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Chandigarh News: पेक के 824 विद्यार्थियों को डिग्री, 28 को मेडल से सम्मान
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चंडीगढ़। सपने पूरे करने की कोई उम्र नहीं होती और मुश्किलें भी हौसलों को रोक नहीं सकतीं। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) के दीक्षांत समारोह में शनिवार को 824 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 28 विद्यार्थियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। 12 गोल्ड मेडल, नौ सिल्वर मेडल और सात विशेष पुरस्कारों से सम्मानित विद्यार्थियों की उपलब्धियों के बीच संघर्ष की कई प्रेरक कहानियां भी सामने आईं। किसी ने माता-पिता को खोने के बाद पढ़ाई जारी रखी, तो किसी ने नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच 43 साल की उम्र में पीएचडी पूरी की। एक विद्यार्थी ने शारीरिक चुनौतियों के बावजूद दोस्तों के सहयोग से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। वहीं, किसी ने पढ़ाने का सपना पूरा करने के लिए नौकरी छोड़ दी। समारोह में पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि रहे।
फरवरी 2025 में इंटर्नशिप के दौरान माता-पिता के सड़क हादसे की खबर मिली। सात दिन बाद पिता का निधन हो गया और मां दो महीने आईसीयू में रहीं। परिवार, दोस्तों और शिक्षकों ने साथ दिया, जिससे डिग्री पूरी कर सका। -विश्वजीत राजावथ, बीटेक सिविल इंजीनियरिंग
कोट
वर्ष 2008 से डीआरडीओ में नौकरी कर रहा हूं। सप्ताह में पांच दिन काम और दो दिन पढ़ाई के लिए निकालता था। लगातार मेहनत से 43 साल की उम्र में पीएचडी पूरी की। -तिरुपति चंद्र शर्मा, पीएचडी, अप्लाइड एनर्जेटिक मैटेरियल
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मुझे शुरू से पढ़ाने का शौक था। इसके लिए पीएचडी जरूरी थी इसलिए चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की टीचिंग नौकरी छोड़कर नियमित पढ़ाई शुरू की। यह डिग्री कोविड में दिवंगत पिता को समर्पित करता हूं। -डॉ. क्षितिज जस्सल, पीएचडी
जन्म से स्पाइना बिफिडा होने के कारण चलने-फिरने में परेशानी होती है। कॉलेज में रैंप और लिफ्ट की कमी से मुश्किलें आईं, लेकिन पांच दोस्तों ने हर कदम पर मदद की। अब उद्यमी बनने का सपना है। -सौरव किसपोटा, बीटेक एयरोस्पेस
मां ने हमेशा सहयोग दिया। मैं अंतरराष्ट्रीय इनलाइन हॉकी खिलाड़ी हूं और एक बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टीम की कप्तानी भी की। वर्ष 2015 में स्केट्स पर सबसे बड़े डांस रूटीन के लिए गिनीज बुक में नाम दर्ज हुआ। -नानकी, बीटेक कंप्यूटर साइंस
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फरवरी 2025 में इंटर्नशिप के दौरान माता-पिता के सड़क हादसे की खबर मिली। सात दिन बाद पिता का निधन हो गया और मां दो महीने आईसीयू में रहीं। परिवार, दोस्तों और शिक्षकों ने साथ दिया, जिससे डिग्री पूरी कर सका। -विश्वजीत राजावथ, बीटेक सिविल इंजीनियरिंग
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वर्ष 2008 से डीआरडीओ में नौकरी कर रहा हूं। सप्ताह में पांच दिन काम और दो दिन पढ़ाई के लिए निकालता था। लगातार मेहनत से 43 साल की उम्र में पीएचडी पूरी की। -तिरुपति चंद्र शर्मा, पीएचडी, अप्लाइड एनर्जेटिक मैटेरियल
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मुझे शुरू से पढ़ाने का शौक था। इसके लिए पीएचडी जरूरी थी इसलिए चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की टीचिंग नौकरी छोड़कर नियमित पढ़ाई शुरू की। यह डिग्री कोविड में दिवंगत पिता को समर्पित करता हूं। -डॉ. क्षितिज जस्सल, पीएचडी
जन्म से स्पाइना बिफिडा होने के कारण चलने-फिरने में परेशानी होती है। कॉलेज में रैंप और लिफ्ट की कमी से मुश्किलें आईं, लेकिन पांच दोस्तों ने हर कदम पर मदद की। अब उद्यमी बनने का सपना है। -सौरव किसपोटा, बीटेक एयरोस्पेस
मां ने हमेशा सहयोग दिया। मैं अंतरराष्ट्रीय इनलाइन हॉकी खिलाड़ी हूं और एक बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टीम की कप्तानी भी की। वर्ष 2015 में स्केट्स पर सबसे बड़े डांस रूटीन के लिए गिनीज बुक में नाम दर्ज हुआ। -नानकी, बीटेक कंप्यूटर साइंस