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Chandigarh News: 80 साल बाद शरद पूर्णिमा पर महासंयोग, चांदनी में बरसेगा अमृत
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- 25 अक्तूबर को सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का संयोग, शरीर निरोग और मन रहेगा स्वस्थ
- शाम 5:38 बजे चंद्रोदय, रात 7:22 बजे बनेगा सर्वार्थ सिद्धि योग, स्थान दान पूर्णिमा 26 को
पूर्णिमा 25 अक्तूबर को सुबह 11 बजकर 52 मिनट पर शुरू होकर 26 अक्तूबर को सुबह 9 बजकर 42 मिनट पर समाप्त होगी
नीरज कुमार
चंडीगढ़। शरद पूर्णिमा इस वर्ष 25 अक्तूबर को मनाई जाएगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह शुभ संयोग 80 वर्षों के बाद आ रहा है जो सभी के लिए लाभकारी होगा।
सेक्टर 30 के भृगु ज्योतिष केंद्र के पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि पुरुषोत्तम मास और शुक्रास्त के बाद चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होगी। इससे शरीर निरोग और मन स्वस्थ रहेगा। शरद पूर्णिमा पर चंद्रोदय शाम 5 बजकर 38 मिनट पर होगा। चंडीगढ़ में सूर्यास्त भी इसी समय है। सूर्यास्त के बाद अमृत सिद्धि योग प्रारंभ होगा। शाम 7 बजकर 22 मिनट पर सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा। आश्विन पूर्णिमा के चंद्रोदय व्यापिनी में शरद व्रत मनाया जाता है। भगवान कृष्ण इस व्रत के देवता हैं। महाभारत में वर्णित है कि भगवान ने ब्रज में गोपियों के साथ रास रचाया था।
पूर्णिमा का समय और महत्व
पूर्णिमा 25 अक्तूबर को सुबह 11 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी। यह अगले दिन 26 अक्तूबर को सुबह 9 बजकर 42 मिनट पर समाप्त होगी। श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि प्रदोष एवं रात्रि काल दोनों में होने वाली पूर्णिमा में व्रत किया जाता है। शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा की चांदनी में अमृत का निवास होता है।
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खीर से स्वास्थ्य लाभ
चंद्रमा की किरणों से अमृत तत्व और आरोग्यता की प्राप्ति होती है। सेक्टर-40 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी पंडित भगवती प्रसाद रतुड़ी ने बताया। चंद्रमा मन और सफेद वस्तु का कारक है। शास्त्रों के अनुसार गाय के दूध में खीर बनाकर पूरी रात चंद्रमा की रोशनी में रखें। प्रात: काल इसे ग्रहण करने से कफ, खांसी, नजला, जुकाम और दमा जैसी बीमारियों में लाभ मिलता है।
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- शाम 5:38 बजे चंद्रोदय, रात 7:22 बजे बनेगा सर्वार्थ सिद्धि योग, स्थान दान पूर्णिमा 26 को
पूर्णिमा 25 अक्तूबर को सुबह 11 बजकर 52 मिनट पर शुरू होकर 26 अक्तूबर को सुबह 9 बजकर 42 मिनट पर समाप्त होगी
नीरज कुमार
चंडीगढ़। शरद पूर्णिमा इस वर्ष 25 अक्तूबर को मनाई जाएगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह शुभ संयोग 80 वर्षों के बाद आ रहा है जो सभी के लिए लाभकारी होगा।
सेक्टर 30 के भृगु ज्योतिष केंद्र के पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि पुरुषोत्तम मास और शुक्रास्त के बाद चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होगी। इससे शरीर निरोग और मन स्वस्थ रहेगा। शरद पूर्णिमा पर चंद्रोदय शाम 5 बजकर 38 मिनट पर होगा। चंडीगढ़ में सूर्यास्त भी इसी समय है। सूर्यास्त के बाद अमृत सिद्धि योग प्रारंभ होगा। शाम 7 बजकर 22 मिनट पर सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा। आश्विन पूर्णिमा के चंद्रोदय व्यापिनी में शरद व्रत मनाया जाता है। भगवान कृष्ण इस व्रत के देवता हैं। महाभारत में वर्णित है कि भगवान ने ब्रज में गोपियों के साथ रास रचाया था।
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पूर्णिमा का समय और महत्व
पूर्णिमा 25 अक्तूबर को सुबह 11 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी। यह अगले दिन 26 अक्तूबर को सुबह 9 बजकर 42 मिनट पर समाप्त होगी। श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि प्रदोष एवं रात्रि काल दोनों में होने वाली पूर्णिमा में व्रत किया जाता है। शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा की चांदनी में अमृत का निवास होता है।
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खीर से स्वास्थ्य लाभ
चंद्रमा की किरणों से अमृत तत्व और आरोग्यता की प्राप्ति होती है। सेक्टर-40 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी पंडित भगवती प्रसाद रतुड़ी ने बताया। चंद्रमा मन और सफेद वस्तु का कारक है। शास्त्रों के अनुसार गाय के दूध में खीर बनाकर पूरी रात चंद्रमा की रोशनी में रखें। प्रात: काल इसे ग्रहण करने से कफ, खांसी, नजला, जुकाम और दमा जैसी बीमारियों में लाभ मिलता है।