खेमकाः 22 साल के कार्यकाल में 45 तबादले
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रॉबर्ट वाड्रा-डीएलएफ डील की जमीन का म्यूटेशन रद्द करने के बाद चर्चा में आए वरिष्ठ आईएएस अशोक खेमका के कार्यकाल में हरियाणा वेयर हाउसिंग के गोदाम निर्माण में कई खामियां बरती गई थीं। राज्य सरकार द्वारा गोदाम निर्माण के प्रधान महालेखाकार से कराए गए विशेष ऑडिट में यह गड़बड़ियां पाई गई हैं।
राज्य सरकार ने वेयर हाउसिंग कारपोरेशन को रिपोर्ट सौंपकर टिप्पणी मांगी है। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पहले इस मामले में सीबीआई जांच कराने के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया था लेकिन बाद में विशेष ऑडिट कराने का फैसला किया था।
वाड्रा-डीएलएफ डील की म्यूटेशन रद्द की थी
हरियाणा के आईएएस अशोक खेमका का प्रदेश में कार्यकाल काफी विवादों से भरा रहा। इन 22 सालों में वे 45 तबादले झेल चुके हैं।
12 अक्तूबर 2012 को वह उस समय सबसे अधिक सुर्खियों में छाए जब चकबंदी महानिदेशक पद पर रहते हुए उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के बीच जमीन को लेकर हुई डील की म्यूटेशन रद्द कर दी थी।
प्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने इस प्रकरण के बाद खेमका का स्थानांतरण हरियाणा बीज विकास निगम के महानिदेशक पद पर कर दिया।
रैक्सिल दवा खरीद मामले में भी नाम आया
इसके बाद खेमका पर रैक्सिल दवा खरीद मामले में हुई गड़बड़ी को लेकर भी उंगली उठाई गई और यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। खेमका तबादले के बाद भी सुर्खियों में बने रहे।
उनके मीडिया में जाने पर राज्य सरकार ने सवाल खड़े किए। हालांकि खेमका ने भी मीडिया में अपनी बात रखने के लिए सरकार से अनुमति की मांग कर दी। सरकार ने वाड्रा डीएलएफ मामले में तीन अधिकारियों की कमेटी बनाई।
सीबीआई जांच की मांग हुई थी
कमेटी ने जांच में पाया कि खेमका द्वारा रद्द की गई म्यूटेशन उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती थी। इसके बाद सरकार ने खेमका को चार्जशीट किया। यह चार्जशीट रात के समय उनकी अनुपस्थित में घर पर थमा दी गई।
खेमका के खिलाफ सीबीआई जांच की भी सिफारिश की गई लेकिन बाद में सरकार पीछे हट गई। फिलहाल कैग की रिपोर्ट में खेमका के कार्यकाल में गेल्वैल्यूम शीट की खरीद में हुई अनियमितताओं पर उंगली उठाई गई है। इस पर सरकार ने फिर से जांच शुरू करवा दी है।
कौन हैं खेमका और क्या किया उन्होंने
अशोक खेमका अभी हरियाणा बीज विकास निगम के एमडी थे लेकिन अब उन्हें यहां से हटाकर हरियाणा अभिलेखागार विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है।
आपको बता दें की IAS अधिकारी अशोक खेमका ने तक़रीबन 6 महीने पहले रोबर्ट वाड्रा जमीन घोटाले का पर्दाफाश किया था जिसके बाद ही खेमका सुर्ख़ियों में आये।
आशंका थी कि उन पर एक बार फिर तबादले की गाज गिर सकती है और वहीं हुआ भी। उनका तबादला बीज निगम में किया गया, जहां जूनियर अफसरों को भेजा जाता है।
मुख्यमंत्री तक का आदेश नहीं माना था
अपनी ईमानदारी और भ्रष्टाचार विरोधी तेवर की वजह से ही अशोक खेमका हरियाणा में काफी लोकप्रिय हैं। साल 2004 में उन्होंने मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला तक का आदेश मानने से इंकार कर दिया था, जब सरकार ने कई शिक्षकों का सत्र के बीच में ही तबादला किया था।
ऐसा रहा उनका 22 सालों का कार्यकाल
उनकी पहली पोस्टिंग सन 1993 में हुई थी। उनके पूरे कार्यकाल में उनकी अधिकतर पोस्टिंग कुछ महीने ही चलीं। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग विभागों में 8 पोस्ट ऐसी संभालीं, जोकि महीने भर या उससे भी कम समय के लिए थीं।
संयोग से, उनकी 44 में से 12 पोस्टिंग ऐसे विभागों में हुई जहां उन्हें जमीनी कामकाज में डील करना था। जहां भूमि के अधिग्रहण से लेकर उसके रेकॉर्ड, रेवेन्यू और विकास तक की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। मिनिस्ट्री ऑफ पर्सनल की एग्जेक्युटिव रेकॉर्ड शीट (ईआरएस) में दर्ज जानकारी के मुताबिक, खेमका ने केवल दो ही ऐसी पोस्टिंग संभाली हैं जो एक साल से ज्यादा समय तक रही हों।
2005-06 में यह उनका पहला कार्यकाल था जब उन्होंने शहरी विकास विभाग में बतौर मुख्य प्रबंधक डेढ़ साल के लिए काम किया। खेमका ने उद्योग विभाग में 2008 से 2010 के बीच, यानी एक साल 10 महीने तक प्रबंध निदेशक के तौर पर काम किया।
खेमका कह चुके हैं,' सरकार किसी भी पार्टी की रही हो, मुझे हर बार अपनी ईमानदारी की सजा भुगतनी पड़ी क्योंकि मैं लगातार घपलों और घोटालों का पर्दाफाश करता रहा हूं।'
डेपुटेशन पर जाने का किया था आवेदन
मुख्य सचिव ने कहा कि खेमका ने केंद्र में जाने का आवेदन किया था। हरियाणा सरकार ने उसे केंद्र को भेज दिया था। जहां तक एसीआर खराब करने का प्रश्न है, वह गलत है। अब तक एसीआर लिखी ही नहीं गई है।
जब एसीआर लिखी ही नहीं गई तो खराब कहां से हो गई। उन्होंने कहा कि खेमका का पत्र उन्हें प्राप्त हुआ है और उसे एग्जामिन किया जा रहा है।
खेमका को केंद्र में जाने से रोकने के आरोप पर मुख्य सचिव ने कहा कि हरियाणा सरकार चाहती है कि केंद्र में उनके अफसर जाएं। केंद्र में होंगे तो अपने राज्य के लिए अच्छा ही करेंगे।
ऑडिट में ये पाई खामियां
1. 29 जनवरी, 2009 को फाइनेंशियल बिड खोलने के लिए तय मीटिंग से पहले 28 जनवरी को ही तकनीकी और फाइनेंशियल बिड खोल दी गई। इसके अतिरिक्त 350 और 550 ग्रेड की टेंशाइल स्ट्रैंथ लिए टेंडर मांगे गए थे लेकिन ठेका 350 ग्रेड का ही दिया गया।
2. 18 फरवरी, 2009 को 25 गोदाम बनाने के लिए ठेका दिया गया। मगर उसके बाद 9.52 करोड़ रुपये का ठेका अतिरिक्त गोदाम बनाने के लिए तीन बार दे दिया गया। जबकि इसके लिए ताजे टेंडर जारी किए जाने चाहिए थे।
3. कोरिया की कंपनी की गैलवैल्यूम (डोंग बू ब्रांड) शीट लगाने का ठेका दिया गया। कंपनी विशेष के नाम से शीट का चयन करना टेंडर की शर्तों का उल्लंघन था।
4. ठेके के एवज में रखी गई गोदाम बनाने वाली कंपनी की 1.64 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी राशि समय से पहले जारी की गई। जिससे निगम को 36.92 लाख रुपये का ब्याज का नुकसान हुआ। हालांकि बाद में निगम ने यह राशि वसूल कर ली। कंपनी ने इस फैसले को ऑर्बिट्रेटर के पास चुनौती दी है। साथ ही अन्य कार्यों के बदले 1.70 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी रखी ही नहीं जिससे निगम को 42.08 लाख रुपये का ब्याज का नुकसान हुआ।
5. वर्कर वेलफेयर सेस की राशि नहीं काटी गई। बाद में यह राशि जनवरी, 2014 में 65 लाख रुपये काटी गई। कंपनी ने इस फैसले को भी हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी है।
कोट्स
हां, हरियाणा सरकार से विशेष ऑडिट की रिपोर्ट निगम के पास जवाब भेजने के लिए मिली है। रिपोर्ट का आकलन किया जा रहा है।
रमेश कृष्ण, प्रबंध निदेशक, हरियाणा वेयर हाउसिंग कारपोरेशन
राज्य सरकार को अब इस मामले में सीबीआई से केस दर्ज कर जांच शुरू करने का आग्रह करना चाहिए। मैं भी जांच की मांग को लेकर सीबीआई से संपर्क करूंगा।
रविंद्र कुमार, शिकायतकर्ता
सरकार के लिए परेशानी बन सकते हैं खेमका
हरियाणा के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका कैग की रिपोर्ट मीडिया में लीक होने पर सरकार के सामने सवाल खड़ा कर सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, खेमका इस मामले में पक्ष रखने का मौका दिए बिना तैयार की गई रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकते हैं।
सूत्र बताते हैं कि खेमका ने मौजूदा कैग से गुजारिश की थी कि यदि स्पेशल ऑडिट में उनके खिलाफ कुछ तथ्य सामने आते हैं, तो उन्हें पक्ष रखने का मौका दिया जाए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे आने वाले दिनों में इस रिपोर्ट पर सरकार और खेमका के बीच खींचतान बढ़ सकती है।
हालांकि, यह रिपोर्ट हरियाणा वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन के एमडी रमेश कृष्ण के पास पहुंच चुकी है और वे इसका अध्ययन भी कर चुके हैं, लेकिन अभी उनकी ओर से इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं की गई है।
मालूम हो, कैग ने गैलवेल्यूम शीट के टेंडरों में अनियमितताएं पकड़ी हैं। इसकी रिपोर्ट मुख्य सचिव के पास भेज दी गई है। मुख्य सचिव ने इस मामले में एमडी वेयरहाउसिंग से टिप्पणी मांगी है।
आरटीआई कार्यकर्ता रवींद्र कुमार की शिकायत पर कैग से स्पेशल ऑडिट कराया गया था। हालांकि, हरियाणा के महालेखा नियंत्रक ने पहले यह ऑडिट करने से मना कर दिया था।