आपदा को अवसर में बदला : कोरोना काल में हरियाणा में बनीं 510 अवैध कालोनियां, विधानसभा में सरकार ने दी जानकारी
- दोबारा मंगवाई जाएगी बारिश, ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट
- शून्यकाल में कांग्रेस विधायक रघुबीर कादयान, कुलदीप वत्स ने उठाया मुद्दा
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हरियाणा में कालोनाइजरों ने आपदा को अवसर में बदल दिया। कोविड के दौरान उन्होंने धड़ल्ले से पूरे प्रदेश में अवैध कालोनियां काटीं। इसका खुलासा बुधवार को विधानसभा में हुआ। सरकार ने कांग्रेस विधायक बीबी बत्रा के सवाल के जवाब में सदन पटल पर जानकारी रखी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की तरफ से कृषि मंत्री जेपी दलाल ने बताया कि पहली फरवरी 2020 से 31 दिसंबर 2020 तक राज्य में कुल 510 अवैध कालोनियां विकसित हुईं।
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग ने इसकी सूचना मिलने के बाद प्रभावी कदम उठाए और 502 कालोनियों में तोड़फोड़ की। मंत्री ने बताया कि इस अवधि के दौरान अवैध कालोनियां विकसित करने की 213 एफआईआर दर्ज करवाई गईं। उन्होंने कहा कि इस तरह की कालोनियां न पनपें, इसलिए लोगों को सस्ते मकान मुहैया कराने के लिए सभी के लिए आवास योजना लाई गई है। इसके तहत मकान आवंटित होने पर लोग कालोनाइजरों के चंगुल में नहीं फंसेंगे। बीबी बत्रा ने कहा कि सरकार अवैध कालोनियों को विकसित कैसे होने दे रही है। हरित क्षेत्र तक में अवैध निर्माण हुए हैं। उन्हें सरकार हटवाए।
18 विधानसभा क्षेत्रों में जलभराव की समस्या
जलभराव क्षेत्र में आने वाली 18 विधानसभा क्षेत्रों में विधायकों की मांग पर पानी निकासी के लिए अतिरिक्त पाइप डालकर पंपिंग सेट लगाए जाएंगे। विधायकों को राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग को अपने प्रस्ताव भेजने होंगे। ये विधानससभा क्षेत्र ऐसे हैं जिनमें जरा सी बारिश पर भी पानी भर जाता है।
उपमुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शून्यकाल में यह जवाब दिया। कांग्रेस विधायक रघुबीर कादयान, कुलदीप वत्स ने बेरी और बादली में बारिश व ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान व जलभराव का मुद्दा उठाया। कांग्रेस विधायकों ने इस विषय पर ध्यानाकर्षक प्रस्ताव लगाया था, जिसे डीसी झज्जर की टिप्पणी आने के बाद नामंजूर कर दिया। डीसी ने फसलों को ज्यादा नुकसान न होने की रिपोर्ट भेजी थी।
इस पर वत्स व मलिक ने कहा कि क्षेत्र में अनेक ऐसे गांव हैं, जिनमें फसल को भारी नुकसान पहुंचा है लेकिन न तो विशेष गिरदावरी हुई न किसानों को मुआवजा मिला। दुष्यंत ने कहा कि इन विधानसभा क्षेत्रों में किसानों की फसलें खराब होने का मामला संज्ञान में है। अगर डीसी की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं तो जिला स्तर पर कमेटी बनाकर दोबारा रिपोर्ट मंगवाई जाएगी।
पीएम फसल बीमा योजना में यह प्रावधान है कि अगर बीते वर्ष की तुलना मे कम पैदावार होती है तो भी किसान को मुआवजा मिलेगा। दो दिन पहले भी कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि हुई थी, उसकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। नुकसान की रिपोर्ट आने पर किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। आपदा विभाग की पहली बैठक जनवरी में हो चुकी है, दूसरी बैठक अप्रैल में होगी। अगर कोई विधायक इससे पहले अपने-अपने जिला के उपायुक्त से मिलकर जलभराव क्षेत्र की रिपोर्ट तैयार कर भिजवा देंगे तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।