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BJP सरकार के विजन डॉक्यूमेंट 2030 की पोल खुली, 35 फीसदी लोग अंगूठा छाप
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 12 Sep 2017 01:33 AM IST
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Manohar lal khattar
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हरियाणा की बीजेपी सरकार के विजन डॉक्यूमेंट 2030 की एक और पोल खुल गई। पता चला है कि प्रदेश में 35 फीसदी लोग अभी भी अंगूठा छाप हैं। ऐसे में मनोहर लाल सरकार का बढ़ता हरियाणा, प्रोग्रेसिव हरियाणा और पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार का नंबर वन हरियाणा शिक्षा के क्षेत्र में कागजों तक ही सिमटा हुआ है। प्रदेश की स्थापना का स्वर्ण जयंती वर्ष मनाया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह भी है कि पचास वर्ष बाद भी हरियाणवी सौ फीसदी साक्षर नहीं हो सके हैं।
साल 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की जनसंख्या दो करोड़ 53 आंकी गई, इसमें से सत्तर लाख 33 हजार लोग निरक्षर पाए गए। प्रदेश की कुल जनसंख्या के 35 प्रतिशत लोग अब भी अंगूठा टेक हैं। प्रदेश की मनोहर लाल सरकार इन आंकड़ों की पुष्टि भी करती है। सरकार ने विजन डॉक्यूमेंट-2030 के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों में खुद इस सच्चाई को स्वीकार किया है।
सरकार के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में 54.98 लाख और शहरी क्षेत्र में 15.35 लाख लोग अनपढ़ हैं। इन्हें बिल्कुल पढ़ना-लिखना नहीं आता। यही कारण है कि हरियाणा की साक्षरता दर वर्तमान में 76.64 प्रतिशत है। जबकि स्कूल जाने वाली लड़कियों का प्रतिशत 56.65 है। सामाजिक आर्थिक जनगणना से प्राप्त इन आंकड़ों के सामने आने से सरकार के समक्ष भी यह सवाल है कि आखिर 35 फीसदी लोग आज तक साक्षर क्यों नहीं हो पाए।
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साल 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की जनसंख्या दो करोड़ 53 आंकी गई, इसमें से सत्तर लाख 33 हजार लोग निरक्षर पाए गए। प्रदेश की कुल जनसंख्या के 35 प्रतिशत लोग अब भी अंगूठा टेक हैं। प्रदेश की मनोहर लाल सरकार इन आंकड़ों की पुष्टि भी करती है। सरकार ने विजन डॉक्यूमेंट-2030 के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों में खुद इस सच्चाई को स्वीकार किया है।
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सरकार के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में 54.98 लाख और शहरी क्षेत्र में 15.35 लाख लोग अनपढ़ हैं। इन्हें बिल्कुल पढ़ना-लिखना नहीं आता। यही कारण है कि हरियाणा की साक्षरता दर वर्तमान में 76.64 प्रतिशत है। जबकि स्कूल जाने वाली लड़कियों का प्रतिशत 56.65 है। सामाजिक आर्थिक जनगणना से प्राप्त इन आंकड़ों के सामने आने से सरकार के समक्ष भी यह सवाल है कि आखिर 35 फीसदी लोग आज तक साक्षर क्यों नहीं हो पाए।
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अब सरकार ने तैयार किया रोडमैप
Haryana CM Manohar lal Khattar
अब सरकार ने साक्षरता दर बढ़ाने को लेकर रोडमैप तैयार किया है। निरक्षर बुजुर्गों और अन्य आयु वर्ग के लोगों को अभियान चलाकर नाम लिखने, गिनती बताने और पढ़ने-लिखने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
देश में 22वें नंबर पर हरियाणा
साक्षरता दर के मामले में हरियाणा देश में 22वें स्थान पर है। पड़ोसी राज्यों पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड की साक्षरता दर इससे ज्यादा है। हरियाणा की 76.64 फीसदी जनसंख्या में 85.38 पुरुष और 66.77 प्रतिशत महिलाएं हैं। साल 2001 में यहां की साक्षरता दर 67.91 प्रतिशत थी।
2030 तक सौ फीसदी साक्षरता का लक्ष्य
हरियाणा सरकार ने विजन डॉक्यूमेंट में साल 2030 तक सौ फीसदी हरियाणा वासियों को साक्षर करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। साल 2019 तक 10 फीसदी लक्ष्य हासिल किया जाएगा। साल 2022 तक 30 प्रतिशत और अशिक्षा कम की जाएगी। जबकि 2030 तक सभी को साक्षर बनाया जाएगा। सीएम मनोहर लाल के अनुसार सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने केलिए सभी विभागों का सहयोग लेंगे। कोई भी सरकार इस डॉक्यूमेंट को नजरअंदाज नहीं कर पाएगी।
सरकारों की कमजोर इच्छा शक्ति मुख्य बाधा
शिक्षाविद् बजीर सिंह का कहना है कि प्रदेश की सरकारों की इच्छा शक्ति दृढ़ न होने के कारण आज भी एक तिहाई से ज्यादा लोग अनपढ़ हैं। आजादी के बाद लोगों ने खुद आगे आकर स्कूल बनाए और शिक्षा को प्रगति का द्वार माना, मगर सरकारें सभी को शिक्षा मुहैया कराने में असफल रहीं हैं। देश की जीडीपी का छह फीसदी और बजट का दस प्रतिशत शिक्षा पर खर्च न होना भी निरक्षरता का मुख्य कारण है।
देश में 22वें नंबर पर हरियाणा
साक्षरता दर के मामले में हरियाणा देश में 22वें स्थान पर है। पड़ोसी राज्यों पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड की साक्षरता दर इससे ज्यादा है। हरियाणा की 76.64 फीसदी जनसंख्या में 85.38 पुरुष और 66.77 प्रतिशत महिलाएं हैं। साल 2001 में यहां की साक्षरता दर 67.91 प्रतिशत थी।
2030 तक सौ फीसदी साक्षरता का लक्ष्य
हरियाणा सरकार ने विजन डॉक्यूमेंट में साल 2030 तक सौ फीसदी हरियाणा वासियों को साक्षर करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। साल 2019 तक 10 फीसदी लक्ष्य हासिल किया जाएगा। साल 2022 तक 30 प्रतिशत और अशिक्षा कम की जाएगी। जबकि 2030 तक सभी को साक्षर बनाया जाएगा। सीएम मनोहर लाल के अनुसार सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने केलिए सभी विभागों का सहयोग लेंगे। कोई भी सरकार इस डॉक्यूमेंट को नजरअंदाज नहीं कर पाएगी।
सरकारों की कमजोर इच्छा शक्ति मुख्य बाधा
शिक्षाविद् बजीर सिंह का कहना है कि प्रदेश की सरकारों की इच्छा शक्ति दृढ़ न होने के कारण आज भी एक तिहाई से ज्यादा लोग अनपढ़ हैं। आजादी के बाद लोगों ने खुद आगे आकर स्कूल बनाए और शिक्षा को प्रगति का द्वार माना, मगर सरकारें सभी को शिक्षा मुहैया कराने में असफल रहीं हैं। देश की जीडीपी का छह फीसदी और बजट का दस प्रतिशत शिक्षा पर खर्च न होना भी निरक्षरता का मुख्य कारण है।