आप ने कहा- पक्के मोदी भक्त हैं कैप्टन और बादल, भगवंत मान ने शुरू की ये मुहिम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आम आदमी पार्टी ने पंजाब के मुख्यमंत्री और शिअद के बादलों पर पक्के मोदी भक्त होने का आरोप लगाया है। आप नेताओं ने शिअद पर कृषि विरोधी विधेयकों को लेकर आरोप लगाया कि महीनों से बादल इसकी वकालत करते आ रहे हैं, चक्का जाम सिर्फ किसान वोटों को साधने के लिए किया जा रहा है। वहीं सूबे के मुखिया कैप्टन माफियाओं की सरकार को बचाने के लिए किसानों के साथ खुलकर नहीं आ पा रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पहले बादलों ने कृषि विरोधी विधेयकों की महीनों से वकालत कर किसानों की पीठ में छुरा घोंपा है। अब मोदी सरकार के इशारे पर किसानों के संघर्ष को तारपीडो करने की घटिया कोशिशों में जुटे हुए हैं।
इस वजह से 25 सितंबर को किसान जत्थेबंदियों की ओर से दिए गए पंजाब बंद के आमंत्रण के बराबर बादलों ने 25 सितंबर को ही ‘चक्का जाम’ एलान का नाटक किया है। किसानी संघर्ष के बराबर बादलों की ओर से यह नाटक मोदी सरकार के इशारे पर किया जा रहा है, जिससे किसी तरीके से पंजाब के किसानों और आम लोगों की जागरूक होने से रोका जाए।
हाई पावर समिति में कैप्टन और वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल की ओर से इन काले कानूनों को चुपचाप सहमति देना और वित्तीय संशोधनों के नाम पर गठित मोंटेक सिंह आहलुवालिया समिति द्वारा मोदी सरकार के इन काले कानूनों को हूबहू लागू करने की प्रक्रिया शुरू करना इस तथ्य की पुष्टि करता है कि अमरिंदर सिंह मोदी सरकार के कारिंदे के तौर पर काम कर रहे हैं।
संगरूर: ग्रामसभाओं के जरिये कृषि विधेयकों को रद्द करवाने की तैयारी
कृषि विधेयकों के खिलाफ अब गांवों की पंचायतें भी उठ खड़ी हुई हैं। लोकतंत्र की नींव मानी जाने वालीं पंचायतों ने ग्रामसभाओं के जरिये मोदी सरकार के तीनों विधेयकों को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बुधवार को संगरूर में आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेशाध्यक्ष व सांसद भगवंत मान के नेतृत्व में पंचायतों ने ग्राम सभा बुलाने के लिए विशेष एजेंडे के तहत पंचों, पंचायत सचिवों और बीडीपीओ को नोटिस में अनाउंसमेंट करवाने की प्रक्रिया शुरू की है।
भगवंत मान ने कहा कि मोदी सरकार ने जिस तानाशाही तरीके से कृषि से संबंधित तीनों विधेयकों को लोकसभा और राज्यसभा में पास करवाया है, यह न सिर्फ लोकतंत्र की सरेआम हत्या है, बल्कि किसानों समेत कृषि से संबंधित सभी पेशों को तबाह कर देंगे।
कृषि निर्भर पंजाब पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। ऐसे तानाशाही माहौल में गांवों की पंचायतें पंजाब की कृषि को निजी पूंजीपति कंपनियां और कॉरपोरेट घरानों की लूट से बचाने के लिए बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। क्योंकि लोकतंत्र में ग्राम सभा की बड़ी ताकत है, जिसे कोई चुनौती नहीं दे सकता। इसलिए सभी पंजाब की पंचायतें विशेष एजेंडे के अंतर्गत ग्रामसभाएं बुलाकर केंद्र सरकार के इन काले विधेयकों को नामंजूर और रद्द कर दें।
एक सवाल के जवाब में भगवंत मान ने कहा कि ग्राम सभाओं की ओर से पास किए प्रस्ताव भविष्य में सुप्रीम कोर्ट में अहम दस्तावेजों के तौर पर काम आएंगे। उन्होंने पंजाब सरकार से अपील की है कि वह इस मुहिम का हिस्सा बने।
उन्होंने कहा कि पार्टीबाजी से ऊपर उठकर पंजाब की सभी पंचायतें अगर ग्राम सभाओं के जरिये मोदी के काले कानूनों को रद्द करती हैं तो यह क्रांतिकारी मुहिम पूरे देश में शुरू हो जाएगी, क्योंकि चंद कॉरपोरेट घरानों के बिना कोई भी किसान या गांव ऐसे घातक कानून नहीं चाहता।