एक ही परिवार के 5 लोग आग में जिंदा जले
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बाहरी दिल्ली अंतर्गत बेगमपुर गांव में पत्तल बनाने वाले एक परिवार के पांच लोगों की जलने से मौत हो गई। दर्दनाक हादसे में 11 और पांच साल की उम्र के दो बच्चे भी मारे गए। मामले में बेगमपुर थाना पुलिस ने ठेकेदार को गिरफ्तार किया है। खास बात यह है कि हादसे में असमय काल का ग्रास बने लोगों में गिरफ्तार किए गए ठेकेदार का बेटा, भाई और भांजे हैं।
दमकल विभाग को सोमवार तड़के करीब तीन बजे सूचना मिली कि राजीव नगर विस्तार, कराला अंतर्गत पंजाबी मार्केट स्थित एक परिसर में आग लग गई है। सूचना पर दमकल विभाग और पुलिस तथा कैट्स एंबुलेंस मौके पर पहुंचे। आग पर काबू पाए जाने पर एक कमरे में पांच लोग बुरी तरह झुलसी हालत में मिले। पांचों को संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने सभी को मृत घोषित कर दिया। मरने वालों में 26 साल का विपिन, 17 साल का श्रवण, 15 साल का नीलेश, 11 साल का नीरज और 5 साल का निरंजन शामिल है। इस मामले में पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ठेकेदार पिंटू को गिरफ्तार कर लिया है।
दोने और पत्तलें बनाई जाती है यहां
मार्केट में जहां आग लगी वह लगभग 250 गज का परिसर है। जिसमें कागज के दोने-पत्तल बनाई जाती हैं। आरंभिक जांच में पता चला है कि इस स्थान पर 18-20 लोग काम करते हैं। रात को काम खत्म करने के बाद यहां काम करवाने वाले ठेकेदार पिंटू के परिवार वाले तथा रिश्तेदार यहीं पर सो गए। आग लगने के बाद उनमें से कोई भी बच नहीं पाया।
बेटा, भाई और भांजे सब मारे गये
हादसे में मरने वाले सभी लोग पिंटू के अपने ही थे। हादसे में पिंटू का पांच साल का बेटा निरंजन मारा गया तो वहीं 26 साल का भाई विपिन भी। विपिन पिंटू का सगा छोटा भाई था। मरने वालों में शामिल श्रवण, नीरज और नीलेश पिंटू के भांजे थे। पिंटू ने इन सभी को विशेष तौर पर काम पर लगा रखा था।
काम के बोझ ने ले ली जान
ठेकेदार पिंटू ने इस पूरे परिसर को किराए पर ले रखा था। मूल रूप से बिहार का रहने वाला पिंटू यहां अपने परिवार के साथ स्वयं भी काम करता था। शादियों का सीजन होने से काम का बोझ भी ज्यादा था, इसीलिए परिजन एवं रिश्तेदार परिसर में बने कमरे में ही सो गये थे। बस इसी वजह से वे काल का ग्रास बन गये।
पहले हुए बेहोश, फिर मौत का आगोश
शुरुआती जांच में पता चला है कि मरने वाले सभी लोग पहले बेहोश हो गए थे। इसी कारण वे आग में जिंदा जल गए। बताया जा रहा है आग परिसर में लगी थी, लेकिन जिस कमरे में वे सो रहे थे, वहां पर धुआं भर गया था। धुएं के कारण ही ये पांचों बेहोश हो गए। इसी वजह से जब आग कमरे तक पहुंची तो इनमें से कोई भी अपने आप को बचाने की कोशिश भी नहीं कर पाया।