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Chandigarh News: एमपीएड कोर्स शुरू करने को 30 छात्रों ने किया ईमेल, निदेशक बोले- अभी फैसला सुरक्षित रखा
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चंडीगढ़। सेक्टर-11 के पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज में एमपीएड कोर्स को लेकर पोर्टल शुरू नहीं किया गया है। बीपीएड के आखिरी सेमेस्टर के फाइल एग्जाम हुए भी एक महीने से ज्यादा का समय हो गया है, लेकिन आगे की कक्षा में प्रवेश का रास्ता बंद है। इसके कारण फिजिकल एजुकेशन के विद्यार्थियों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 30 विद्यार्थियों ने यह कोर्स दोबारा शुरू करने को लेकर अमर उजाला को ईमेल किए हैं।
हर साल बीपीएड के आखिरी सेमेस्टर के पेपर होने के बाद ही पोर्टल खुल जाता था। विद्यार्थी एमपीएड में प्रवेश के लिए आवेदन शुरू कर देते थे। एंट्रेस टेस्ट के बाद 40 सीटों पर दाखिला होता था। इस बार प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।
विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने सेक्टर 11 के पीजीजीसी से बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन (बीपीएड) कोर्स किया है और उसी संस्थान से एमपीएड कोर्स करने की योजना बना रहे थे। उन्होंने एमपीएड के लिए किसी अन्य कॉलेज में आवेदन नहीं किया है, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि यह कोर्स पीजीजीसी-11 में जारी रहेगा। अभी पता चला कि एमपीएड कोर्स बंद हो सकता है। उन्होंने इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील उठाई। उनका कहना है कि कोर्स बंद करने से उनका एक पूरा साल बर्बाद हो जाएगा। इसके अलावा पीजीजीसी 11 की फीस वहन करने योग्य है। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए यह कॉलेज सहारा है। वह यहां अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं।
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चंडीगढ़ में अकेले इस सरकारी कॉलेज में था एमपीएड कोर्स
उन्होंने कहा कि एमपी एड एक ऐसा कोर्स है जो पूरे चंडीगढ़ के सरकारी कॉलेजों में नहीं करवाया जाता। इसी कॉलेज में यह कोर्स चल रहा था। जिसे बंद कर दिया गया है। इसमें विद्यार्थियों की 100% प्लेसमेंट हो जाती है और प्लेसमेंट के दौरान ही विद्यार्थियों को लगभग 40 हजार रुपए तक की जॉब मिल जाती है। इसीलिए इस कोर्स को करने के लिए बड़ी संख्या में विद्यार्थी अप्लाई करते हैं। इस कोर्स का 2 साल का सिर्फ 80 हजार रुपए खर्च है। हालांकि प्राइवेट कॉलेज में यह कोर्स 5 लाख रुपए में होता है।
कोर्स बंद करने का कारण टीचरों और संसाधनों की कमी बताई जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी में भी यह कोर्स है लेकिन वहां पर बच्चों को कम चीजें सिखाई जाती हैं। सूत्रों के मुताबिक यहां बीएससी बायोटेक्नोलॉजी में भी नया एडमिशन नहीं हो रहा है। बीएससी बायोटेक्नोलॉजी के लिए दूसरे और तीसरे साल के विद्यार्थियों को एडमिशन दिया जा रहा है, लेकिन नया कोई भी एडमिशन विद्यार्थियों का नहीं किया जा रहा।
पीयूएसयू ने सौंपा लेटर, बीए की सीटें बढ़ाने की भी उठाई मांग
कॉलेज के पीयूएसयू के सदस्य मनविंदरजीत सिंह, करणबीर सिंह, सुखमंजीत कौर, लवजोत सिंह, अनीश रखरा, गुरनीत कौर और कोमलदीप कौर ने बताया कि बीए की सीटों को 700 से बढ़ाकर 1000 करने और बीएससी बायोटेक्नोलॉजी और एमपीएड कोर्सों को बहाल करने के मामले में डीएचई रुबिंदरजीत सिंह बराड़ (पीसीएस) को एक पत्र सौंपा और व्यक्तिगत रूप से उनसे मुलाकात की। यह पत्र प्रिंसिपल को भी सौंपा गया। दोनों ने इन मांगों पर तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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हर साल बीपीएड के आखिरी सेमेस्टर के पेपर होने के बाद ही पोर्टल खुल जाता था। विद्यार्थी एमपीएड में प्रवेश के लिए आवेदन शुरू कर देते थे। एंट्रेस टेस्ट के बाद 40 सीटों पर दाखिला होता था। इस बार प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।
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विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने सेक्टर 11 के पीजीजीसी से बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन (बीपीएड) कोर्स किया है और उसी संस्थान से एमपीएड कोर्स करने की योजना बना रहे थे। उन्होंने एमपीएड के लिए किसी अन्य कॉलेज में आवेदन नहीं किया है, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि यह कोर्स पीजीजीसी-11 में जारी रहेगा। अभी पता चला कि एमपीएड कोर्स बंद हो सकता है। उन्होंने इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील उठाई। उनका कहना है कि कोर्स बंद करने से उनका एक पूरा साल बर्बाद हो जाएगा। इसके अलावा पीजीजीसी 11 की फीस वहन करने योग्य है। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए यह कॉलेज सहारा है। वह यहां अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं।
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चंडीगढ़ में अकेले इस सरकारी कॉलेज में था एमपीएड कोर्स
उन्होंने कहा कि एमपी एड एक ऐसा कोर्स है जो पूरे चंडीगढ़ के सरकारी कॉलेजों में नहीं करवाया जाता। इसी कॉलेज में यह कोर्स चल रहा था। जिसे बंद कर दिया गया है। इसमें विद्यार्थियों की 100% प्लेसमेंट हो जाती है और प्लेसमेंट के दौरान ही विद्यार्थियों को लगभग 40 हजार रुपए तक की जॉब मिल जाती है। इसीलिए इस कोर्स को करने के लिए बड़ी संख्या में विद्यार्थी अप्लाई करते हैं। इस कोर्स का 2 साल का सिर्फ 80 हजार रुपए खर्च है। हालांकि प्राइवेट कॉलेज में यह कोर्स 5 लाख रुपए में होता है।
कोर्स बंद करने का कारण टीचरों और संसाधनों की कमी बताई जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी में भी यह कोर्स है लेकिन वहां पर बच्चों को कम चीजें सिखाई जाती हैं। सूत्रों के मुताबिक यहां बीएससी बायोटेक्नोलॉजी में भी नया एडमिशन नहीं हो रहा है। बीएससी बायोटेक्नोलॉजी के लिए दूसरे और तीसरे साल के विद्यार्थियों को एडमिशन दिया जा रहा है, लेकिन नया कोई भी एडमिशन विद्यार्थियों का नहीं किया जा रहा।
पीयूएसयू ने सौंपा लेटर, बीए की सीटें बढ़ाने की भी उठाई मांग
कॉलेज के पीयूएसयू के सदस्य मनविंदरजीत सिंह, करणबीर सिंह, सुखमंजीत कौर, लवजोत सिंह, अनीश रखरा, गुरनीत कौर और कोमलदीप कौर ने बताया कि बीए की सीटों को 700 से बढ़ाकर 1000 करने और बीएससी बायोटेक्नोलॉजी और एमपीएड कोर्सों को बहाल करने के मामले में डीएचई रुबिंदरजीत सिंह बराड़ (पीसीएस) को एक पत्र सौंपा और व्यक्तिगत रूप से उनसे मुलाकात की। यह पत्र प्रिंसिपल को भी सौंपा गया। दोनों ने इन मांगों पर तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया है।