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आफत की बारिशः अलविदा मानसून ने तोड़ी कमर, हरियाणा में 40 फीसदी सब्जियां बर्बाद

Wed, 26 Sep 2018 10:10 AM IST
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 26 Sep 2018 10:10 AM IST
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40 percent of vegetables waste in Haryana due to heavy rain
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : डेमो

तीन दिन की बारिश से हरियाणा के सब्जी उत्पादक किसानों को भारी नुकसान हुआ है। प्रदेश में करीब 40 फीसदी सब्जियों की फसल खराब हो गई है। निचले इलाकों में स्थित सब्जियों के खेतों में अभी भी पानी खड़ा है। जो सब्जियों की पौधों की जड़े गला रहा है। उसके अलावा जिन सब्जियों की अभी पौध तैयार की जा रही थी, खड़े पानी में उन सब्जियों के बीज भी फटने लगे हैं। इस वजह से ये पौध लगने से पहले ही खत्म हो जाएगी। उधर, जिलों में कृषि विभागों के फील्ड अफसरों ने नुकसान का जायजा लेना शुरू कर दिया है।

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हरियाणा के सभी जिलों में विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती की जाती है। इस वक्त किसानों ने विभिन्न सब्जियों की अगेती फसल बोई हुई थी, जबकि विभिन्न पछेती फसलों की पौध तैयार हो रही थी। पछेती फसल की सब्जियां कुछ दिन बाद तैयार होने वाली थी। लेकिन अलविदा मानसून तीन तक ऐसा बरसा कि सब्जी उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी। इस बारिश में वैसे तो लगभग सभी सब्जियां प्रभावित हुई है, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान मूली, गाजर, गोभी, मिर्च, टमाटर, शलजम, बैंगन व आलू की फसल को हुआ है।
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हरियाणा में 446995 हेक्टेयर  है सब्जियों का रकबा
हरियाणा में आलू की खेती 34718 हेक्टेयर, प्याज की खेती 29746 हेक्टेयर, टमाटर की  खेती 34988 हेक्टेयर, मूली की 33056 हेक्टेयर, गाजर की 26558 हेक्टेयर, बंदगोभी की 21206 हेक्टेयर, फूलगोभी की 39883 हेक्टेयर, मिर्च की 19016 हेक्टेयर, शिमला मिर्च की 4558 हेक्टेयर, भिंडी की 24530 हेक्टेयर, बैंगन की 16182 हेक्टेयर, अरबी की 1190 हेक्टेयर, मटर की 15559 हेक्टेयर, पत्तेदार सब्जियों की 36819 हेक्टेयर, लौकी की 24381 हेक्टेयर, तुरई एवं तौरी की 14434 हेक्टेयर, खीरे की 17388 हेक्टेयर, कद्दू की 4327 हेक्टेयर, करेले की 7223 हेक्टेयर व अन्य सब्जियों की खेती 41233 हेक्टेयर में की जाती है।

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ये है किसानों का दर्द

40 percent of vegetables waste in Haryana due to heavy rain
vegetables - फोटो : फाइल फोटो

हरियाणा के किसान रामचंद सैनमाजरा, फूलचंद बालटी, अच्छर सिंह उगाड़ा व अवतार सिंह, मर्दो साहिब का कहना है कि निचले इलाकों के खेतों में अभी भी पानी खड़ा है। ये पानी जल्द सूखने वाला नहीं है। लिहाजा सब्जियों की पौधों की जड़े सड़ गई है और पौध तैयार करने का बीज भी फटकर खराब हो गया है। आलू की फसल जो किसानों की बीज रखी थी, वो तबाह हो गई है। किसानों ने कहा कि सरकार जल्द से जल्द  सर्वे करवाकर किसानों को बर्बाद हुई फसल का मुआवजा दे।

महंगे हो सकते हैं सब्जियों के दाम
बारिश की वजह से हरियाणा के साथ-साथ पंजाब और हिमाचल में भी सब्जियों की फसल को भारी नुकसान हुआ है। सब्जियों की जो अगेती किस्में तैयार होकर कुछ दिन बाद जो बाजारों में पहुंचने थी, वह अब लेट पहुंचेगी। क्योंकि पुरानी सब्जियां पाड़कर, सब्जियों की पछेती किस्मों की बिजाई होगी। उसके बाद स्थानीय सब्जियां मंडियों तक पहुंच पाएंगी। इस वजह से आने वाले कुछ दिनों में सब्जियों के दाम काफी बढ़ सकते हैं।

हरियाणा में बारिश की वजह से जो नुकसान हुआ है, उसकी विशेष गिरदावरी के लिए जिला अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं। नुकसान के आंकलन के बाद ही सरकार अगला निर्णय लेगी। सरकार पूरी तरह से किसानों के साथ खड़ी है। -कैप्टन अभिमन्यु, वित्तमंत्री, हरियाणा

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