श्री करतारपुर साहिब से दर्शन कर लौटी संगत, जानें कैसा रहा वहां का माहौल
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सुबह 10 बजे ही करतारपुर कॉरिडोर टर्मिनल पर जत्थे के लोग जुटने शुरू हो गए थे। बीएसएफ और केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से 10 बजे का समय दिया गया था। विधायक और मंत्रीगण पहुंचने शुरू हो गए। विदेश के अलावा देश की नामचीन हस्तियां 11 बजे तक पहुंच चुकी थीं। टर्मिनल की एंट्री पर श्री गुरुनानक देव जी की चार उदासियां का पूरा ब्योरा था।
अंदर वाहेगुरु का जाप चल रहा था। 12:20 मिनट पर पीएम मोदी को बाहर पंडाल पर संगत को संबोधित कर जत्थे को रवाना करने के लिए आना था। करीब एक बजे पीएम मोदी आए। टर्मिनल के भीतर डाक्यूमेंटरी को देखा और बाद में खालसा ध्वज उठाकर संगत को रवाना किया। भारतीय इमिग्रेशन की तरफ से चेक आउट के बाद करीब आधा किलोमीटर दूर जीरो लाइन थी, जहां पर संगत को गेट क्रास कर पाकिस्तान जाना था।
बीएसएफ के अधिकारियों ने संगत को रोका और कहा कि जिसका नाम पुकारा जाएगा, वही आगे आएगा। अभी 31 लोगों का पहला ग्रुप भेजा जाएगा। इस पर विवाद शुरू हो गया। बीएसएफ के जवानों ने 31 नाम पुकारे लेकिन जीरो लाइन पर भारतीय गेट पर संगत इतनी उतावली हो गई कि गेट को खोलना पड़ा।
संगत तेजी से बोले सो निहाल के जयकारे लगाती सीधी पाक गेट से दाखिल हो गई। पाक आर्मी के जवान, जिसमें महिलाएं भी थी, ने वेलकम टू पाकिस्तान कहकर सबका स्वागत किया। जत्थे का नेतृत्व श्री अकाल तख्त साहब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने खालसा ध्वज उठाकर किया।
पाक गेट क्रास करते ही काफी बड़ा पाक ध्वज लगा हुआ था, वहां पर लाल रंग की बसें और हरे रंग की ओपन मिनी बसें खड़ी थीं। इसमें बैठकर संगत पाकिस्तान की इमिग्रेशन चेक पोस्ट पर पहुंची। अंदर शानदार हॉल में करीब 40 काउंटर तैयार थे। संगत और तमाम नेताओं में संशय था कि पासपोर्ट पर पाकिस्तान की स्टैंप लगेगी लेकिन इमिग्रेशन अधिकारियों ने बताया कि एक कार्ड पर आपको स्टैंप लगाकर दी जाएगी, उसी स्टैंप को वापस आने पर देखा जाएगा।
जैसे जैसे इमिग्रेशन क्लीयर हो रही थी, संगत के लिए चेक पोस्ट के दूसरे दरवाजे पर बसें तैयार खड़ी थीं। वहां से महज 2.5 किलोमीटर दूरी पर ही श्री करतारपुर साहिब गुरुद्वारा था। रास्ते में पूरी सड़क पर आसपास कंटीले तार थे। रावी दरिया पर पुल नया बना था, जिसके आसपास पेड़ व फूल के पौधे लगे थे। बसें संगत को लेकर गुरुद्वारा साहिब पहुंच रही थी, जहां पंज प्यारे और गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य संगत के स्वागत के लिए तैयार थे।
गुरुद्वारा साहिब की बाहरी दीवार फूलों से सजी हुई थी। इंटरलाकिंग टाइल्स लगी हुई थीं और पार्किंग से लेकर संगत के स्वागत का पूरा प्रबंध था। अंदर कीर्तन चल रहा था। अंदर जाते ही पाकिस्तान के कुछ लोग गाइड कर रहे थे कि बायीं तरफ म्यूजियम है, जहां पर अच्छी पेंटिंग व तस्वीरें हैं। उसके पीछे लंगर हॉल था, सारी इमारत नई बनी थी। लोग बताने लगे कि गुरुद्वारा साहब का नया परिसर 40 एकड़ में तैयार किया गया है।
म्यूजियम में कई पेंटिंग थी, जो फकीरखाना म्यूजियम की तरफ से तैयार की गई थी। इसके अलावा करतारपुर कॉरिडोर का पूरा नक्शा और पुरानी फोटोग्राफ थी। इसके पीछे नई इमारत में लंगर घर था। श्री करतारपुर साहिब गुरुद्वारा पुराने स्थान पर था। काफी छोटा था, जहां पर श्री गुरु नानक देव जी की चादर का संस्कार किया गया था। अंदर संगत श्रद्धा से नतमस्तक हो रही थी। उसके ऊपर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश था।
बाहर दरवाजे पर श्री गुरु नानक देव जी की समाध थी जिस पर लिखा था कि यहां पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने श्री गुरु नानक देव जी के फूल और चादर को दफनाया था। मजार पर फूलों की माला चढ़ी हुई थी और बोर्ड पर उर्दू व पंजाबी में अंकित था। पांच कदम की दूरी पर कुआं था, जो संगमरमर से तैयार किया गया था।
इसी कुएं से श्री गुरुनानक देव जी पानी निकालकर खेती करते थे। दूसरी तरफ बड़ा दीवान हॉल था, जहां पर दीवान सजाए जाते हैं। इस हॉल को भी हाल ही में नया बनाया गया है। अंदर सफेद रंग किया गया है और उसे संगमरमर से तैयार किया गया था। अन्य दिशा में पीएम इमरान खान की स्टेज लगी हुई थी, संगत जमीन पर बैठकर अपने पीएम का इंतजार कर रही थी।
पीएम इमरान खान आए तो संगत द्वारा जो बोले सो निहाल से उनका स्वागत किया गया। एक बड़ी किरपाण को गुरुद्वारा साहिब में स्थापित किया गया था, उस पर पर्दा लगा था, जिसका अनावरण पाक पीएम इमरान खान ने किया। करीब 4.30 बजे इमरान खान ने भाषण खत्म किया जिसके बाद संगत ने गुरुद्वारा साहिब की परिक्रमा की।
गुरुद्वारा साहिब से बाहर निकलने के लिए दो दरवाजे बनाए गए हैं। एक कॉरिडोर से आने वाली संगत के लिए जबकि दूसरा दरवाजा पाकिस्तान में आई संगत के लिए है। दोनों की पार्किंग व्यवस्था भी अलग-अलग थी। पाकिस्तान से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बनी पार्किंग की साइड पर एक पूरी मार्केट तैयार की गई थी।जिसमें कपड़े की दुकानों के अलावा करेंसी एक्सचेंज, पिज्जा शॉप, कोल्ड ड्रिंक के अलावा कपड़े व पंजाबी जूती और हार शिंगार की दुकानें अस्थायी तौर पर बनी थी।
पूरी मार्केट यूरोप की तर्ज पर तैयार की गई थी, जहां कदम कदम पर फूल व बैठने के लिए कुर्सियां लगी थी। पाकिस्तान सरकार की तरफ से शनिवार को 550 रुपये का सिक्का जारी किया गया था, जिसका स्टाल लगा हुआ था हालांकि वह खत्म हो गए थे। संगत की तरफ से उन सिक्कों को काफी उत्साह से खरीदा गया। पाक पोस्ट आफिस की तरफ से एक स्टाल लगाया गया था, जिसमें 550वें प्रकाशोत्सव पर डाक टिकटों की बुकलेट थी, जो 920 रुपये पाक करेंसी में बेची जा रही थी। इसको भी संगत उत्साह से खरीद रही थी।
पांच बजे सूरज छिपने लगा तो जत्थे के लोग बसों की तरफ जाने लगे। बारी बारी से बसें पाक इमिग्रेशन पोस्ट पर संगत को पहुंचा रही थी। पाक की तरफ से तेजी से संगत के पासपोर्ट स्कैन कर उनको इमिग्रेशन आउट किया जा रहा था। सात मिनट बाद ही संगत जीरो लाइन पर पहुंच रही थी, जहां पर भारतीय सीमा सुरक्षा के जवान वेलकम टू इंडिया कहकर संगत का स्वागत करते दिखे। पासपोर्ट के अलावा अलावा इलेक्ट्रानिक्स ऑथेराइजेशन डाक्यूमेंट को देखा जा रहा था। भारतीय सीमा में एंट्री के बाद भारतीय कस्टम व इमिग्रेशन अधिकारियों द्वारा पासपोर्ट स्कैन कर संगत की एंट्री डाली गई।