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महिलाओं के लिए एक खास खबर, जरूर पढ़ें
अमर उजाला, मोहाली
Updated Sun, 12 Jan 2014 04:45 PM IST
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उम्र ढलने के साथ महिलाओं को आने वाली विभिन्न प्रकार शारीरिक-मानसिक समस्याओं को ध्यान में रखकर फोर्टिस अस्पताल ने एक पहल की है।
अस्पताल में महिलाओं को लिए आधुनिक न्यू-लाइफ क्लीनिक खोला गया है। क्लीनिक की विशेषता यह है कि इसमें हर तरह की समस्याओं के माहिर डॉक्टर रहेंगे। जो कि महिलाओं के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे।
क्लीनिक में गाइनाकॉलोजिस्ट्स, ऑर्थोपेडिशियंस, फिजिशियंस और डायटिशियंस समेत कई माहिर डॉक्टर मौजूद रहेंगे। क्लीनिक के उद्घाटन समारोह में इंडियन मिनोपॉज सोसायटी की प्रधान डॉ. मनिंदर आहूजा पहुंची।
उन्होंने बताया कि ऑस्टेपीनिया और ऑस्टेपोरेसेस के मामले तो आम हैं। 65 साल के बाद यह मामले करीब 100 फीसदी तक पहुंच जाते हैं। इनके अलावा, महिलाएं कार्डियोवास्कुलर डिजीस की ज्यादा शिकार होने लगी हैं।
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मिनोपॉज के बाद तो इनका आंकड़ा बढ़ता जाता है। जब तक महिलाएं अपनी सेहत के प्रति जागरूक नहीं होंगी। तब तक उनका परिवार कैसे स्वस्थ रहेगा।
ऑबस्टेट्रिक्स एंड गाइनोकॉलोजी डिपार्टमेंट में कंसल्टेंट डॉ. रितंबरा भल्ला ने बताया की भारत में मिनोपॉज तक पहुंच चुकी महिलाओं का पुष्ट आंकड़ा तो उपलब्ध नहीं है।
परंतु एक मोटे अनुमान के मुताबिक ऐसी महिलाओं का आंकड़ा 2000 में दर्ज 36 मिलियन से बढ़कर वर्ष 2020 तक 63 मिलियन तक पहुंच जाने का अनुमान है।
उन्होंने बताया कि यह क्लीनिक तेज रफ्तार से मिनोपॉज की दिशा में अग्रसर महिलाओं को जागरूक करने और आने वाले समय में उनके शारीरिक बदलावों के बारे में जानकारी देने की मंशा से खोला गया है।
इस मौके पर पीजीआई में गाइनोकॉलोजी एंड ऑबस्टेट्रिक्स की प्रोफेसर प्रो. नीलम अग्रवाल और सीनियर कंसल्टेंट डा. स्वपना मिश्रा भी मौजूद रहीं।
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अस्पताल में महिलाओं को लिए आधुनिक न्यू-लाइफ क्लीनिक खोला गया है। क्लीनिक की विशेषता यह है कि इसमें हर तरह की समस्याओं के माहिर डॉक्टर रहेंगे। जो कि महिलाओं के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे।
क्लीनिक में गाइनाकॉलोजिस्ट्स, ऑर्थोपेडिशियंस, फिजिशियंस और डायटिशियंस समेत कई माहिर डॉक्टर मौजूद रहेंगे। क्लीनिक के उद्घाटन समारोह में इंडियन मिनोपॉज सोसायटी की प्रधान डॉ. मनिंदर आहूजा पहुंची।
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उन्होंने बताया कि ऑस्टेपीनिया और ऑस्टेपोरेसेस के मामले तो आम हैं। 65 साल के बाद यह मामले करीब 100 फीसदी तक पहुंच जाते हैं। इनके अलावा, महिलाएं कार्डियोवास्कुलर डिजीस की ज्यादा शिकार होने लगी हैं।
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मिनोपॉज के बाद तो इनका आंकड़ा बढ़ता जाता है। जब तक महिलाएं अपनी सेहत के प्रति जागरूक नहीं होंगी। तब तक उनका परिवार कैसे स्वस्थ रहेगा।
ऑबस्टेट्रिक्स एंड गाइनोकॉलोजी डिपार्टमेंट में कंसल्टेंट डॉ. रितंबरा भल्ला ने बताया की भारत में मिनोपॉज तक पहुंच चुकी महिलाओं का पुष्ट आंकड़ा तो उपलब्ध नहीं है।
परंतु एक मोटे अनुमान के मुताबिक ऐसी महिलाओं का आंकड़ा 2000 में दर्ज 36 मिलियन से बढ़कर वर्ष 2020 तक 63 मिलियन तक पहुंच जाने का अनुमान है।
उन्होंने बताया कि यह क्लीनिक तेज रफ्तार से मिनोपॉज की दिशा में अग्रसर महिलाओं को जागरूक करने और आने वाले समय में उनके शारीरिक बदलावों के बारे में जानकारी देने की मंशा से खोला गया है।
इस मौके पर पीजीआई में गाइनोकॉलोजी एंड ऑबस्टेट्रिक्स की प्रोफेसर प्रो. नीलम अग्रवाल और सीनियर कंसल्टेंट डा. स्वपना मिश्रा भी मौजूद रहीं।