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Chandigarh News: टैगोर थिएटर में सजी कविता और गजलों की महफिल

Mon, 18 May 2026 01:40 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 18 May 2026 01:40 AM IST
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A gathering of poetry and ghazals was organised at Tagore Theatre.
चंडीगढ़। सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर के मिनी ऑडिटोरियम में रविवार को कलामय की ओर से 10वें राष्ट्रीय कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन हुआ। यह आयोजन चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों और शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. मनमोहन सिंह ने की। मुख्य अतिथि के रूप में पंजाब विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं कवि प्रो. अशोक कुमार उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. विनोद कुमार, अश्वनी पारीक, अमित सनोरिया और डॉ. मोहित कौशल शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन कलामय के अध्यक्ष पवन मुसाफिर ने किया।
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कवि पवन शर्मा मुसाफिर ने ‘शब्द-शब्द शमशीर बनाकर, शायद पंक्ति लिखी होगी, प्रबल स्वरों में कर उच्चारित, गंगा-गति लिखी होगी। भाषा-भवन की भूमि पर, भयमुक्त अभिव्यक्ति दिखी होगी, तब कट-कट कर कागद पर, कविता कोई एक लिखी होगी’ प्रस्तुत कर तालियां बटोरीं।
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यश कांसल ने ‘जहां नरों से शोणित मांगे, जान मांगती है माटी, वहीं स्त्रियों से कई अधिक बलिदान मांगती है माटी’ प्रस्तुत किया। शायर नवीन नीर ने ‘दुख का लम्हा था, कट गया हूं मैं, तेरे रास्ते से हट गया हूं मैं। इससे पहले पुकारता वो मुझे, उससे पहले पलट गया हूं मैं’ पेश किया। डॉ. शिप्रा सागर ने ‘क्रांति का आगाज है मेरी गजल, हां वतन के नाम है मेरी गजल’ प्रस्तुत की।
प्रो. नवीन गुप्ता ने ‘तेरे यहां पर नुक्ता है, मेरे यहां पर बिंदी है, जितनी शीरीं उर्दू है, उतनी मीठी हिंदी है’ पेश कर तालियां बटोरीं।
कवि प्रदीप चतुर्वेदी ने ‘कब तक फीकी मुस्कानों से काम चलाएं, माथे पर हरदम ही चिंता की रेखाएं’ प्रस्तुत कीं। शायर करन सहर ने ‘ठुकरा रहा है वो मेरा प्रपोज, इसलिए अब तक न हो सका हूं मैं इमरोज, इसलिए’ पेश किया। डॉ. अश्वनी शांडिल्य ने ‘मेरे कोप की जद में आकर, फिर भी रखती मेरा मान उसकी नजरें... हे भगवान’ प्रस्तुत किया।

आगरा से आए नारायण सिंह भदौरिया ने ‘अपनी आन-बान नहीं जाने देंगे, हम अपनी पहचान नहीं जाने देंगे’ पेश किया। प्रवीन सुधाकर ने ‘हर कदम पे ये दिल बहक जाए, कैसा मौसम खराब आया है’ प्रस्तुत किया। नंदिनी शर्मा ने ‘रखवालिन हूं मैं भारत रूपी वृंदावन की, कालिया नागों का फन कुचल यमुना निर्मल कर जाऊंगी’ प्रस्तुत किया।
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