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सर्वे में शिक्षकों को मिले 40 अनाथ बच्चे, स्वास्थ्य विभाग को सौंपा विवरण
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चंडीगढ़। कोरोना के दौरान शहर में 40 बच्चों ने अपने माता-पिता को खोया है। शिक्षकों ने घर- घर जाकर सर्वे में ऐसे बच्चों को खोज कर उनका विवरण तैयार कर शिक्षा विभाग को सौंप दिया है। यूटी प्रशासन की घोषणा के तहत अब इन बच्चों को नौवीं से आगे की शिक्षा मुफ्त में प्रदान करवाने की योजना बनाई जा रही है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी सरकारी स्कूलों को निर्देश जारी कर शनिवार तक ऐसे बच्चों के घर जाकर सर्वे करने को कहा था। शिक्षकों ने महामारी के कारण माता-पिता दोनों या किसी एक को खोने वालों का मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ विवरण देना था।
स्कूलों ने शनिवार शाम तक डीईओ दफ्तर को अब तक सर्वे में मिले बच्चों की जानकारी साझा की। इसमें अभी तक लगभग 40 के करीब ऐसे अनाथ बच्चे मिले हैं। इन बच्चों को नौंवीं से आगे की शिक्षा मुफ्त में प्रदान करवाने की योजना बनाई जा रही है। बच्चों की पूरी डिटेल मिलने पर यूटी प्रशासन के उच्चाधिकारियों के साथ इस पर चर्चा की जाएगी। उनके राय के अनुसार आगे का फैसला लिया जाएगा, अगले माह तक इस पर योजना बनाकर इसे लागू किया जाएगा।
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क्या कहते हैं अधिकारी
विद्यार्थियों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेना विभाग का बहुत ही सराहनीय कदम है। ऐसी नकारात्मक परिस्थिति का बच्चे के भविष्य पर असर नहीं पड़ना चाहिए। -स्वर्ण सिंह कंबोज, अध्यक्ष, यूटी कैडर एजुकेशन इंप्लाइज यूनियन
सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्यों को बच्चों की जिम्मेदारी लेने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने भी सभी राज्यों के जिला प्रशासन को कोरोना महामारी के कारण अनाथ हुए बच्चों की जिम्मेदारी लेने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है राज्यों की ओर से सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बच्चों की बुनियादी जरूरतें पूरी हों। इसके लिए किसी आदेश का इंतजार नहीं करें।
क्या-क्या जानकारी देनी है फार्म में
शिक्षकों ने बताया कि सर्वे में माता-पिता का नाम, पेशा, घर के पत्ते के साथ मृत्यु का कारण और दिनांक आदि की जानकारी देनी है। शिक्षकों ने पहले विद्यार्थियों के साथ बने व्हाट्सएप ग्रुप में पता किया कि किस के घर में कोरोना महामारी के कारण कोई अनहोनी हुई है। इसके बाद उनके घर जाकर पूरी जानकारी एकत्रित की जा रही है।
निजी स्कूल के विद्यार्थी को वहीं पढ़ाया जाए
शिक्षा विभाग की तरफ से कोरोना महामारी के कारण प्रभावित हुए विद्यार्थियों की शिक्षा का जिम्मा उठाना सराहनीय कदम है। मेरा ये मानना है कि जो विद्यार्थी निजी स्कूल में पढ़ रहा है और उसने कोरोना महामारी के कारण अपने माता-पिता को खो दिया है। उसकी आगे की पढ़ाई उसी स्कूल में जारी रखी जाए। चाहे इसकी जिम्मेदारी स्कूल अपने स्तर पर ले या सरकार उसकी शिक्षा के खर्च का वहन करे।
- नितिन गोयल, अध्यक्ष, अभिभावक संघ, चंडीगढ़
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जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी सरकारी स्कूलों को निर्देश जारी कर शनिवार तक ऐसे बच्चों के घर जाकर सर्वे करने को कहा था। शिक्षकों ने महामारी के कारण माता-पिता दोनों या किसी एक को खोने वालों का मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ विवरण देना था।
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स्कूलों ने शनिवार शाम तक डीईओ दफ्तर को अब तक सर्वे में मिले बच्चों की जानकारी साझा की। इसमें अभी तक लगभग 40 के करीब ऐसे अनाथ बच्चे मिले हैं। इन बच्चों को नौंवीं से आगे की शिक्षा मुफ्त में प्रदान करवाने की योजना बनाई जा रही है। बच्चों की पूरी डिटेल मिलने पर यूटी प्रशासन के उच्चाधिकारियों के साथ इस पर चर्चा की जाएगी। उनके राय के अनुसार आगे का फैसला लिया जाएगा, अगले माह तक इस पर योजना बनाकर इसे लागू किया जाएगा।
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क्या कहते हैं अधिकारी
विद्यार्थियों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेना विभाग का बहुत ही सराहनीय कदम है। ऐसी नकारात्मक परिस्थिति का बच्चे के भविष्य पर असर नहीं पड़ना चाहिए। -स्वर्ण सिंह कंबोज, अध्यक्ष, यूटी कैडर एजुकेशन इंप्लाइज यूनियन
सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्यों को बच्चों की जिम्मेदारी लेने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने भी सभी राज्यों के जिला प्रशासन को कोरोना महामारी के कारण अनाथ हुए बच्चों की जिम्मेदारी लेने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है राज्यों की ओर से सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बच्चों की बुनियादी जरूरतें पूरी हों। इसके लिए किसी आदेश का इंतजार नहीं करें।
क्या-क्या जानकारी देनी है फार्म में
शिक्षकों ने बताया कि सर्वे में माता-पिता का नाम, पेशा, घर के पत्ते के साथ मृत्यु का कारण और दिनांक आदि की जानकारी देनी है। शिक्षकों ने पहले विद्यार्थियों के साथ बने व्हाट्सएप ग्रुप में पता किया कि किस के घर में कोरोना महामारी के कारण कोई अनहोनी हुई है। इसके बाद उनके घर जाकर पूरी जानकारी एकत्रित की जा रही है।
निजी स्कूल के विद्यार्थी को वहीं पढ़ाया जाए
शिक्षा विभाग की तरफ से कोरोना महामारी के कारण प्रभावित हुए विद्यार्थियों की शिक्षा का जिम्मा उठाना सराहनीय कदम है। मेरा ये मानना है कि जो विद्यार्थी निजी स्कूल में पढ़ रहा है और उसने कोरोना महामारी के कारण अपने माता-पिता को खो दिया है। उसकी आगे की पढ़ाई उसी स्कूल में जारी रखी जाए। चाहे इसकी जिम्मेदारी स्कूल अपने स्तर पर ले या सरकार उसकी शिक्षा के खर्च का वहन करे।
- नितिन गोयल, अध्यक्ष, अभिभावक संघ, चंडीगढ़