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Chandigarh: दो साल में 97 क्लर्क-स्टेनो ने छोड़ी नौकरी, आरोप-मदद की बजाय अधिकारी दे रहे इस्तीफे की सलाह
Mon, 16 Oct 2023 03:29 PM IST
निवेदिता वर्मा
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 16 Oct 2023 03:29 PM IST
सार
कर्मचारियों में निराशा का माहौल का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि चंडीगढ़ में 2019 क्लर्क-स्टेनो की भर्ती का टॉपर भी नौकरी छोड़ चुका है। नौकरी छोड़ने वालों में सबसे ज्यादा क्लर्क यूटी प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग, यूटी सचिवालय, शिक्षा, आबकारी व कराधान, शिक्षा, अर्बन एंड टाउन प्लैनिंग, स्वास्थ्य, एनसीसी समेत अन्य हैं।
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इस्तीफा
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विस्तार
चंडीगढ़ यूटी प्रशासन में कर्मचारियों की कोई सुनवाई नहीं है। तंग आकर दो साल में करीब 97 कर्मचारी नौकरी छोड़ चुके हैं। ये आंकड़े सिर्फ वर्ष 2019 में हुई क्लर्क और स्टेनो की भर्ती के कर्मचारियों की है। अन्य स्तर के कर्मियों को जोड़ने पर संख्या काफी ज्यादा हो जाएगी। 2021 में नियुक्ति पत्र मिलने के बाद से यह कर्मचारी मांगों को लेकर जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि अधिकारी मदद करने की बजाय उन्हें नौकरी छोड़ देने की सलाह दे रहे हैं।
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विभिन्न विभागों में क्लर्क-स्टेनो काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 2019 की भर्ती में काफी पढ़े-लिखे युवा चुन कर आए। उनकी काबिलियत के देखते हुए जो सीट उनकी नहीं है, उसका भी काम लिया जा रहा है लेकिन कम ग्रेड पे को लेकर सभी बेहद परेशान हैं। वो मांग कर रहे हैं कि उन्हें केंद्र सरकार की तर्ज पर उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार ग्रेड पे दिया जाए जो न्यूनतम 2400 है।
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प्रशासन के अधिकारी जिद पर अड़े हैं और उन्हें 1900 जीपी दे रहे हैं। यह उन्हें मिलता है जिनकी भर्ती 12वीं के आधार पर हुई है। लेकिन क्लर्क-स्टेनो की भर्ती ग्रेजुएशन के साथ कंप्यूटर कोर्स के आधार पर हुई है। ऐसे में उन्हें 12वीं का ग्रेड पे कैसे दिया जा सकता है। ये कर्मी अपने भविष्य की चिंता में डूबे हुए हैं। दो साल से कभी किसी अधिकारी तो कभी किसी अधिकारी के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने ज्ञापन सौंपा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। तंग आकर अब तक करीब 97 कर्मी नौकरी छोड़ चुके हैं और कई अन्य भी मौके की तलाश में हैं। बता दें कि अधिकतर कर्मियों ने नौकरी 2023 में छोड़ी है।
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विभिन्न विभागों में क्लर्क-स्टेनो काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 2019 की भर्ती में काफी पढ़े-लिखे युवा चुन कर आए। उनकी काबिलियत के देखते हुए जो सीट उनकी नहीं है, उसका भी काम लिया जा रहा है लेकिन कम ग्रेड पे को लेकर सभी बेहद परेशान हैं। वो मांग कर रहे हैं कि उन्हें केंद्र सरकार की तर्ज पर उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार ग्रेड पे दिया जाए जो न्यूनतम 2400 है।
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प्रशासन के अधिकारी जिद पर अड़े हैं और उन्हें 1900 जीपी दे रहे हैं। यह उन्हें मिलता है जिनकी भर्ती 12वीं के आधार पर हुई है। लेकिन क्लर्क-स्टेनो की भर्ती ग्रेजुएशन के साथ कंप्यूटर कोर्स के आधार पर हुई है। ऐसे में उन्हें 12वीं का ग्रेड पे कैसे दिया जा सकता है। ये कर्मी अपने भविष्य की चिंता में डूबे हुए हैं। दो साल से कभी किसी अधिकारी तो कभी किसी अधिकारी के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने ज्ञापन सौंपा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। तंग आकर अब तक करीब 97 कर्मी नौकरी छोड़ चुके हैं और कई अन्य भी मौके की तलाश में हैं। बता दें कि अधिकतर कर्मियों ने नौकरी 2023 में छोड़ी है।
2019 भर्ती का टॉपर भी छोड़ चुका नौकरी
कर्मचारियों में निराशा का माहौल का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि चंडीगढ़ में 2019 क्लर्क-स्टेनो की भर्ती का टॉपर भी नौकरी छोड़ चुका है। यही नहीं, दूसरा और तीसरा टॉपर भी इस्तीफा देकर जा चुका है। नौकरी छोड़ने वालों में सबसे ज्यादा क्लर्क यूटी प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग, यूटी सचिवालय, शिक्षा, आबकारी व कराधान, शिक्षा, अर्बन एंड टाउन प्लैनिंग, स्वास्थ्य, एनसीसी समेत अन्य हैं। इन्हीं विभागों से करीब 14 स्टेनो टाइपिस्ट भी अधिकारियों के रवैये से परेशान होकर नौकरी छोड़ चुके हैं। नगर निगम के विभिन्न विंगों में लगे करीब सात क्लर्कों ने भी इस्तीफा दिया है।
न ढंग का वेतन मिला, न प्रमोशन
नौकरी छोड़ चुके कर्मियों ने बताया कि वो पहले से ही अच्छे वेतन पर कार्य कर रहे थे लेकिन चंडीगढ़ में 3200 जीपी की भर्ती की नोटिफिकेशन देखकर फॉर्म भर दिया था। भर्ती की नियुक्ति 2021 में हुई, तब कोरोना का कहर कम हुआ था। काफी देर हो चुकी थी, इसलिए नौकरी की काफी जरूरत थी। चंडीगढ़ में बेहतर जीवन जीने का ख्वाब लेकर आए थे, लेकिन पहले नियुक्ति के समय कम पैसे दिए गए। उम्मीद थी कि केंद्रीय सेवा नियम के लागू होने के बाद उन्हें भी केंद्र के सभी लाभ मिलेंगे, लेकिन उसमें भी धोखा मिला। न ढंग का वेतन था, न प्रमोशन इसलिए नौकरी छोड़ना ही एकमात्र विकल्प रह गया।
केस-1
सीटीयू में बतौर क्लर्क काम कर चुकीं सिमरन ने फरवरी 2023 में नौकरी छोड़ दी। चंडीगढ़ में काम करने के लिए उन्होंने 3200 का ग्रेड पे छोड़ा था लेकिन यहां 1900 जीपी मिला। अब वो पंजाब के एक जिला अदालत में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि वह अगर चंडीगढ़ 3200 का ग्रेड पे देगा तो वह अब भी वापस आने को तैयार हैं।
केस-2
यूटी सचिवालय में बतौर क्लर्क काम कर चुके अजय ने मई 2023 में नौकरी छोड़ थी। उन्हें उम्मीद थी कि केंद्रीय सेवा नियम लागू होने के बाद ग्रेड पे बढ़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नौकरी छोड़ना ही एकमात्र रास्ता नजर आया। अब वह एफसीआई में कार्यरत हैं।
केस-3
सीटीयू में बतौर क्लर्क काम कर चुके श्याम ने जनवरी 2022 में नौकरी छोड़ दी। उनका हाईकोर्ट में क्लर्क का भी पेपर क्लियर हो गया था। टाइपिंग टेस्ट भी पास कर चुके थे लेकिन प्रशासन चुना। यहां उम्मीद मुताबिक ग्रेड पे नहीं मिला जिसके बाद नौकरी छोड़नी पड़ी।
कर्मचारियों में निराशा की बड़ी वजहें
1. 3200 जीपी की भर्ती निकाली, लेकिन 1900 जीपी पर नियुक्ति मिली। 2019 की भर्ती 2021 में पूरी हुई, इसलिए कर्मियों को कम पैसों में मजबूरन नौकरी ज्वाइन करनी पड़ी।
2. उम्मीद थी कि केंद्रीय सेवा नियम लागू होने के बाद उन्हें भी केंद्र की तरह ही कम से कम 2400 जीपी मिलेगा लेकिन अधिकारियों ने उन्हें 1900 जीपी पर ही रखा।
3. पहले चार साल में प्रमोशन मिलनी थी, लेकिन अब 18 साल बाद प्रमोशन मिलेगी। ये सोचकर ही कर्मचारी निराश हो गए।
4. कर्मचारियों की समस्या सुनने के लिए ग्रीवांस कमेटी बनाई, लेकिन पहले कई महीने तक बैठक ही नहीं हुई और जब हुई तो क्लर्क-स्टेनो का मुद्दा भी बैठक में नहीं लाए।
5. दो साल से कर्मचारी अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन कोई हाईकोर्ट जाने की सलाह दे रहा है तो कोई नौकरी छोड़ देने की। खुद से फैसला लेने को कोई तैयार नहीं है।
क्लर्क-स्टेनो के ग्रेड के मामले को लेकर कर्मचारी और अरुण सूद मुझसे मिले थे। मैंने उनके ज्ञापन को वित्त विभाग को भेजा है। ऐसे मामलों को देखने के लिए एक अनॉमली कमेटी है, जो ज्ञापन के बिंदुओं की जांच कर रही है। - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक
कर्मचारियों में निराशा का माहौल का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि चंडीगढ़ में 2019 क्लर्क-स्टेनो की भर्ती का टॉपर भी नौकरी छोड़ चुका है। यही नहीं, दूसरा और तीसरा टॉपर भी इस्तीफा देकर जा चुका है। नौकरी छोड़ने वालों में सबसे ज्यादा क्लर्क यूटी प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग, यूटी सचिवालय, शिक्षा, आबकारी व कराधान, शिक्षा, अर्बन एंड टाउन प्लैनिंग, स्वास्थ्य, एनसीसी समेत अन्य हैं। इन्हीं विभागों से करीब 14 स्टेनो टाइपिस्ट भी अधिकारियों के रवैये से परेशान होकर नौकरी छोड़ चुके हैं। नगर निगम के विभिन्न विंगों में लगे करीब सात क्लर्कों ने भी इस्तीफा दिया है।
न ढंग का वेतन मिला, न प्रमोशन
नौकरी छोड़ चुके कर्मियों ने बताया कि वो पहले से ही अच्छे वेतन पर कार्य कर रहे थे लेकिन चंडीगढ़ में 3200 जीपी की भर्ती की नोटिफिकेशन देखकर फॉर्म भर दिया था। भर्ती की नियुक्ति 2021 में हुई, तब कोरोना का कहर कम हुआ था। काफी देर हो चुकी थी, इसलिए नौकरी की काफी जरूरत थी। चंडीगढ़ में बेहतर जीवन जीने का ख्वाब लेकर आए थे, लेकिन पहले नियुक्ति के समय कम पैसे दिए गए। उम्मीद थी कि केंद्रीय सेवा नियम के लागू होने के बाद उन्हें भी केंद्र के सभी लाभ मिलेंगे, लेकिन उसमें भी धोखा मिला। न ढंग का वेतन था, न प्रमोशन इसलिए नौकरी छोड़ना ही एकमात्र विकल्प रह गया।
केस-1
सीटीयू में बतौर क्लर्क काम कर चुकीं सिमरन ने फरवरी 2023 में नौकरी छोड़ दी। चंडीगढ़ में काम करने के लिए उन्होंने 3200 का ग्रेड पे छोड़ा था लेकिन यहां 1900 जीपी मिला। अब वो पंजाब के एक जिला अदालत में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि वह अगर चंडीगढ़ 3200 का ग्रेड पे देगा तो वह अब भी वापस आने को तैयार हैं।
केस-2
यूटी सचिवालय में बतौर क्लर्क काम कर चुके अजय ने मई 2023 में नौकरी छोड़ थी। उन्हें उम्मीद थी कि केंद्रीय सेवा नियम लागू होने के बाद ग्रेड पे बढ़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नौकरी छोड़ना ही एकमात्र रास्ता नजर आया। अब वह एफसीआई में कार्यरत हैं।
केस-3
सीटीयू में बतौर क्लर्क काम कर चुके श्याम ने जनवरी 2022 में नौकरी छोड़ दी। उनका हाईकोर्ट में क्लर्क का भी पेपर क्लियर हो गया था। टाइपिंग टेस्ट भी पास कर चुके थे लेकिन प्रशासन चुना। यहां उम्मीद मुताबिक ग्रेड पे नहीं मिला जिसके बाद नौकरी छोड़नी पड़ी।
कर्मचारियों में निराशा की बड़ी वजहें
1. 3200 जीपी की भर्ती निकाली, लेकिन 1900 जीपी पर नियुक्ति मिली। 2019 की भर्ती 2021 में पूरी हुई, इसलिए कर्मियों को कम पैसों में मजबूरन नौकरी ज्वाइन करनी पड़ी।
2. उम्मीद थी कि केंद्रीय सेवा नियम लागू होने के बाद उन्हें भी केंद्र की तरह ही कम से कम 2400 जीपी मिलेगा लेकिन अधिकारियों ने उन्हें 1900 जीपी पर ही रखा।
3. पहले चार साल में प्रमोशन मिलनी थी, लेकिन अब 18 साल बाद प्रमोशन मिलेगी। ये सोचकर ही कर्मचारी निराश हो गए।
4. कर्मचारियों की समस्या सुनने के लिए ग्रीवांस कमेटी बनाई, लेकिन पहले कई महीने तक बैठक ही नहीं हुई और जब हुई तो क्लर्क-स्टेनो का मुद्दा भी बैठक में नहीं लाए।
5. दो साल से कर्मचारी अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन कोई हाईकोर्ट जाने की सलाह दे रहा है तो कोई नौकरी छोड़ देने की। खुद से फैसला लेने को कोई तैयार नहीं है।
क्लर्क-स्टेनो के ग्रेड के मामले को लेकर कर्मचारी और अरुण सूद मुझसे मिले थे। मैंने उनके ज्ञापन को वित्त विभाग को भेजा है। ऐसे मामलों को देखने के लिए एक अनॉमली कमेटी है, जो ज्ञापन के बिंदुओं की जांच कर रही है। - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक