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1986 के बेअदबी कांड का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, फायरिंग में चार युवकों की हुई थी मौत
Sat, 09 Mar 2019 12:30 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Sat, 09 Mar 2019 12:30 PM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
बहिबल कलां गोलीकांड की तरह वर्ष 1986 में नकोदर में हुई बेअदबी के बाद प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस फायरिंग मामले की जांच सीबीआई या एसआईटी को सौंपने की अपील और दोषियों पर कार्रवाई की मांग वाली याचिका 32 साल बाद हाईकोर्ट पहुंची है। इस मामले को लेकर जालंधर के लिबड़ां गांव के बलदेव सिंह द्वारा एडवोकेट एचसी अरोड़ा के जरिए याचिका में बताया गया कि 2 फरवरी 1986 में नकोदर के एक गुरुद्वारे में श्री गुरुग्रंथ साहिब के चार पावन स्वरूप जला दिए गए थे।
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4 फरवरी 1986 में रोष मार्च निकाला गया। आरोप है कि एसपी ऑपरेशंस अश्वनी कुमार की अगुवाई में पुलिस ने 300 गोलियां चलाई, जिसमें 4 युवकों की मौत हो गई थी। तत्कालीन डीएम डीएस गुरु के हस्ताक्षर से इन मृतक युवकों का पोस्टमार्टम करवा दिया गया। हालत तनावपूर्ण होने के कारण मृतकों के परिजनों को सूचित किए बिना उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।
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जब पुलिस ने मृतक युवकों की आस्थियां उनके परिजनों को देने की कोशिश की तो परिजनों ने इसे लेने से इंकार कर दिया था। सरकार ने इस मामले की जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस गुरनाम सिंह की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया था। आयोग ने पाया कि अश्वनी कुमार ने फायरिंग से पहले डीएम के आदेश नहीं लिए थे और न ही फायरिंग से पहले भीड़ को कोई चेतावनी दी थी।
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लंबे समय बाद 13 फरवरी को पंजाब विधान सभा में विधायक एचएस फूलका और कंवर संधू ने उठाया। याचिकाकर्ता ने इस फायरिंग के दोषी अधिकारियों, जिनमें तत्कालीन डीएम दरबारा सिंह गुरु, तत्कालीन एसएसपी मोहम्मद इजहार आलम और तत्कालीन एसपी ऑपरेशंस अश्वनी कुमार शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच कराने की मांग की गई है।