई तल्खी के चलते एक बार तो ऐसा लगा था कि किसी भी वक्त गठबंधन टूट जाएगा।
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हरियाणा विधानसभा चुनाव में शिअद के इनेलो का समर्थन करने की वजह से तल्खी और बढ़ी तथा दोनों तरफ से नेताओं की परस्पर विरोधी तल्ख बयानबाजी काफी तेज हो गई। फिर अचानक दिल्ली विधानसभा और पंजाब नगर निकाय चुनाव के चलते ऐसा लगा मानो दोनों के बीच कुछ समय के लिए अस्थायी समझौता हुआ है व तल्खी कुछ कम हुई दिखाई पड़ी।
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पंजाब में भाजपा का आधार काफी मजबूत
सियासी माहिरों का मानना था कि अल्पसंख्यक सिख समुदाय के वोटों को ध्यान में रख कर भाजपा ने कुछ नरमी दिखाई और दिल्ली चुनाव के नतीजों के आधार पर आगे का निर्णय लेने की सोची। ऐसा माना जा रहा था कि दिल्ली में जीत के बाद पंजाब में भाजपा अलग रास्ता अख्तियार कर लेगी और यदि परिणाम विपरीत रहे तो गठबंधन जारी रखने पर विचार करेगी।

अब दिल्ली में भाजपा का बिलकुल सफाया हो गया है। बेशक शिअद के भी चारों उम्मीदवार हार गए हैं, लेकिन पंजाब में इसका आधार भाजपा से कहीं अधिक मजबूत है। इन हालात में पूरी संभावना है कि दोनों दलों के नेताओं की पिछले दिनों से जारी बयानबाजी कि अकाली-भाजपा गठबंधन पुराना व मजबूत है और नहीं टूटेगा, को आगे बढ़ाते हुए अलायंस ब्रेकिंग पर फिलहाल ब्रेक लगा दिए जाएंगे।


दूसरी ओर, पंजाब में आप, कांग्रेस व अन्य सियासी दलों की जमीन सरकने के सिलसिले पर भी कुछ रोक लग गई प्रतीत हो रही है। आप नेता तो जीत से उत्साहित हैं ही, पंजाब कांग्रेस को भी शिअद-भाजपा गठबंधन की दिल्ली में हुई हार से कुछ ऑक्सीजन मिली है। सीधे शब्दों में आने वाले दिनों में पंजाब की सियासत नया रूप लेने जा रही है।

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