गिनती के बचे कोरोना मरीज फिर भी पीजीआई में 350 बेड आरक्षित...बाकी रोगी झेल रहे मुसीबत
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पीजीआई ने कोरोना महामारी के विकराल दौर में नेहरू एक्सटेंशन को कोविड अस्पताल बनाकर सराहनीय योगदान दिया। अब स्थिति नियंत्रण में आ चुकी हैं। मौजूदा समय यहां 70 से भी कम मरीज भर्ती हैं लेकिन 350 से ज्यादा बेड आरक्षित रखे गए हैं। ऐसे में एक्सटेंशन बिल्डिंग में शिफ्ट किए मरीजों को बेड की किल्लत झेलनी पड़ रही है।
आलम यह है कि सैकड़ों बेड खाली होने के बावजूद दूसरे विभागों के खाली बेड पर भर्ती होकर इलाज कराने को मजबूर हैं। पीजीआई प्रशासन भी चाहता है कि अब कोविड अस्पताल को किसी अन्य जगह पर शिफ्ट कर दिया जाए लेकिन वह अपने स्तर पर निर्णय नहीं ले सकता। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
शैक्षणिक कार्य भी हो रहा प्रभावित
पीजीआई प्रशासन के अनुसार नेहरू एक्सटेंशन आरक्षित होने के कारण मरीजों के साथ ही उनका शैक्षणिक कार्य भी प्रभावित हो रहा है। पीजीआई प्रशासन का कहना है कि चंडीगढ़ के अलावा अन्य प्रदेशों से आने वाले मरीजों का दबाव ज्यादा होने के कारण किसी भी यूनिट में इतनी जगह नहीं बचती, जहां कोविड अस्पताल को शिफ्ट किया जा सके। ऐसे में किसी अन्य अस्पताल में कोविड अस्पताल बनाना ही एकमात्र विकल्प बच गया है।
कई विकल्प हैं सामने
शहर में कोरोना संक्रमण का ग्राफ कम होने पर पीजीआई के बजाय कई अन्य ऐसे विकल्प बच गए हैं जहां प्रशासन को वेट यूनिट बना सकता है। इसमें सेक्टर- 45 स्थित सिविल अस्पताल, सेक्टर- 48 स्थित 100 बेड के अस्पताल के साथ ही जीएमसीएच- 32 शामिल हैं।
पीजीआई में कोविड के मरीजों की मौजूदा स्थिति
- आईसीयू में 17
- आइसोलेशन वार्ड में 21
- नेहरू अस्पताल में 3
- अन्य जगह पर 19
पीजीआई कोविड अस्पताल में आरक्षित बेड
- नेहरू एक्सटेंशन की क्षमता 410 बेड
- वर्तमान में भर्ती मरीज 60
- खाली बेड की संख्या 350
- आईसीयू की क्षमता 30
- वर्तमान में आईसीयू में भर्ती मरीज 17
इन चार विभागों के मरीज ज्यादा परेशान
कोविड अस्पताल बनाए गए नेहरू एक्सटेंशन में चार डिपार्टमेंट ईएनटी, रेडियोथैरेपी, हीप्टोलॉजी (लिवर) और एंडोक्राइनोलॉजी को शिफ्ट किया गया है। लेकिन कोरोना महामारी के दौरान इसे कोविड-अस्पताल घोषित करने के बाद इन चारों भागों के मरीजों की स्थिति सबसे ज्यादा दयनीय हो गई है। इन विभागों के गंभीर मरीजों को इमरजेंसी के साथ ही अन्य विभागों में खाली बेड पर भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
कई खूबियां हैं नेहरू एक्सटेंशन की बिल्डिंग में
इस हॉस्पिटल को सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (सीपीडब्ल्यूडी) ने तैयार किया है। यह भारत का पहला ऐसा सरकारी अस्पताल है जिसे ग्रीन बिल्डिंग बनाने के लिए प्लेटिनम सर्टिफिकेट मिला है। यह एक ऐसी बिल्डिंग है, जिसमें बिजली बचाने के हाईटेक उपकरण लगे हैं जो हर साल चार करोड़ रुपये की बिजली और एक हजार लीटर पानी रोजाना बचाएगा।
सबकुछ ऑटोमेटिक
यहां ऑटोमेटेड मैटीरियल ट्रांसपोर्ट सिस्टम बनाया गया है। इसकी मदद से सैंपल सीधे लैब में मात्र 30 सेकेंड में भेजे जा सकेंगे, जिसे अब तक मरीज या तीमारदार को ले जाना पड़ता था। सेंट्रल एयर क्लीनर एसी की हवा को साफ करके भेजेगा, जिससे इंफेक्शन का खतरा कम होगा। हॉस्पिटल के बाहर बने गार्डन में औषधीय पौधे लगाए गए हैं, जो दूषित हवा को साफ करने का काम करेंगे।
इतने यूनिट कि गिनते रह जाओगे
ग्राउंड फ्लोर पर फैकल्टी रूम, एडमिनिस्ट्रेशन, कैफेटेरिया व रेडिएशन थेरेपी विंग है। फर्स्ट फ्लोर पर ईएनटी के 47 वार्ड व माइनर ओटी है। दूसरे फ्लोर पर हीप्टोलाजी विंग व 45 बेड के अतिरिक्त एंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट के साथ 36 बेड हैं। तीसरे फ्लोर पर 78 प्राइवेट रूम हैं, वहीं चौथे फ्लोर पर 10 ओटी, आईसीयू व सीसीयू बनाए गए हैं।
नेहरू एक्सटेंशन में कोरोना के मरीजों की संख्या काफी कम हो गई है। इस संबंध में भारत सरकार को सूचित करने के साथ ही प्रशासन से उसे किसी अन्य अस्पताल में शिफ्ट करने पर वार्ता चल रही है। बिना निर्देश के कोविड अस्पताल को कहीं और शिफ्ट नहीं किया जा सकता। नेहरू एक्सटेंशन के आरक्षित होने के कारण अन्य विभागों के मरीजों को काफी परेशानी हो रही है लेकिन पीजीआई अपने स्तर पर हरसंभव सुविधा व बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है। -प्रो जगतराम, पीजीआई निदेशक।