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यूक्रेन-रूस युद्ध: कीव रेलवे स्टेशन पर भारतीयों से भेदभाव, पंचकूला की बेटी ने बयां की आपबीती
Tue, 01 Mar 2022 06:05 PM IST
ajay kumar
दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
Published by: ajay kumar
Updated Tue, 01 Mar 2022 06:05 PM IST
सार
पूरे रेलवे स्टेशन पर करीब 300 से 400 भारतीय विद्यार्थी खड़े हैं। जिसका लक साथ दे रहा है, वे निकल रहे हैं, बाकी लोगों को रोका जा रहा है। आज तो भोजन भी नहीं मिल पाया है, यहां दुकानों पर इतनी भीड़ है कि घंटों इंतजार के बाद प्लेटफार्म पर लौट आई कि कहीं ट्रेन न छूट जाए।
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रूस-यूक्रेन युद्ध
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अब आप ही हमें स्वदेश लौटने में मदद कर सकते हैं। यहां कीव रेलवे स्टेशन पर भारतीय बेटियों और बेटों के साथ जमकर भेदभाव किया जा रहा है। यूक्रेन-रूस वार के बीच सैकड़ों मेडिकल विद्यार्थी फंसे हैं। जैसे ही कर्फ्यू हटा सुबह छह बजे अपनी जान बचाने के लिए जैसे तैसे स्थानीय रेलवे स्टेशन पहुंचे, यहां सुबह से शाम हो गई है लेकिन हमें ट्रेन में बैठने तक नहीं दिया गया।
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मां-पापा का घर में रो-रो कर बुरा हाल है, जब से आंखों के सामने तेल का डिपो जलते देखा है, रातों की नींद उड़ गई है। अब आपके पहल पर ही हम सकुशल अपने माता-पिता के पास वतन लौट पाएंगे। ऐसा कहना है यूक्रेन की राजधानी कीव में फंसी पंचकूला की बेटी आंचल शर्मा का। उन्होंने कहा कि सोमवार शाम के सात बजने वाले हैं, रात 10 बजे के बाद कर्फ्यू लग जाएगा। दूर-दूर तक कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। यहां से किसी तरह निकलने में कामयाब हो गए तो थोड़ी राहत मिल जाएगी।
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रेलवे स्टेशन पर हो रहा भेदभाव
आंचल शर्मा ने बताया कि यहां एक कोच में जहां 50 से 70 यूक्रेनियों को जगह दी जा रही है, वहीं महज 5-6 भारतीय विद्यार्थी ही ट्रेन में बैठ पा रहे हैं। पूरे रेलवे स्टेशन पर करीब 300 से 400 भारतीय विद्यार्थी खड़े हैं। जिसका लक साथ दे रहा है, वे निकल रहे हैं, बाकी लोगों को रोका जा रहा है। आज तो भोजन भी नहीं मिल पाया है, यहां दुकानों पर इतनी भीड़ है कि घंटों इंतजार के बाद प्लेटफार्म पर लौट आई कि कहीं ट्रेन न छूट जाए।
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न्यूज और बेटी की परेशानी देख, मां-बाप बोले- मेरी बेटी ला दो मोदी सरकार
आंचल की मां सुमन शर्मा और राजेश कुमार शर्मा का घर में रो-रोकर बुरा हाल है। राजेश तीन दिन से घर से बाहर नहीं निकले हैं, वह पल-पल अपनी बेटी की सूचना मोबाइल से ले रहे हैं। उनकी मां की आंखों से आंसू बंद ही नहीं हो रहे हैं। वे बहुत ज्यादा परेशान हैं। आंचल के माता-पिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी बेटी के साथ यूक्रेन में फंसे अन्य भारतीय विद्यार्थियों को स्वदेश लाने की बार-बार अपील कर रहे हैं।