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Chandigarh News: तलवाड़ा में अवैध खैर कटाई और तस्करी का बड़ा खुलासा
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तलवाड़ा (होशियारपुर)। कंडी क्षेत्र के गांव वनकरणपूर स्थित सरकारी रिजर्व फॉरेस्ट से खैर की अवैध कटाई और तस्करी का बड़ा मामला सामने आया है। वन विभाग की टीम ने देर रात कार्रवाई करते हुए खैर के लगभग 70 कटे हुए लट्ठों से लदी एक बोलेरो पिकअप गाड़ी को कब्जे में लिया। इस मामले में वन विभाग ने दो आरोपितों से 4.27 लाख रुपये जुर्माने के रूप में वसूले हैं, जबकि जांच अभी भी जारी है।
फॉरेस्ट रेंज नंबर दो के रेंज ऑफिसर दलजीत कुमार और फॉरेस्ट अफसर सुखदेव राज ने बताया कि तलवाड़ा रेंज के वन गार्ड अश्विनी कुमार (वज्रपट्टू बीट) और अश्विनी कुमार (क्षी पंडायन बीट) गश्त पर थे। इसी दौरान साड़पुर नंबर एक से वनकरणपूर की ओर आ रही संदिग्ध बोलेरो पिकअप को रोकने का प्रयास किया गया। चालक ने तेज रफ्तार से भागने की कोशिश की, लेकिन वन गार्डों ने अपने दोपहिया वाहन को गाड़ी के सामने रखकर उसे रोक लिया।
जांच में सामने आया कि गाड़ी में लदे 70 खैर के लट्ठों की अनुमानित कीमत करीब 4 लाख रुपये थी। पकड़े गए चालक की पहचान रवि कुमार पुत्र राम सरूप, निवासी वरिंगली के रूप में हुई, जबकि दूसरे आरोपित यादविंदर मिन्हास पुत्र जोगिंदर मिन्हास, निवासी गांव पलाहड़ हैं। सूत्रों के अनुसार, कटे गए खैर के पेड़ों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फायर सीजन में प्रतिबंध के बावजूद खैर की कटाई जारी है, जिससे वन विभाग की कार्यप्रणाली और कानून पर सवाल उठ रहे हैं। वन विभाग ने तस्करी रोकने और इस प्रकार की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने का आश्वासन दिया है।
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फॉरेस्ट रेंज नंबर दो के रेंज ऑफिसर दलजीत कुमार और फॉरेस्ट अफसर सुखदेव राज ने बताया कि तलवाड़ा रेंज के वन गार्ड अश्विनी कुमार (वज्रपट्टू बीट) और अश्विनी कुमार (क्षी पंडायन बीट) गश्त पर थे। इसी दौरान साड़पुर नंबर एक से वनकरणपूर की ओर आ रही संदिग्ध बोलेरो पिकअप को रोकने का प्रयास किया गया। चालक ने तेज रफ्तार से भागने की कोशिश की, लेकिन वन गार्डों ने अपने दोपहिया वाहन को गाड़ी के सामने रखकर उसे रोक लिया।
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जांच में सामने आया कि गाड़ी में लदे 70 खैर के लट्ठों की अनुमानित कीमत करीब 4 लाख रुपये थी। पकड़े गए चालक की पहचान रवि कुमार पुत्र राम सरूप, निवासी वरिंगली के रूप में हुई, जबकि दूसरे आरोपित यादविंदर मिन्हास पुत्र जोगिंदर मिन्हास, निवासी गांव पलाहड़ हैं। सूत्रों के अनुसार, कटे गए खैर के पेड़ों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फायर सीजन में प्रतिबंध के बावजूद खैर की कटाई जारी है, जिससे वन विभाग की कार्यप्रणाली और कानून पर सवाल उठ रहे हैं। वन विभाग ने तस्करी रोकने और इस प्रकार की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने का आश्वासन दिया है।
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