चंडीगढ़: सौर ऊर्जा प्लांट से 2023 तक 75 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य, इन स्थानों पर लगेंगे सौर पैनल
चंडीगढ़ में इस समय करीब 45 मेगावाट बिजली की उत्पादन सौर ऊर्जा से किया जा रहा है। 2022 तक 69 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था लेकिन अब 2023 तक यह लक्ष्य 75 मेगावाट निर्धारित किया गया है।
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चंडीगढ़ को मॉडल सोलर सिटी बनाया जाना है। वर्ष 2022 तक 69 मेगावाट सोलर एनर्जी पैदा करने के लक्ष्य को बदलकर अब वर्ष 2023 तक 75 मेगावाट का लक्ष्य तय किया गया है, जो वर्तमान खपत (220 मेगावाट) का करीब 34 प्रतिशत है। फिलहाल शहर में विभिन्न सोलर प्लांट से करीब 45 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है।
सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए यूटी प्रशासन ने 500 वर्ग गज या इससे अधिक क्षेत्रफल के सभी घरों और सरकारी इमारतों पर सोलर प्रोजेक्ट लगाना अनिवार्य किया हुआ है। चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी (क्रेस्ट) के सीईओ देबेंद्र दलाई ने बताया कि शहर की ज्यादातर सरकारी इमारतों पर सोलर प्लांट लगा दिए गए हैं। सभी सरकारी स्कूलों की छत पर भी प्लांट लगा दिए गए हैं। स्कूलों में अब खाली जमीन पर प्लांट लगाए जा रहे हैं। शिक्षा विभाग का बिजली का बिल शून्य तो हो ही चुका है, वह बिजली ग्रिड को बेच भी रहे हैं। इससे कमाई भी हो रही है।
दलाई ने बताया कि अब सभी पुलिस थानों, नगर निगम की पानी की टंकियों, कम्युनिटी सेंटर और स्ट्रीट लाइटों पर भी सौर पैनल लगाए जा रहे हैं। विभाग ने सरकारी व निजी संस्थानों के भवनों पर लगे सोलर पैनल से हर साल 20 लाख तक की बिजली की बचत की है। कार्बन फुट प्रिंट को भी बढ़ने से रोका है। हालांकि उन्होंने माना कि ज्यादातर निजी घरों पर प्लांट अभी भी नहीं लगाए गए हैं। इसके लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
रेस्को मॉडल को लागू करने से पहले होगी जन सुनवाई
बिना खर्च घर की छत पर सोलर प्लांट लगाने के लिए पर्यावरण विभाग अक्षय ऊर्जा सेवा कंपनी (रेस्को) मॉडल लेकर आया था लेकिन अभी तक इसे शहर में लागू नहीं किया गया है, क्योंकि संयुक्त विद्युत नियामक आयोग (जेईआरसी) शहर में पहले एक जन सुनवाई करना चाहता है। कोरोना की वजह से जन सुनवाई का आयोजन अब तक नहीं हो पाया है।
विभाग ने जेईआरसी के कहने पर रेस्को मॉडल को लेकर एक सर्वे किया था। इसमें करीब 550 लोगों ने सौर ऊर्जा प्लांट लगवाने की इच्छा जताई है। इस मॉडल के तहत बिना किसी खर्च के लोगों के घर की छत पर कंपनी की तरफ से सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इससे घर में रहने वाले उस बिजली को इस्तेमाल भी कर सकेंगे और उसे बेच कर कमाई भी कर सकेंगे। यह प्रोजेक्ट उन लोगों के लिए है, जो सोलर प्रोजेक्ट तो लगवाना चाहते हैं लेकिन निवेश नहीं करना चाहते।
यह है रेस्को मॉडल की खासियत
- सोलर पैनल लगाने का सारा खर्चा निजी कंपनी उठाएगी
- 15 साल तक पैनल की देखरेख का जिम्मा भी कंपनी का होगा
- भवन मालिक को मंजूरी देनी होगी, सरकार कंपनी को सब्सिडी देगी
- भवन मालिक को बिजली विभाग से भी कम दर यानी करीब 3.44 रुपये प्रति यूनिट बिजली मिलेगी
- अतिरिक्त बिजली को विभाग को सौंपा जा सकेगा, जेईआरसी के तहत कंपनी भवन मालिक को पैसे देगी
- 15 साल के बाद सोलर प्लांट भवन मालिक का हो जाएगा
वर्ष 2023 तक सौर ऊर्जा से 75 एमडब्ल्यू बिजली पैदा करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसको लेकर विभाग सरकारी इमारतों के साथ निजी इमारतों पर भी सौर पैनल लगा रहा है। शिक्षा विभाग का बिल शून्य हो चुका है। - देबेंद्र दलाई, सीईओ, क्रेस्ट।