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बाढ़ के पानी से घिरे 35 गांव, आने-जाने के रास्ते बंद, सीएम ने हेलीकॉप्टर से लिया जायजा

Mon, 30 Jul 2018 09:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 30 Jul 2018 09:14 AM IST
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35 villages surrounded by flood waters in haryana cm khattar review situation
बाढ़

हथिनी कुंड पर पानी का लेवल छह लाख से कम होकर दो लाख क्यूसेक रह गया है, लेकिन यमुना का रौद्र रूप बरकरार है। छह लाख क्यूसेक पानी की रफ्तार ने आसपास के पांच किमी के इलाके में जमकर तबाही मचाई है। आधी रात के बाद पानी किनारे तोड़ते हुए गांवों में घुस गया। खेत, सड़कें और गलियां पानी से भर गई हैं।

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बाढ़ की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रविवार को पांच जिलों के डीसी की वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिए मीटिंग ली और दोपहर को हथिनी कुंड बैराज से लेकर करनाल तक यमुना और आसपास के इलाके का हेलीकॉप्टर से निरीक्षण किया। वहीं बेलगढ़ गांव में बाढ़ का निरीक्षण करने पहुंचे सिंचाई विभाग के अधिकारियों का ग्रामीणों ने विरोध किया और उन्हें यहां घुसने नहीं दिया। 
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अधिकारियों के पहुंचने की जानकारी मिलते ही यहां कई गांवों के लोग एकत्र हो गए और उन पर बाढ़ राहत कार्यों की आड़ में ग्रांट की राशि में घपला करने का आरोप लगाया। अधिकारियों ने मौके पर ही बीस लाख रुपए की ग्रांट से काम करवाने का आश्वासन देकर अपना पिंड छुड़ाया। उन्होंने यमुना में किए जा रहे अवैध खनन का भी मुद्दा उठाया और खनन विभाग के अधिकारियों पर अवैध माइनिंग माफिया के साथ मिलीभगत के आरोप लगाएं। वहीं बाढ़ के कारण पौबारी गांव के लोग अपने घर की छत पर आश्रय लेने को मजबूर हो गए हैं। यहां जाने का कोई रास्ता नहीं बचा है। गांव के चारों तरफ यमुना बह रही है। 
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इन गांवों में भरा पानी, प्रशासन की राहत नहीं पहुंची
बेलगढ़, नवाजपुर, माली माजरा, भीलपुरा, बड़ा लापरा, पौबारी, नाहरपुर, डिक्का, लाल छप्पर, राज्यमंत्री कर्णदेव कांबोज का गांव मंधार, राझेडी, कण्डरौली, संधाला, संधाली, गुमथला, जठलाना, मारूपुर, उन्हेडी, एमटी करहेडा, समेत 35 गांवों में पानी घुस चुका है। यहां करीब दस हजार एकड़ में खड़ी धान और गन्ने की फसल पूरी तरह से डूब गई है। अगर पानी नहीं रूका तो यहां नुकसान और ज्यादा बढ़ सकता है। यहां किसी अधिकारी ने भी दौरा नहीं किया और न ही राहत सामग्री पहुंचाई।  
 

सीएम का हेलीकॉप्टर आया तो लोगों ने समझा राहत सामग्री मिलेगी

35 villages surrounded by flood waters in haryana cm khattar review situation
manohar lal khattar

करीब एक दर्जन गांवों में खाने-पीने की वस्तुओं की किल्लत हो गई है। यहां सड़कों पर तीन से चार फीट पानी भरा है। कई जगह सात से आठ फीट पानी भी है। आवागमन के रास्ते बंद होने से लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। दोपहर को मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर गुजरा तो लोग टकटकी लगाएं आसमान की तरफ देखने लगे और सोचा की राहत के पैकेट बरसाएं जाएंगे, लेकिन हेलीकॉप्टर बिना कुछ गिराए ही आंखों से ओझल हो गया।  

अनाज खराब, खाने के लाले पड़े
बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों का कहना है कि घर में पड़ा अनाज बर्बाद हो गया है। साथ ही बढ़े जलस्तर के कारण मवेशियों को काफी परेशानी के बीच रखना पड़ रहा है।  

भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान संजु गुंदयाना ने सरकार से मांग की कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों की मदद करें और यमुना का जल स्तर कम होने के बाद प्रभावित फसलों की गिरदावरी करवाकर किसानों का प्रति एकड 50 हजार रुपये मुआवजा दिया जाए।  

इस बारे में सिंचाई विभाग के एक्सईएन हरिदेव कांबोज का कहना है कि मालीमाजरा और बेलगढ में यमुना की पटरी का दौरा करने गए थे। बाढ़ से कुछ किसानों के खेतों में पानी भर गया है, इसलिए लोगों में गुस्सा है। यमुना किनारे पटरी का कुछ हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हुआ है। इसे रिपेयर करवाने के लिए एस्टीमेट बनाया जाएगा और जल्दी ही यहां काम शुरू होगा। 

सीएम साहब ने हवाई सर्वेक्षण किया था। पानी का सैलाब निकल चुका है और फिलहाल स्थिति कंट्रोल में हैं। सावधानी के तौर पर कुछ गांवों को खाली करवाने का प्रयास किया था, लेकिन ग्रामीणों ने खुद ही मना कर दिया। खेतों में जो पानी भरा है, वो धीरे-धीरे उतरने लगा है।
-गिरीश अरोड़ा, डीसी, यमुनानगर  

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