550वां प्रकाश पर्वः पंजाब सरकार के मंच पर नहीं जाएंगे पीएम मोदी, साझे आयोजन का जिम्मा कैप्टन को
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श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में सुल्तानपुर लोधी में आयोजित होने वाले समारोहों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल एसजीपीसी द्वारा आयोजित किए जाने वाले समारोह में हिस्सा लेंगे।
इस मौके पर राज्य सरकार द्वारा सजाए जाने वाले मंच पर प्रधानमंत्री नहीं जाएंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री डेरा बाबा नानक में भी करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन अवसर पर लैंड पोर्ट अथॉरिटी द्वारा बनाए गए मंच पर जाएंगे और वहां एक रैली को संबोधित करेंगे।
सूत्रों के अनुसार 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह 9 बजे सुल्तानपुर लोधी स्थित गुरुद्वारा श्री बेर साहिब में माथा टेकेंगे और वहां एसजीपीसी द्वारा आयोजित समारोह को संबोधित करेंगे। इसके बाद वे 11 बजे डेरा बाबा नानक के लिए रवाना होंगे और वहां लैंड पोर्ट अथॉरिटी द्वारा बनाए मंच पर कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।
डेरा बाबा नानक में प्रधानमंत्री कॉरिडोर और यात्री टर्मिनल बिल्डिंग (पीटीबी) का उद्घाटन करेंगे। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान भी प्रधानमंत्री राज्य सरकार द्वारा वहां बनाए जा रहे मंच पर नहीं जाएंगे।
सर्व पार्टी मीटिंग में साझे आयोजन का जिम्मा कैप्टन को
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की रिहायश पर शुक्रवार को हुई सर्वदलीय मीटिंग में सभी नेताओं ने श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को समर्पित पंजाब सरकार द्वारा 12 नवंबर को सुल्तानपुर लोधी में कराए जा रहे राज्य स्तरीय समागम में शामिल होने और प्रकाश पर्व को साझे तौर पर मनाने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई बैठक में आम आदमी पार्टी, बसपा, सीपीआई समेत अन्य पार्टियों के नेताओं ने हिस्सा लिया, लेकिन अकाली दल (बादल) और भाजपा के नेता अनुपस्थित रहे।
मीटिंग के दौरान इस बात पर अफसोस जाहिर किया गया कि कुछ पार्टियों ने अपने संकुचित हितों के लिए इस पवित्र मौके पर समानांतर समागम रखने का फैसला किया है, जिससे विश्व में सिख भाईचारे में गलत संदेश जा रहा है। मीटिंग के दौरान यह भी विचार किया गया कि इससे पहले ऐसे मौकों पर हुए समागम राज्य सरकार द्वारा कराए गए थे और इनमें सभी पार्टियों के नेता साझे तौर पर शामिल होते थे।
यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस रिवायत को तोड़ने का फैसला किया है और इस पवित्र और एतिहासिक मौके को अपने निजी स्वार्थों के लिए बरतने की कोशिश की है।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया मीटिंग के दौरान यह फैसला किया गया कि राज्य सरकार 12 नवंबर को कराए जा रहे समागम के लिए पंजाब और देश की सभी सियासी पार्टियों के नेताओं को न्योता देगी। इस समागम की धार्मिक भावनाओं के मद्देनजर सभी भाषण गुरु साहिब जी के जीवन और फलसफे के प्रसार तक ही सीमित होंगे।
मुख्यमंत्री के अलावा सत्ताधारी कांग्रेस के नुमायदों के तौर पर सुखजिंदर सिंह रंधावा, चरनजीत सिंह चन्नी और सुनील जाखड़ मीटिंग में शामिल हुए। बाकी राजनीतिक शख्सियतों में शिरोमणि अकाली दल 1920 के हरबंस सिंह कंधोला, सीपीआई के भूपिंदर सांभर और हरदेव अरशी, सीपीआई (एम) के गुरपरमजीत कौर तग्गड़, शिरोमणि अकाली दल टकसाली के सेवा सिंह सेखवां, संत समाज के बाबा सर्बजोत सिंह बेदी, बसपा के राज्य प्रधान जसवीर सिंह गड़ी, आम आदमी पार्टी के मनजीत सिंह बिलासपुर और विरोधी पक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा मीटिंग में शामिल थे।
इस पवित्र मौके का सियासीकरण किए जाने के लिए अकालियों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समागम की पवित्रता के मद्देनजर वह पहले दिन से ही साझे समागम के हक में थे और इसी भावना की पालना करते हुए वह 9 नवंबर को डेरा बाबा नानक में भारत सरकार द्वारा कराए जा रहे समागम के दौरान मंच से निजी तौर पर भी जुड़ी सभा को संबोधन करेंगे।
कैप्टन ने कहा कि उनकी सरकार ने इस एतिहासिक मौके की याद में कई प्रोजेक्टों की शुरुआत की है जिनमें पटियाला में जगत गुरु नानक ओपन यूनिवर्सिटी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरफेथ स्टडीज, पिंड बाबे नानक दा और अन्य प्रोजेक्ट शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने इस दिवस के सत्कार में कपूरथला में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए भी केंद्र से मांग की है।