हरियाणा: 25000 किसानों ने धान रोपाई से खींचे हाथ, पोर्टल पर कराया पंजीकरण
- सरकार ने मेरा पानी-मेरी विरासत योजना की शर्तों में दी ढील
- अब पाबंदी नहीं, किसान प्रेरित किए जाएंगे, विपक्ष कर रहा था विरोध
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हरियाणा सरकार ने धान बुआई की शर्तों में ढील दी है। सरकार अब डार्क जोन को कम भू-जल वाले क्षेत्र में धान बुआई पूरी तरह से प्रतिबंधित करने से पहले किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रेरित करेगी। ताजा निर्देशों में सरकार ने रोक की जगह प्रेरित करना शामिल कर दिया है। हालांकि, 25000 किसानों ने धान बुआई न करने को लेकर 'मेरा पानी, मेरी विरासत' पोर्टल पर पंजीकरण भी किया है।
सरकार के लिए यह उत्साहित करने वाली बात है। विपक्ष सरकार की इस योजना में किसानों पर पाबंदी लगाने का विरोध कर रहा रहा था। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा व एआईसीसी मुख्य प्रवक्ता धरने दे रहे थे। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने निर्णय वापस न लेने पर आंदोलन की चेतावनी दे दी थी।
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विपक्ष के कड़े रुख के बाद सरकार ने पाबंदी के बजाए रतिया, सिवान, गुहला, पिपली, शाहबाद, बवैन, इस्माईलाबाद व सिरसा के जिन गांवों का भूजल स्तर 40 मीटर या उससे अधिक है, उन्हें बीते वर्ष बोए गए धान के 50 फीसदी रकबे में अन्य फसलों की बुआई की सलाह दी है। पंचायती जमीन के जिन 12 ब्लॉक में भू जल स्तर 35 मीटर या उससे अधिक है, वहां किसान धान की खेती नहीं कर सकेंगे।
इसके एवज में 7500 रुपये प्रति एकड़ दिए जाएंगे। जिससे कई पंचायतों को फायदा होगा, चूंकि उनकी भूमि धान बुआई के लिए कम रेट पर ली जाती है। जहां बाढ़ग्रस्त क्षेत्र हैं, वहां के किसानों को कृषि विभाग को लिखित में देना होगा कि वे बासमती व चावल की कौन सी फसल की बुआई कर रहे हैं।
सरकार ने एक और बड़ा निर्णय लिया है कि मक्का, बाजरा व कपास का बीमा भी सरकारी खर्च पर होगा। फसल विविधीकरण अपनाने वाले किसानों को 7000 रुपये प्रति एकड़ दो किस्तों में मिलेंगे। पहली किस्त फसल बुआई पर 2000 रुपये व दूसरी किस्त 5000 रुपये फसल पकने पर मिलेगी। 50 हॉर्स पावर की मोटर ट्यूबवेल पर लगाकर खेती करने वाले किसानों को धान बुआई न करने की सलाह दी गई है।
सुरजेवाला का ट्वीट
एआईसीसी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा कि हरियाणा के किसान की जीत हुई है। किसान और कांग्रेस का संघर्ष रंग लाया। उनकी मांग है कि सरकार 9 मई 2020 का धानबंदी का आदेश वापस ले। पंचायती जमीन पर धानबंदी की इजाजत दी जाए। दादुपुर-नलवी नहर शुरू करें।