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तीन घंटे में 97 एमएम बारिश से टूटा चार साल का रिकॉर्ड
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चंडीगढ़। मूसलाधार बारिश से बुधवार सुबह फिर मुसीबत खड़ी हो गई। सुबह पांच से साढ़े आठ बजे तक 97 एमएम पानी गिरा। चार साल में 24 घंटे में हुई यह सबसे ज्यादा बारिश है। इससे दक्षिण के सेक्टरों में सभी चौकों पर पानी भर गया और पूरा इलाका स्वीमिंग पूल की तरह नजर आने लगा। उत्तर के सेक्टरों में हल्की बारिश थी, इस कारण यहां ज्यादा समस्या नहीं आई।
जलभराव से वाहन चालकों को खासी मुसीबत झेलनी पड़ी। कुछ लोगों की गाड़ियां पानी में बंद हो गईं तो कुछ गड्ढों में गिर पड़े। इससे पहले 28 जुलाई 2017 को एक दिन में 120.8 एमएम बारिश हुई थी। वहीं, 7 जुलाई 2012 को 118.5 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई थी। बुधवार को पिछले 10 साल में तीसरी बार सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई। चंडीगढ़ मौसम केंद्र के निदेशक मनमोहन सिंह ने बताया कि मानसून फिर से सक्रिय हो गया है। बुधवार को सुबह लगातार साढ़े तीन घंटे पानी बरसा। आने वाले दिनों में भी बारिश जारी रहेगी। एक जून से अब तक 251.1 एमएम बारिश हुई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून का आगाज तो अच्छा है लेकिन नगर निगम की ओर से पानी की निकासी के इंतजाम ठीक से न किए जाने के कारण लोग मुसीबत झेल रहे हैं। इससे पहले मानसून की एंट्री के दौरान भी बारिश के चलते पूरे शहर में जलभराव से लोगों को मुसीबत उठानी पड़ी थी। निगम सदन की बैठक में पार्षदों ने कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया था। इस पर आयुक्त ने बताया था कि दक्षिण के सेक्टरों में बारिश के पानी निकासी की क्षमता 22 एमएम और उत्तर के सेक्टरों में 15 एमएम है। इससे अधिक पानी सड़कों पर इकट्ठा होने से निकासी में समय लग रहा है।
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सेक्टर-40 में सबसे ज्यादा समस्या
सुबह बारिश के दौरान सेक्टर-40/41चौक, 34, 36/37 चौक, हल्लोमाजरा और रामदरबार में सबसे ज्यादा समस्या हुई। सेक्टर-40 सी में लोग अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए पीठ पर बैठाकर ले जा रहे थे। वहीं, कुछ लोग जलभराव के चलते बच्चों को वापस घर ले गए। कुछ लोगों की गाड़ी बंद हो गई तो वह पैदल ही उसे खींचकर ले गए। दफ्तर जा रहे लोगों को भी काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा।
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श्मशान घाट में भरा पानी, शव जलाने से रोका
सेक्टर-25 के श्मशान घाट में भी पानी घुस गया। दाह संस्कार वाले स्थान पर जलभराव की जानकारी लोगों ने निगम को दी। निगम के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर पानी की निकासी की व्यवस्था की। इस दौरान दाह संस्कार के लिए शव लेकर पहुंचे लोगों को कुछ देर के लिए रोकना पड़ा। पानी कम होने पर शवों का दाह संस्कार कराया गया।
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हर साल डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होते हैं रोड गलियों की सफाई पर
मानसून सीजन में जलभराव से बचाव के लिए नगर निगम हर साल अप्रैल से सितंबर तक रोड गलियों की सफाई कराता है। इस पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। बावजूद इसके जलभराव की समस्या बनी रहती है। कारण यह है कि बारिश का पानी निकालने के लिए हर साल पाइप लाइन बदलने का आश्वासन तो मिलता है लेकिन बारिश का मौसम निकलते ही वह फाइलों में दबा रह जाता है। दूसरी ओर लॉयंस कंपनी के क्षेत्र में भी सफाई व्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है। सीआरपीएफ कैंपस के सामने वाली सड़क पर सफाई की जिम्मेदारी लॉयंस कंपनी के पास है लेकिन वहां रोड गली के आसपास और रोड बर्म के साथ घास जमी हुई है। यही कारण है पानी सड़क पर आ जाता है।
दो डिग्री गिरा पारा, आज भी बारिश के आसार
बारिश की वजह से शहर में अधिकतम तापमान 33.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो औसत से दो डिग्री कम है। न्यूनतम तापमान 24.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य जितना ही है। इसके अलावा पंचकूला में अधिकतम तापमान 36.7 डिग्री सेल्सियस और मोहाली में 36.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। विभाग के अनुसार बुधवार को चंडीगढ़ का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहने का पूर्वानुमान है। शहर में रुक-रुक कर बारिश भी हो सकती है।
पिछले 10 साल में जुलाई माह में सबसे ज्यादा कब-कब हुई बारिश
वर्ष दिन वर्षा (एमएम)
2022 6 97
2021 13 21.5
2020 8 77.4
2019 10 50.5
2018 3 64.8
2017 28 120.8
2016 23 53.3
2015 6 76.4
2014 19 40.4
2013 14 43.5
2012 7 118.5
अगले पांच दिन का मौसम (डिग्री सेल्सियस)
दिन - अधिकतम तापमान - न्यूनतम
सात जुलाई - 33 - 25
आठ जुलाई - 34 - 26
नौ जुलाई - 30 - 24
10 जुलाई - 28 - 22
11 जुलाई - 32 - 22
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जलभराव से वाहन चालकों को खासी मुसीबत झेलनी पड़ी। कुछ लोगों की गाड़ियां पानी में बंद हो गईं तो कुछ गड्ढों में गिर पड़े। इससे पहले 28 जुलाई 2017 को एक दिन में 120.8 एमएम बारिश हुई थी। वहीं, 7 जुलाई 2012 को 118.5 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई थी। बुधवार को पिछले 10 साल में तीसरी बार सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई। चंडीगढ़ मौसम केंद्र के निदेशक मनमोहन सिंह ने बताया कि मानसून फिर से सक्रिय हो गया है। बुधवार को सुबह लगातार साढ़े तीन घंटे पानी बरसा। आने वाले दिनों में भी बारिश जारी रहेगी। एक जून से अब तक 251.1 एमएम बारिश हुई है।
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मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून का आगाज तो अच्छा है लेकिन नगर निगम की ओर से पानी की निकासी के इंतजाम ठीक से न किए जाने के कारण लोग मुसीबत झेल रहे हैं। इससे पहले मानसून की एंट्री के दौरान भी बारिश के चलते पूरे शहर में जलभराव से लोगों को मुसीबत उठानी पड़ी थी। निगम सदन की बैठक में पार्षदों ने कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया था। इस पर आयुक्त ने बताया था कि दक्षिण के सेक्टरों में बारिश के पानी निकासी की क्षमता 22 एमएम और उत्तर के सेक्टरों में 15 एमएम है। इससे अधिक पानी सड़कों पर इकट्ठा होने से निकासी में समय लग रहा है।
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सेक्टर-40 में सबसे ज्यादा समस्या
सुबह बारिश के दौरान सेक्टर-40/41चौक, 34, 36/37 चौक, हल्लोमाजरा और रामदरबार में सबसे ज्यादा समस्या हुई। सेक्टर-40 सी में लोग अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए पीठ पर बैठाकर ले जा रहे थे। वहीं, कुछ लोग जलभराव के चलते बच्चों को वापस घर ले गए। कुछ लोगों की गाड़ी बंद हो गई तो वह पैदल ही उसे खींचकर ले गए। दफ्तर जा रहे लोगों को भी काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा।
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श्मशान घाट में भरा पानी, शव जलाने से रोका
सेक्टर-25 के श्मशान घाट में भी पानी घुस गया। दाह संस्कार वाले स्थान पर जलभराव की जानकारी लोगों ने निगम को दी। निगम के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर पानी की निकासी की व्यवस्था की। इस दौरान दाह संस्कार के लिए शव लेकर पहुंचे लोगों को कुछ देर के लिए रोकना पड़ा। पानी कम होने पर शवों का दाह संस्कार कराया गया।
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हर साल डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होते हैं रोड गलियों की सफाई पर
मानसून सीजन में जलभराव से बचाव के लिए नगर निगम हर साल अप्रैल से सितंबर तक रोड गलियों की सफाई कराता है। इस पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। बावजूद इसके जलभराव की समस्या बनी रहती है। कारण यह है कि बारिश का पानी निकालने के लिए हर साल पाइप लाइन बदलने का आश्वासन तो मिलता है लेकिन बारिश का मौसम निकलते ही वह फाइलों में दबा रह जाता है। दूसरी ओर लॉयंस कंपनी के क्षेत्र में भी सफाई व्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है। सीआरपीएफ कैंपस के सामने वाली सड़क पर सफाई की जिम्मेदारी लॉयंस कंपनी के पास है लेकिन वहां रोड गली के आसपास और रोड बर्म के साथ घास जमी हुई है। यही कारण है पानी सड़क पर आ जाता है।
दो डिग्री गिरा पारा, आज भी बारिश के आसार
बारिश की वजह से शहर में अधिकतम तापमान 33.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो औसत से दो डिग्री कम है। न्यूनतम तापमान 24.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य जितना ही है। इसके अलावा पंचकूला में अधिकतम तापमान 36.7 डिग्री सेल्सियस और मोहाली में 36.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। विभाग के अनुसार बुधवार को चंडीगढ़ का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहने का पूर्वानुमान है। शहर में रुक-रुक कर बारिश भी हो सकती है।
पिछले 10 साल में जुलाई माह में सबसे ज्यादा कब-कब हुई बारिश
वर्ष दिन वर्षा (एमएम)
2022 6 97
2021 13 21.5
2020 8 77.4
2019 10 50.5
2018 3 64.8
2017 28 120.8
2016 23 53.3
2015 6 76.4
2014 19 40.4
2013 14 43.5
2012 7 118.5
अगले पांच दिन का मौसम (डिग्री सेल्सियस)
दिन - अधिकतम तापमान - न्यूनतम
सात जुलाई - 33 - 25
आठ जुलाई - 34 - 26
नौ जुलाई - 30 - 24
10 जुलाई - 28 - 22
11 जुलाई - 32 - 22