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पंजाब: जालंधर में 2500 कर्मचारी हड़ताल पर, दो दिनों में 650 करोड़ का कारोबार हुआ प्रभावित
Tue, 29 Mar 2022 05:25 PM IST
ajay kumar
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Tue, 29 Mar 2022 05:25 PM IST
सार
हड़ताल पर पंजाब बैंक इंप्लाइज फेडरेशन के दिलीप पाठक व जसविंदर सिंह ने कहा कि सरकार पब्लिक सेक्टर बैंकों को एक दूसरे में मर्ज कर चुकी है व नई भर्तियां भी बंद कर रखी हैं।
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प्रदर्शन करते बैंककर्मी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
केंद्र सरकार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। कारपोरेट जगत से जुड़े लोगों को लाइसेंस दिए जा रहे हैं व पब्लिक सेक्टर के बैंक खिलाफ नीतियां बनाई जा रही हैं। हालात यह हैं कि बैंकों का बैड लोन बढ़ता जा रहा है, जिसकी रिकवरी के लिए सरकार सख्त कदम नहीं उठा रही है। सरकार पर यह आरोप पंजाब बैंक इंप्लाइज फेडरेशन के सदस्यों ने मंगलवार को की गई हड़ताल के दौरान लगाया। आल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही, यही वजह रही कि जालंधर में बैंक बंद रहे। लगभग 2500 कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद इन दो दिनों में लगभग 650 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है।
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हालांकि एसबीआई व निजी बैंक इस हड़ताल में शामिल नहीं हुए लेकिन इसके बाद भी बैंकों में 300 करोड़ का नकद लेनदेन नहीं हो सका। इसके अलावा 350 करोड़ रुपये के चेक भी क्लीयर नहीं हो सक। इस हड़ताल पर पंजाब बैंक इंप्लाइज फेडरेशन के दिलीप पाठक व जसविंदर सिंह ने कहा कि सरकार पब्लिक सेक्टर बैंकों को एक दूसरे में मर्ज कर चुकी है व नई भर्तियां भी बंद कर रखी हैं।
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इसके कारण एक कर्मचारी को दो से तीन कर्मचारियों का काम करना पड़ रहा है। कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त भार बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को बैंकों का निजीकरण करना बंद कर देना चाहिए व बैंकों के बैड लोन को जल्द से जल्द रिकवर किया जाना चाहिए। इसके अलावा उनकी जितनी भी मांगे हैं, सरकार उनको पहल के आधार पर पूरा करे।
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इंडिया ग्रामीण डाक सेवक यूनियन ने की हड़ताल
पठानकोट में आल इंडिया ग्रामीण डाक सेवक यूनियन के सदस्य मंगलवार को हड़ताल पर रहे। जिला के मुख्य डाकघर के बाहर हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। पूर्व वरिष्ठ उप प्रधान सुरिंदर कश्यप ने बताया कि आल इंडिया ग्रामीण डाक सेवक यूनियन की ओर से लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष किया जा रहा है। सरकार की ओर से उनकी मांगों को पूरा न करने पर यूनियन की ओर से हड़ताल का फैसला किया गया था।
अब केंद्रीय हाईकमान जैसा आदेश करेगी उसी के आधार पर अगली रणनीति तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया कि यूनियन की मांगों में यूनियन लेबर कोड को समाप्त करने, नई पेंशन स्कीम को समाप्त करने और पुरानी पेंशन नियमों को लागू करने, जीडीएस सहित सभी वर्करों को यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी उपलब्ध कराने, जीडीएस सहित सभी फ्रंट लाइन वर्करों का इंश्योरेंस कराने, जीडीएस कर्मचारियों को सिविल सर्वेंट का स्टेटस देने, ग्रुप इंश्योरेंस को पांच लाख रुपये तक बढ़ाने और सेवानिवृत्ति के दिन ही सेवानिवृत्ति के सभी लाभ देने सहित कई अन्य मांगों को पूरा करने को लेकर हड़ताल की है।