{"_id":"5718d15f4f1c1bcf4f8b4731","slug":"aadarsh-school-punjab-school-punjab-govt-punjab-school-education-campus-news-bathinda-punjab","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब का ये कैसा आदर्श स्कूल, जहां पेड़ की छांव में पढ़ते हैं बच्चे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब का ये कैसा आदर्श स्कूल, जहां पेड़ की छांव में पढ़ते हैं बच्चे
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 22 Apr 2016 04:06 PM IST
विज्ञापन
पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई करते हुए स्कूली बच्चे
- फोटो : डेमो फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बठिंडा के गांव परथला में आदर्श स्कूल की इमारत ही नहीं बन पाई है, जबकि आदर्श स्कूल के लिए दाखिल किए गए बच्चे गांव की धर्मशाला में पेड़ों की छाया के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। आदर्श स्कूल की यह हालत स्वयं इस स्कूल की मैनेजमेंट कमेटी के सदस्यों जगसीर सिंह एवं हरनाम राम ने हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में बयान की है।
एडवोकेट एचसी अरोड़ा के माध्यम से जनहित याचिका में कहा गया है कि सरकार ने निजी क्षेत्र की भागीदारी से पंजाब में आदर्श स्कूल चलाने के लिए वर्ष 2010 में योजना बनाई थी। इस योजना के तहत गांव की पंचायत ने आदर्श स्कूल के लिए जगह दे दी, लेकिन वर्ष 2012 में निजी क्षेत्र से भागीदारी खत्म हो गई और मामला अधर में लटक गया।
उस वक्त से लेकर अभी तक स्कूल की इमारत का निर्माण नहीं हो पाया है। गांव की पंचायत ने मजबूरन धर्मशाला में टीन के शेड लगाकर बच्चों को बैठाने का इंतजाम किया। यहां पांच सौ छात्र हैं। ऐसे में कुछ कक्षाएं पेड़ों के नीचे जमीन पर चलाना मजबूरी बन गया है।
विज्ञापन
यह भी हाईकोर्ट को बताया गया कि नियमानुसार स्कूल में प्रिंसिपल समेत 19 शिक्षक होने जरूरी हैं, लेकिन इस स्कूल में केवल 11 शिक्षक हैं। याचिका में मांग की गई है कि स्कूल की इमारत का निर्माण कराने और शिक्षकों के पद भरने के लिए सरकार को निर्देश दिया जाए। जस्टिस एसएस सारों व जस्टिस गुरमीत राम की डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी करके जवाब मांग लिया है।
विज्ञापन
एडवोकेट एचसी अरोड़ा के माध्यम से जनहित याचिका में कहा गया है कि सरकार ने निजी क्षेत्र की भागीदारी से पंजाब में आदर्श स्कूल चलाने के लिए वर्ष 2010 में योजना बनाई थी। इस योजना के तहत गांव की पंचायत ने आदर्श स्कूल के लिए जगह दे दी, लेकिन वर्ष 2012 में निजी क्षेत्र से भागीदारी खत्म हो गई और मामला अधर में लटक गया।
विज्ञापन
उस वक्त से लेकर अभी तक स्कूल की इमारत का निर्माण नहीं हो पाया है। गांव की पंचायत ने मजबूरन धर्मशाला में टीन के शेड लगाकर बच्चों को बैठाने का इंतजाम किया। यहां पांच सौ छात्र हैं। ऐसे में कुछ कक्षाएं पेड़ों के नीचे जमीन पर चलाना मजबूरी बन गया है।
विज्ञापन
यह भी हाईकोर्ट को बताया गया कि नियमानुसार स्कूल में प्रिंसिपल समेत 19 शिक्षक होने जरूरी हैं, लेकिन इस स्कूल में केवल 11 शिक्षक हैं। याचिका में मांग की गई है कि स्कूल की इमारत का निर्माण कराने और शिक्षकों के पद भरने के लिए सरकार को निर्देश दिया जाए। जस्टिस एसएस सारों व जस्टिस गुरमीत राम की डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी करके जवाब मांग लिया है।