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दूध बेचकर पिता ने भरा था फॉर्म, अब बेटी नासा में करेगी कोर्स, रोल मॉडल हैं कल्पना चावला
Sat, 20 Jul 2019 05:32 AM IST
ajay kumar
गगन तलवार, अमर उजाला, करनाल (हरियाणा)
गगन तलवार, अमर उजाला, करनाल (हरियाणा)
Published by: ajay kumar
Updated Sat, 20 Jul 2019 05:32 AM IST
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करनाल की शीतल नासा में करेंगी कोर्स
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा में करनाल जिले के गांव बस्तली निवासी शीतल चौधरी अमेरिका जाएगी। वह नासा में शुरू होने वाले यूनाइटेड स्पेस स्कूल-2019 में हिस्सा लेगी। एफआईएसई की ओर से पांच अगस्त तक लगने वाले इस विशेष स्कूल में विभिन्न देशों के विद्यार्थी हिस्सा लेंगे, जिसमें हरियाणा से शीतल अकेली छात्रा हैं।
गांव में दूध बेचकर परिवार का गुजारा करने वाले पिता ताराचंद ने दैनिक खर्च से बचत करके बेटी शीतल का आवेदन फॉर्म भरा था। इसके बाद तीन स्तरीय टेस्ट प्रक्रिया को पास करके शीतल का चयन यूनाइटेड स्पेस स्कूल के लिए हुआ। शीतल ने बताया कि देश के लिए नासा में काम करना उसका सपना है। यहीं से वह आगे अपने सपने को पूरा करने का रास्ता बनाएगी।
...ताकि पता चले इसरो को कितने बजट की जरूरत
शीतल का कहना है कि 15 दिन तक चलने वाले इस स्कूल में विद्यार्थियों को छह अलग-अलग टीमों में उनकी रुचि के अनुसार बांटा जाएगा। अलग-अलग मिशन पर विद्यार्थी कार्य करेंगे। ट्रेनिंग के दौरान नासा व कई सेंटरों में विद्यार्थियों को विजिट भी कराया जाएगा। वह येलो टीम का हिस्सा बनना चाहेगी, क्योंकि इसमें एरोनॉटिकल साइंस के बजट से संबंधित जानकारियां और ट्रेनिंग दी जाती है।
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गांव में दूध बेचकर परिवार का गुजारा करने वाले पिता ताराचंद ने दैनिक खर्च से बचत करके बेटी शीतल का आवेदन फॉर्म भरा था। इसके बाद तीन स्तरीय टेस्ट प्रक्रिया को पास करके शीतल का चयन यूनाइटेड स्पेस स्कूल के लिए हुआ। शीतल ने बताया कि देश के लिए नासा में काम करना उसका सपना है। यहीं से वह आगे अपने सपने को पूरा करने का रास्ता बनाएगी।
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...ताकि पता चले इसरो को कितने बजट की जरूरत
शीतल का कहना है कि 15 दिन तक चलने वाले इस स्कूल में विद्यार्थियों को छह अलग-अलग टीमों में उनकी रुचि के अनुसार बांटा जाएगा। अलग-अलग मिशन पर विद्यार्थी कार्य करेंगे। ट्रेनिंग के दौरान नासा व कई सेंटरों में विद्यार्थियों को विजिट भी कराया जाएगा। वह येलो टीम का हिस्सा बनना चाहेगी, क्योंकि इसमें एरोनॉटिकल साइंस के बजट से संबंधित जानकारियां और ट्रेनिंग दी जाती है।
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कल्पना की कहानियों ने किया प्रेरित, वही मेरी रोल मॉडल
शीतल चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
शीतल ने बताया कि केंद्र सरकार अभी इसरो के लिए पूरा बजट तय नहीं कर पाती। मैं ट्रेनिंग करके जानूंगी कि इसरो को कितने बजट की जरूरत है, ताकि अलग-अलग मिशनों पर काम ठीक ढंग से हो सके। शीतल करनाल के टैगोर बाल निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 11वीं कक्षा की छात्रा हैं। इसी स्कूल से अंतरिक्ष परी कल्पना चावला ने भी पढ़ाई की। शीतल ने बताया कि कल्पना के स्कूल में होने से और उनके किस्से कहानियों ने उसे प्रेरित किया। कल्पना चावला को वह अपना रोल मॉडल मानती हैं।
शीतल के पिता ताराचंद और मां नीलम बेटी की उपलब्धि पर काफी खुश हैं। ताराचंद बस्तली गांव में दूध इकट्ठा करके कमीशन पर बेचते हैं। इस काम से करीब 15 हजार रुपये की आमदनी से वह परिवार का खर्च चलाते हैं। शीतल और उसके छोटे भाई की पढ़ाई के लिए वे करनाल के सेक्टर छह में किराए के मकान में रहते हैं।
दो हजार खर्च करते हुए डर रही थी: मां
शीतल की मां नीलम ने बताया कि नवंबर 2018 में शीतल ने नासा के इस स्कूल के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। उस समय आवेदन के लिए दो हजार रुपये की फीस के पैसे उनके पास नहीं थे। घर के खर्च में से कटौती करके पैसे जुटाए थे और फॉर्म भरा था। दो हजार रुपये खर्च करने से डर भी रही थी।
शीतल के पिता ताराचंद और मां नीलम बेटी की उपलब्धि पर काफी खुश हैं। ताराचंद बस्तली गांव में दूध इकट्ठा करके कमीशन पर बेचते हैं। इस काम से करीब 15 हजार रुपये की आमदनी से वह परिवार का खर्च चलाते हैं। शीतल और उसके छोटे भाई की पढ़ाई के लिए वे करनाल के सेक्टर छह में किराए के मकान में रहते हैं।
दो हजार खर्च करते हुए डर रही थी: मां
शीतल की मां नीलम ने बताया कि नवंबर 2018 में शीतल ने नासा के इस स्कूल के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। उस समय आवेदन के लिए दो हजार रुपये की फीस के पैसे उनके पास नहीं थे। घर के खर्च में से कटौती करके पैसे जुटाए थे और फॉर्म भरा था। दो हजार रुपये खर्च करने से डर भी रही थी।