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चंडीगढ़ में 3 दिवसीय संगीत सम्मेलन, धमाल मचाएंगे कई मशहूर फनकार, ये रहा पूरा प्रोग्राम शेड्यूल

Wed, 24 Oct 2018 02:17 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 24 Oct 2018 02:17 PM IST
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41th Three Days Sangeet Sammelan in Chandigarh
भारतीय शास्त्रीय संगीत
इंडियन नेशनल थियेटर द्वारा दुर्गा दास फाउंडेशन के सहयोग से तीन दिवसीय 41वां वार्षिक संगीत सम्मेलन सेक्टर-26 स्थित स्ट्रोबरी फील्डस हाई स्कूल के सभागार में आयोजित किया जाएगा। इंडियन नेशनल थियेटर की सेक्रेट्री विनीता गुप्ता ने बताया कि 26 अक्तूबर को शाम 6:00 बजे प्रो. ओजेश प्रताप सिंह अपनी प्रस्तुति देंगे, उसके बाद श्रुति सडोलिकर अपना गायन प्रस्तुत करेंगी। उन्होंने बताया कि प्रो. ओजेश प्रताप सिंह (हिंदुस्तानी गायक) एक प्रतिभाशाली गायक हैं। उनका गायन प्रशिक्षण और समर्पित अभ्यास वर्षों से जारी है। गौर रहे कि उन्होंने महज पांच साल की उम्र से प्रभावशाली अंदाज में रियाज करना शुरू कर दिया था।
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उन्होंने रामपुर-सहसवान घराना (परंपरा) के संगीत के महान कलाकार उस्ताद गुलाम सिराज खान के साथ संगीत की शिक्षा प्राप्त करनी शुरू की और लंबे समय तक गायकी सीखी। ओजेश उन चुनिंदा शिष्यों में से एक हैं, जो कि प्रसिद्ध संगीत महारथी पंडित उल्हास कशलकर के मार्गदर्शन में अपनी ‘गायकी’ (गायन शैली) को नया आकार देते हुए उसे नए सिरे से परिभाषित करने में सफल रहे हैं। विनीता गुप्ता ने बताया कि इसी दिन (26 अक्तूबर) श्रुति सडोलिकर काटकर भी अपनी प्रस्तुति देंगी। वे जयपुर-अतरौली घराना में ख्याल शैली की प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका हैं। वे कोल्हापुर के एक परिवार में जन्मी हैं जो अपनी संगीत परंपरा के लिए जाना जाता है।
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उनका प्रारंभिक प्रशिक्षण उनके पिता वामनराव सडोलिकर से प्रारंभ हुआ, जिन्हें जयपुर-अतरौली घराना के संस्थापक अलादिया खान और उनके बेटे भुरजी खान ने संगीत की तालीम दी थी। अपने पिता के साथ अपने शिक्षण के बाद, सडोलिकर ने गुलुभाई जसदनवाला से बारह वर्षों तक संगीत सीखा, जो दुर्लभ राग की रचनाओं के लिए प्रसिद्ध थे। वह हिंदुस्तानी (उत्तर भारतीय) शास्त्रीय परंपरा में बेहतरीन गायिकाओं में से एक हैं। 27 अक्तूबर को सायं 6:00 बजे नूपुर गाडगिल अपने गायन की प्रस्तुति देंगी, जिनके पश्चात् संजीव चिम्मलगी द्वारा गायन प्रस्तुत किया जाएगा। विनीता गुप्ता ने बताया कि नूपुर गाडगिल, पिछले 18 वर्षों से पंडित मधुकर गजानन राव जोशी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
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उन्होंने शुभदा दादरकर, पंडित रामदास कामत और रजनी जोशी से नाट्य संगीत में भी मार्ग दर्शन प्राप्त किया है। उनको पं. भीमसेन जोशी फैलोशिप अवॉर्ड और पं. राममराठे स्मृति युवा पुरस्कार भी प्राप्त है। वह ग्वालियर, आगरा और जयपुर घराने के सूक्ष्म तत्वों को समझती हुईं अपनी नवीन गायकी प्रस्तुत करती हैं। 28 अक्तूूबर को सुबह 11:00 बजे ज्योति हेगड़े रुद्र वीणा की प्रस्तुति देंगी। विदुशी ज्योति हेगड़े दुनिया में रुद्र वीणा की पहली और एकमात्र महिला वादक हैं। वह खंडरबानी घराने की प्रतिनिधि कलाकार हैं। रुद्र वीणा यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत में शामिल संरक्षित वाद्यों में से एक है।
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