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72 फीसदी बच्चे एनीमिया का शिकार हैं यहां
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 06 Feb 2014 06:54 PM IST
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हरियाणा राज्य में पांच साल से कम उम्र के 46 फीसदी बच्चों में पोषक तत्वों की कमी है। छह माह से पांच साल तक के 72 फीसदी बच्चे एनीमिक हैं।
इसके अलावा प्रदेश में बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों में भी एनीमिया है। प्रदेश में बच्चों और लोगों की बिगड़ रही सेहत को सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने खान पान को मजबूत करने का बीड़ा उठाया है।
लोगों को अब आटे में विटामिन बी-12, आयरन और फालिक एसिड मिलाकर दिया जाएगा। इसके अलावा दूध और वनस्पति तेल में विटामिन ए मिलाकर दिया जाएगा।
राज्य में बढ़ रहे एनीमिया, न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट और बर्थ डिफेक्ट से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने इस तरीके को अपनाने का फैसला किया है।
जिसके लिए शीघ्र ही फ्लोर मिल एसोसिएशन, तेल और दुग्ध उत्पादकों के साथ विभाग के अधिकारियों की बैठक होगी। एक सप्ताह में इस प्रयोग को अमल में लाया जाएगा।
फूड फोर्टिफाई करने की इस दिशा में पहले संगठित क्षेत्र से शुरूआत की जाएगी। जिसके लिए विशेषज्ञों को भी बुलाया जा रहा है। उत्पादक उपरोक्त पदार्थों को खुद ही बाजार से खरीद कर इन खाद्य पदार्थों में मिश्रित करेंगे। जिसमें छह से सात पैसे प्रति किलो की लागत आएगी।
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विभाग का जोर है कि हरियाणा की सेहत बनाने के लिए जो भी न्यूनतम खर्च आएगा, उस राशि को खाद्य उत्पादक वहन करेंगे।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग इन खाद्य पदार्थों की मानीटरिंग का काम करेगा। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इस पहल से हरियाणा के लोगों के शरीर मजबूत होंगे और बीमारियां घर नहीं करेंगी।
कोट:
अटलांटा दौरे के दौरान सेंटर फार डिजीज कंट्रोल के सामने यह समस्या रखी गई थी। जिसके बाद पता चला कि वेस्ट बंगाल में यह प्रयोग किया जा रहा है। वहां पर अच्छे नतीजे सामने आए हैं। लिहाजा हम इसे हरियाणा में शुरू कर रहे हैं।
- डा. राकेश गुप्ता, एमडी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन
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इसके अलावा प्रदेश में बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों में भी एनीमिया है। प्रदेश में बच्चों और लोगों की बिगड़ रही सेहत को सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने खान पान को मजबूत करने का बीड़ा उठाया है।
लोगों को अब आटे में विटामिन बी-12, आयरन और फालिक एसिड मिलाकर दिया जाएगा। इसके अलावा दूध और वनस्पति तेल में विटामिन ए मिलाकर दिया जाएगा।
राज्य में बढ़ रहे एनीमिया, न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट और बर्थ डिफेक्ट से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने इस तरीके को अपनाने का फैसला किया है।
जिसके लिए शीघ्र ही फ्लोर मिल एसोसिएशन, तेल और दुग्ध उत्पादकों के साथ विभाग के अधिकारियों की बैठक होगी। एक सप्ताह में इस प्रयोग को अमल में लाया जाएगा।
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फूड फोर्टिफाई करने की इस दिशा में पहले संगठित क्षेत्र से शुरूआत की जाएगी। जिसके लिए विशेषज्ञों को भी बुलाया जा रहा है। उत्पादक उपरोक्त पदार्थों को खुद ही बाजार से खरीद कर इन खाद्य पदार्थों में मिश्रित करेंगे। जिसमें छह से सात पैसे प्रति किलो की लागत आएगी।
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विभाग का जोर है कि हरियाणा की सेहत बनाने के लिए जो भी न्यूनतम खर्च आएगा, उस राशि को खाद्य उत्पादक वहन करेंगे।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग इन खाद्य पदार्थों की मानीटरिंग का काम करेगा। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इस पहल से हरियाणा के लोगों के शरीर मजबूत होंगे और बीमारियां घर नहीं करेंगी।
कोट:
अटलांटा दौरे के दौरान सेंटर फार डिजीज कंट्रोल के सामने यह समस्या रखी गई थी। जिसके बाद पता चला कि वेस्ट बंगाल में यह प्रयोग किया जा रहा है। वहां पर अच्छे नतीजे सामने आए हैं। लिहाजा हम इसे हरियाणा में शुरू कर रहे हैं।
- डा. राकेश गुप्ता, एमडी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन