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फिर जलने लगी पराली: हरियाणा में तीन साल में सितंबर में सबसे ज्यादा मामले, वायु प्रदूषण में इजाफा

Fri, 29 Sep 2023 08:07 AM IST
निवेदिता वर्मा आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 29 Sep 2023 08:07 AM IST
सार

पराली जलाने के पीछे माना जा रहा है कि इस बार प्री मानसून और शुरुआती महीनों का मानसून अच्छा रहा था। इस वजह से समय पर ही धान की बुवाई हुई और कुछ फसलें जल्दी पक गईं। करीब 20 दिन पहले ही धान की अगेती किस्म 1509 मंडी में आ गई थी। वहीं, धान की खरीद का जल्दी शुरू होना भी एक वजह हो सकती है।

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32 cases of stubble burning reported in ten days in Haryana
पराली जलाते किसान - फोटो : पीटीआई

विस्तार

हरियाणा में पराली जलने की शुरुआत हो चुकी है। दस दिन में पराली जलाने के 32 मामले सामने आ चुके हैं, जो पिछले तीन सालों में सबसे ज्यादा है। पिछले साल 2022 में 28 सितंबर तक पराली जलाने का सिर्फ एक मामला सामने आया था, जबकि 2021 में एक भी घटना सामने नहीं आई थीं। इन दोनों सालों में स्थिति संतोष जनक थी। 
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साल 2020 में 41 मामले सामने आए थे। इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टिट्यूट (आईएआरआई) के मुताबिक 25 सितंबर के बाद से हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में तेजी आई। इसकी वजह से एनसीआर के दायरे में आने वाले हरियाणा के सात जिलों में वायु प्रदूषण में इजाफा हुआ है। 19 सितंबर तक सिर्फ एक जिले की हवा प्रदूषित थी। 
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खराब श्रेणी में गुरुग्राम का एक्यूआई
गुरुग्राम (मानेसर) का वायु गुणवत्ता सूचकांक 243 पहुंच गया है, जो खराब श्रेणी में आता है। नारनौल का एक्यूआई 186 रिकॉर्ड किया गया है। उधर, हरियाणा सरकार का दावा है कि हर जिले में निगरानी और सख्ती बढ़ा दी गई है। किसानों को जागरूक किया जा रहा है। कुछ जिलों में एक दो मामले सामने आ रहे हैं। अब तक चार किसानों पर जुर्माने के तहत कार्रवाई की गई है। हरियाणा के कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वह पराली का अपनी समृद्धि में इस्तेमाल करें। उसे बेचें। अच्छा मुनाफा कमाएं।
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इसलिए जल रही पराली
इस बार प्री मानसून और शुरुआती महीनों का मानसून अच्छा रहा था। इस वजह से समय पर ही धान की बुवाई हुई और कुछ फसलें जल्दी पक गईं। करीब 20 दिन पहले ही धान की अगेती किस्म 1509 मंडी में आ गई थी। वहीं, धान की खरीद का जल्दी शुरू होना भी एक वजह हो सकती है। इस बार धान की खरीब 25 सितंबर से शुरू हुई है, जबकि इससे पहले के सालों में एक अक्तूबर से धान की खरीद होती थी। पराली जलाने के मामले आगे और बढ़ सकते हैं। दरअसल अभी भी 60 फीसदी फसले खेत पर खड़ी हैं। जब इन फसलों की कटाई होगी तो फसल अवशेष के मामले बढ़ सकते हैं।

पंजाब में दोगुनी जल रही पराली
वहीं, हरियाणा के मुकाबले पंजाब में पराली जलाए जाने के मामले दोगुने हैं। पंजाब में 19 सितंबर से 28 सितंबर तक पराली जलाए जाने के 65 मामले सामने आ चुके हैं। गुरुवार को पंजाब में 33 घटनाएं दर्ज की गई।


किस दिन कितनी जली पराली
तारीख                           पराली जलने की घटनाएं

28                                       8
27                                       9
26                                       2
25                                       1
24                                       0
23                                       3
22                                       2
21                                       2
20                                       2
19                                       1

किस जिले का कितना वायुप्रदूषण
जिला                              वायु गुणवत्ता सूचकांक

भिवानी                                      110
चरखीदादरी                                 77
फरीदाबाद                                  134
गुरुग्राम                                      243
झज्जर                                        118
जींद                                            93
करनाल                                        72
नारनौल                                       186
नूंह                                              40
सोनीपत                                      153
 

किसानों में धीरे-धीरे जागरूकता आ रही है। पराली जलाने की कुल घटनाओं में हरियाणा का हिस्सा 20 फीसदी होता है, जबकि पंजाब का 80 फीसदी है। हरियाणा सरकार ने पराली के लिए जो नीतियां बनाईं हैं, वह किसानों के लिए फायदेमंद है। पूरी उम्मीद है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार किसान कम पराली जलाएंगे। - प्रोफेसर रविंद्रा खैवाल, पर्यावरण विशेषज्ञ व कम्युनिटी मेडिसिन पीजीआई

 
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