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सांग उत्सव: बचपन में हुआ रिश्ता टूटा तो रूपकला ने दिखाई जादूखोरी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 16 Jun 2016 01:32 AM IST
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सांग उत्सव
- फोटो : amar ujala
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टैगोर थिएटर में सांग उत्सव के तीसरे दिन रूप कला जादूखोरी सांग पेश किया गया। आठ दिवसीय सांग उत्सव का आयोजन सूचना जन संपर्क एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा की ओर से हो रहा है।
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सांग उत्सव में बुधवार को पंडित राम किशन की रचना और राम शरण के निर्देशन में रूप कला जादूखोरी सांग को पेश किया गया। सांग की कहानी में दिखाया गया है कि असम के शहर डिब्रूगढ़ के पंडित दीनानाथ अपनी तीन वर्ष की बेटी रूपकला की सगाई रंगून के पंडित परमानंद के पुत्र चत्र सुजान के साथ कर देते हैं। लगभग 15 वर्षों के बाद पंडित परमानंद मर जाते हैं और रूपकला की मां रूपवति भी चल बसती है। कुछ दिन बाद चत्र सुजान की मां नाई को डिब्रूगढ़ भेजती है और रूपकला का चरित्र जानने को कहती है।
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रास्ते में नाई को पता चलता है कि रूपकला एक जादूखोरी मनियारी के साथ रहती है और जादू सीखती है। वापस आकर नाई सारी बात सुजान की मां को बता देता है। पंडित दीनानाथ को जब यह पता लगा है तो सुजान की मां के पास बात समझाने जाता है। लेकिन बात नहीं बनती। इसके बाद रूपकला और चत्र सुजान का रिश्ता टूट जाता है। पंडित दीनानाथ घर आकर रूपकला पर गुस्सा होता कि जादूखोरी मनियारी के साथ रहने की वजह से तेरा रिश्ता टूट गया।
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रूपकला का दिल साफ होता है और वह चत्र सुजान की मां को कुष्ठ रोग का श्राप दे देती है। जिसका असर भी हो जाता है। एक दिन रूपकला बाबा का भेष बनाकर सुजान की मां का हाल जानने पहुंच जाती है और कहती है अगर आप अपने पुत्र का विवाह रूपकला से कर दो और रूपकला आप का स्नान करवा दे तो आप कुष्ठ मुक्त हो जाएंगी। यह बात मानकर वह दोनों की शादी करा देती है। अंत में दिखाया जाता है कि वह कुष्ठ मुक्त हो जाती है।